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‘एनपीके’ को बना रहे थे ‘डीएपी’

मऊ। निज संवाददाता।

सरायलखंसी थानान्तर्गत अहिलाद चट्टी पर एक मकान में नकली उर्वरक बनाने का भंडाफोड़ गुरुवार को एसओजी और सरायलखंसी पुलिस ने किया। मिलावट करते रंगेहाथ पुलिस ने आधा दर्जन लोगों सहित ट्रक चालक को गिरफ्तार कर लिया है। मिलावट खोर एनपीके लिखी बोरियों को खोलकर उसमें रखी खाद को इफको डीएपी लिखी बोरियों में भरकर पैक कर रहे थे। यह गेारखधंधा काफी अरसे से चल रहा था। बताया जाता है कि एसओजी प्रभारी राम नरेश यादव व सर्विलांस प्रभारी एसके शुक्ल रोजाना की तरह गश्त पर थे। उन्हें मुखबिर से अहिलाद चट्टी पर एक मकान में खाद में मिलावट किये जाने की सूचना मिली। एसओजी प्रभारी ने थानाध्यक्ष देवेंद्र सिंह को भी मौके पर बुला लिया। संयुक्त पुलिस टीम ने बताये गये मकान में छापा मारा। वहां पर आधा दर्जन लोग उर्वरक में मिलावट करते हुए मिले। मौके पर इफ्को डीएपी लिखी 118 खाली बोरियां, 71 पैक की हुईं और 133 भरी लेकिन बिना पैक की हुई बोरियां बरामद की गयीं। मौके पर पैकिंग मशीन, धागा भी बरामद किया गया। मकान के बाहर एक खाली ट्रक खड़ा था। पुलिस के अनुसार ट्रक एक माल तैयार हो जाने के बाद नकली डीएपी लादकर आजमगढ़ ले जाने वाला था।

पुलिस ने मकान स्वामी रानीपुर थाने के पियरा गांव निवासी छबिनाथ चौहान के साथ ही मिलावट करने में मशगूल कोपागंज थाने के जोगीबीर गांव निवासी कबिराज राजभर, टडिम्यांव गांव निवासी राम अवध कन्नौजिया, उमेश, हरेंद्र और परवीन तथा ट्रक चालक स्वामी दक्षिण टोला थाना क्षेत्र के हकीकतपुर निवासी रमाशंकर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस की सूचना पर जिला कृषि अधिकारी एनके त्रिपाठी ने भी मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल की। पुलिस टीम में आरक्षी राजेंद्र सिंह, अरविंद शुक्ल सेनापति , शहजादा खान , मनोज सिंह और अर्जुन आदि थे। इनसेट : प्रयोगशाला भेजे गये नमूनेजिला कृषि अधिकारी एनके त्रिपाठी का कहना है कि प्रथम दृष्ट्या तो भरी जा रही खाद एनपीके ही लग रही थी लेकिन उसके नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला को भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट मिलने पर ही वास्तविकता सामने आएगी। इनसेट : प्रति बोरी तीन सौ रुपयों के लिए मिलावटखोरी एनपीके और डीएपी उर्वरकों के मूल्यों में तीन सौ रुपये का भारी अंतर है। इफ्को एनपीके को मूल्य साढ़े छह सौ रुपये है जबकि इफ्को कंपनी की डीएपी लगभग साढ़े नौ रुपये की आती है। इस तरह यदि असली इफ्को की ही एनपीके खाद को इफ्को की डीएपी के मूल्य में बेचा जाता रहा हो तो भी इन मिलावटखोरों को प्रति बोरी तीन सौ रुपये की अवैध आय हो रही थी। जिला कृषि अधिकारी का कहना है कि उर्वरकों का धंधा दस से पांच रुपये की आय पर होता है। मिलावटखोर एक ही बोरी में तीन सौ रुपये का मुनाफा कमाने का ‘कुकृत्य’ कर रहे हैं।

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