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प्रार्थना और संकल्प के साथ काम करो : रविशंकर

गाजीपुर। निज संवाददाता

आर्ट ऑफ लिविंग के प्रणेता श्रीश्री रविशंकर ने गुरुवार को यहां लोगों को जीने की कला सिखायी। अज्ञानता, विपन्नता को ज्ञान, ध्यान और गान से दूर कर संपन्नता लाने का मंत्र दिया। अपना-पराया का भेद मिटाकर सबको अपनाने का संकल्प कराया। हर व्यक्ति के अंदर मौजूद परमात्मा को पहचानने की सलाह दी। आध्यात्मिक गुरु सबकी परेशानियों की पोटली बांधी और हर चेहरे पर मुस्कान बिखेर विदा हो गये।

उन्होंने लोगों से भ्रष्टाचार, बेकारी और अशिक्षा मिटाने की अपील की। लंका मैदान में उमड़े जनसमूह के बीच आध्यात्मिक गुरु ने करीब एक घंटा बताया। श्रीश्री ने जीवन के गूढ़ रहस्यों को बड़े ही सहज और सरल अंदाज में समझाया। कहा, ईश्वर एक है और वह सबके भीतर मौजूद है। सूरज से निकलने वाली सात रंगों की किरणों की तरह परमात्मा के एक स्वरूप को हम अलग-अलग नाम से जानते-पहचानते हैं। कहा कि जाति-मजहब का भेद मिटाकर सबको अपनाओ। पूरी दुनिया हमारा परिवार है और हम सबके हैं। जाति-पाति का भेद छोड़ते हुए सत्संग करो, सेवा करो तो जीवन सुखी हो जायेगा।श्रीश्री ने कहा कि भारत का ज्ञान अनमोल है।

आदर्श ऊंचा है। इसे दुनिया भर में पहुंचाना होगा। हम हर तरह से सक्षम हैं। बावजूद इसके भ्रष्टाचार के कारण हम पिछड़ गये हैं। इसे मिटाना होगा। इसके खिलाफ सब एकजुट हो। उन्होंने स्वस्थ और सुखी जीवन के लिए किसानों, व्यापारियों, महिलाओं को सुखी करने की नसीहत दी। संबोधन के दौरान आध्यात्मिक गुरु बीच-बीच में लोगों से हाथ उठवाकर भ्रष्टाचार, जातीयता व अन्य सामाजिक बुराइयों को मिटाने के लिए संकल्प कराते रहे। अंत में वह रैम्प पर चलकर लोगों के बीच गये और पुष्पवर्षा कर आशीर्वाद दिया। ‘नारायण-नारायण जय-जय गोविन्द हरे..’ के भजन पर पूरा जनसमूह झूम उठा। जिलाधिकारी लोकेश एम ने आध्यात्मिक गुरु का स्वागत किया। उनके साथ आईएएस डा.रूपेश कुमार, डीडीओ अनिल कुमार सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। आध्यात्मिक गुरु की झलक पाने को उमड़े लोग

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