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सबको साधने की होगी चुनौती

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी शुक्रवार सुबह संसद में आम बजट पेश करेंगे तो सबकी उम्मीद भरी नजरें इस पर टिकी होंगी कि दादा के पिटारे से हमारे लिए क्या-क्या निकलेगा। लेकिन प्रणब दा के सामने सबसे बड़ी चुनौती शायद यह होगी कि चौतरफा घिरी सरकार का बचाव अपने बजट के जरिये कैसे करें।

वित्त मंत्री को महंगाई और भ्रष्टाचार से परेशान जनता को राहत देनी होगी तो अर्थव्यवस्था को पटरी पर बनाए रखने के लिए कुछ कड़े फैसले भी लेने पड़ेंगे। रेल बजट के बाद जो कुछ हुआ उसे देखते हुए विपक्ष के साथ सहयोगियों को साधने के उपाय भी करने पड़ेंगे।

बजट का आईना मानी जाने वाली आर्थिक समीक्षा ने मंदी हटने, रोजगार बढ़ने के संकेत देते हुए बेहतर आर्थिक भविष्य की तस्वीर पेश की है। पर राजकोषीय घाटे पर अंकुश के लिए सब्सिडी घटाने और महंगाई के मोर्चे पर बेहतर प्रबंधन की जरूरत बताई है। ऐसे में माना जा रहा है कि वित्त मंत्री प्रत्यक्ष रूप से महंगाई बढ़ाने वाले उपायों की घोषणा भले न करें परोक्ष रूप से जनता की जेब पर चपत लग सकती है।

लेकिन इनकम टैक्स की छूट सीमा 1.8 लाख से बढ़ाकर कम से कम दो लाख रुपये कर मध्यम वर्ग को राहत दी जा सकती है। भ्रष्टाचार और काला धन हाल में एक बड़ा मुद्दा रहा है और बजट के जरिये सरकार इस पर लगाम कसने के संकेत दे सकती है। कर चोरी रोकने के सख्त उपाय और सरकारी भुगतान में ई-पेमेंट की व्यवस्था कुछ ऐसे ही कदम हो सकते हैं।

आर्थिक समीक्षा में भी माना गया है कि भ्रष्टाचार से फैसले लेने की प्रक्रिया और आर्थिक सुधार की गति धीमी पड़ती है। आर्थिक समीक्षा में चालू खाते के घाटे को कम करने के लिए कीमती उपभोक्ता वस्तुओं तथा सोने के आयात को हतोत्साहित करने की वकालत भी की गई है। माना जा रहा है कि बजट में इन पर आयात शुल्क बढ़ सकता है।

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