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पिंक स्लिप उड़ाए नींद तो वक्त है जागने का

अप्रैल की आहट यानी अप्रेजल की कवायद। ग्लोबल स्तर पर मंदी, स्लोडाउन, सेल्स की कमी, टारगेट मिसिंग जैसे शब्द खबरों में सुर्खियां पाने लगे हैं। अप्रेजल का यह सीजन दो तरह के बाई-प्रोडक्ट लेकर आता है। पहला, सैलरी पैकेज में बढ़ोतरी की उम्मीद का तो दूसरा, अपनी परफॉर्मेस में कमी की आशंका से पैकेज रिवाइज न होने या छंटनी के डर का। कई कर्मचारियों को पिंक स्लिप का डर सताने लगता है। पिंक स्लिप के खतरे को भांपने और सही समय पर सही कदम उठाने का तरीका बता रही हैं गीता तनेजा

अप्रेजल का खास हिस्सा बनता जा रहा है एग्जिट प्लान। इसके तहत कंपनियां अपने कमजोर कार्य प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाती हैं। हालांकि इस प्रक्रिया में पूरी तरह से पारदर्शिता बरती जाती है, कर्मचारियों को समय-समय पर फीडबैक दिया जाता है। यह फीडबैक इस बात के संकेत दे देता है कि आगे कैसा होने वाला है। अगर आपको भी इस तरह के संकेत मिल रहे हैं तो पिंक स्लिप के डर को अपने पर हावी न होने दें। ऐसे कदम हैं, जिन्हें उठाकर आप खुद को आने वाली परेशानी से बचा सकते हैं।

बातचीत करें
ज्यादातर कंपनियों का रवैया इस मामले में काफी उदार रहता है। पिंक स्लिप तो सबसे आखिरी हथियार है। इस कदम को उठाने से पहले कर्मचारी को रोटेशन, ट्रांसफर, ट्रेनिंग के जरिये अपग्रेड करने का प्रयास किया जाता है। इसमें कामयाब न होने पर पिंक स्लिप थमाई जाती है। एक प्रमुख मीडिया हाउस में सीनियर एचआर एग्जीक्यूटिव कहते हैं कि ‘एग्जिट प्लान को सबसे अंत में अमल में लाया जाता है। इससे पहले कर्मचारी को अपना स्तर सुधारने के कई मौके दिए जाते हैं। यदि आपके साथ ऐसा हो रहा है तो आप एग्जिट के लिए थोड़ा समय मांग सकते हैं, ताकि आप किसी कंसल्टेंट की मार्फत नई जॉब तलाश सकें। यदि कंपनी से मकान मिला  है तो उसे खाली करने का वक्त भी मांग सकते हैं।’

नेटवर्क की सपोर्ट हासिल करें
एग्जिट प्लान के निशाने पर आए कर्मचारी की आर्थिक हालत जैसी भी हो, पिंक स्लिप उसे मानसिक आघात जरूर देती है। कई शोध बताते हैं कि ऐसे कर्मचारी अंदर से टूट जाते हैं। कई मानसिक संतुलन खो बैठते हैं, तलाक हो जाता है या परिवार बिखर जाते हैं। परिवार को या मित्रों को दूसरे सूत्र से इसकी जानकारी मिले, इससे बेहतर होगा कि आप खुद उन्हें बताएं। गुस्सा करने, आत्म विश्वास खोने से बेहतर है अपने परिवार और नजदीकी मित्रों के नेटवर्क के जरिये नया रास्ता खोजना शुरू करें। इससे मनोवैज्ञानिक और प्रोफेशनल सपोर्ट मिलेगी।

परिवार के साथ योजना बनाएं
पिंक स्लिप की सूचना देने से परिवार को एकजुट होकर इस मुसीबत की घड़ी से मुकाबला करने में मदद मिलेगी। अपने बजट में कटौती करें। परिवार के साथ बैठ कर जरूरी और गैर जरूरी आयटम की लिस्ट तैयार करें। अपने बजट और आपात बजट की स्पष्ट रूप से सूचना पूरे परिवार को दे दी जानी चाहिए। नई जॉब ऑफर, उस फील्ड के बारे में भी परिवार से बातचीत कर ली जाए। कहीं ऐसा न हो कि नई जॉब ज्यादा ट्रैवल या ट्रांसफर की संभावना वाली हो।

खुद का मूल्यांकन जरूरी 
सबसे पहले यह पता लगाएं कि पिंक स्लिप देने का आधार क्या था- आपका अड़ियल व्यवहार, कंपनी की माली हालत, बॉस से अनबन, कर्मचारियों की खींचतान-राजनीति। इन मुद्दों पर निष्पक्ष होकर विचार करें। करियर काउंसलर जितिन चावला कहते हैं,‘कई बार काम के दौरान आदमी नई चीजों व तकनीकों को सीखने में पीछे रह जाता है। खुद को अपग्रेड न करना भी कई बार कर्मचारी के मिसफिट होने की वजह बन जाती है।’

ब्रेक के दौरान क्या करें
नई नौकरी की तलाश से पहले आप नई तकनीक सीख कर खुद को अपग्रेड कर सकते हैं। नई जॉब ऑफर लेते समय जमीनी हकीकत को पहचान कर ही सैलरी पैकेज की मांग करें। इस अवधि में प्रोफेशनल और पर्सनल दोनों मोर्चों पर काम करने की जरूरत है। प्रोफेशनली खुद को अपग्रेड करें और लिंक्डइन या ऐसी अन्य प्रोफेशनल साइट्स के सदस्य बनें, कंसलटेंट्स से सम्पर्क करें। व्यक्तिगत रूप से खुद को किसी गतिविधि में शामिल करें। सकारात्मक सोच बनाए रखें।

टारगेट सेट करें
कैसी जॉब चाहिए, इसके लिए अपने टारगेट और वरीयता सूची बनाएं। ऐसा न हो कि जो जॉब सबसे पहले मिले, उसे करने लगें और फिर नौकरी लगते ही मन नई नौकरी तलाशने को कहने लगे। लक्ष्य स्पष्ट रखें, क्या स्वीकार्य है, क्या नहीं। कौन-सा सेक्टर चलेगा, कौन-सा नहीं इत्यादि। सोशल नेटवर्क से जुड़ें, रोजाना मेल चैक करें, बिजनेस कार्ड भेजते रहें।

पहले थोड़ा होमवर्क हो जाए
नौकरी की तलाश से पहले यह देखा जाना चाहिए कि आपकी क्वालिफिकेशन किस सेक्टर के लिए उपयुक्त है। क्या उस सेक्टर की तकनीक से आप वाकिफ हैं, क्या किसी तरह के प्रशिक्षण की जरूरत है, मसलन कोई क्रैश कोर्स, बेसिक कोर्स करने की जरूरत है तो उसे ज्वाइन कर लिया जाए। जिस कंपनी में नौकरी का सीवी भेज रहे हैं या कंसलटेंट से ऑफर आया है तो उसके बारे में जानकारी जुटा लें। कुल मिलाकर जागरूक रहें कि किस सेक्टर पर लोकल और ग्लोबल बाजार, अपनी या विदेशी सरकार के नीतिगत फैसलों का नकारात्मक असर सबसे पहले पड़ता है, वहां से थोड़ा बचा जाए। बेहतर हो, अपने विकल्पों की सूची तैयार करें और उसमें से जो आपके मुताबिक लगे, उस दिशा में काम किया जाना चाहिए।

व्यावहारिक नजरिया अपनाएं 
एक नामी कंसलटेंट फर्म एस्पायर ह्यूमन कैपिटल मैनेजमेंट के सीआरओ पवन महाजन कहते हैं कि आजकल कर्मचारियों की नियमित रूप से परफॉर्मेस जांची जाती है। हर सेक्टर में टॉप परफॉर्मर की जरूरत रहती है। अगर कोई कर्मचारी कहीं मिसफिट हो रहा होता है तो उसे दूसरे डिपार्टमेंट में भेज कर मौका दिया जाता है, लेकिन बार-बार यह मौका नहीं दिया जाता। ऐसे में यदि पिंक स्लिप मिल जाती है तो अपनी क्षमता के अनुरूप जॉब खोजने की जरूरत होती है। अच्छा लगे या बुरा, आत्मविश्लेषण करना जरूरी होता है।

बेहतर हो कि नई कंपनी में मेहनत से काम किया जाए। किसी एडवाइजर की सलाह ले सकते हैं। सलाह के आधार पर रणनीति बना कर मॉक इंटरव्यू के जरिये अपनी कमियों को दूर करें। पॉजिटिव पक्ष को उभारने पर काम करें।  रिज्यूमे फॉरवर्ड करने और दनादन इंटरव्यू ङोलने से बेहतर है अपना होमवर्क ठीक तरह करने के बाद सही तरीके से लक्ष्य की ओर बढ़ा जाए।

प्रोफेशनल की तरह व्यवहार करें
आप अपनी कंपनी से अपने क्लाइंट, दूसरे कर्मचारियों और संभावित एम्पलायर्स से नौकरी के संबंध में बातचीत करने की छूट भी हासिल कर सकते हैं। इस अवधि में अपना गुस्सा छोड़ कर एक प्रोफेशनल की तरह व्यवहार करें। अपने क्लाइंट्स से खुद संपर्क करें। यदि कंपनी आपको डय़ूटी टाइम में ऐसे सम्पर्क करने की इजाजत नहीं देती तो आप अपने घर से निजी तौर पर ई-मेल इत्यादि से इन लोगों से संपर्क कर सकते हैं। लेकिन इस वक्त ध्यान रखें कि आप कंपनी के बारे में कुछ भी निगेटिव न कहें, बल्कि अपना सकारात्मक रवैया ही दर्शाएं। हो सकता है जिससे आप संपर्क कर रहे हों, वही आपका अगला एम्पलॉयर निकल आए।

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