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फिक्सिंग की फांस

अगले रविवार को ढाका में पुराने प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान और हिन्दुस्तान एशिया कप के लिए आमने-सामने होंगे। इसके पहले मोहाली में ऐतिहासिक विश्व कप के सेमीफाइनल मुकाबले में दोनों टीमों के बीच जंग हुई थी। करीब एक साल बाद फिर से दोनों टीमें आपस में टकराएंगी। बदकिस्मती से 18 मार्च के इस मुकाबले पर मैच फिक्सिंग के विवादों की छाप होगी। ताजा खुलासे के मुताबिक, क्रिकेट की दुनिया में मैच फिक्सिंग की जड़ें गहरी हैं और यह चार अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों पर लगी पाबंदी के बावजूद बदस्तूर जारी है।

इंग्लैंड के एक मशहूर अखबार का दावा है कि साल 2011 का विश्व कप सेमीफाइनल पाकिस्तान-हिन्दुस्तान मुकाबला फिक्स था। इस अखबार ने एक हिन्दुस्तानी बुकी के बयानों के आधार पर यह खबर बनाई है। वह मैच पाकिस्तान हार गया था। उसने अपने लाखों चहेतों को मायूस किया। संदेह तो तब हुआ था, जब मोहाली में रनों का पीछा करते वक्त कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ियों की हरकतें ठीक नहीं थीं। बहरहाल, फिक्सिंग के हालिया मामले में बॉलीवुड हीरोइनों की तथाकथित भूमिका भी शामिल है। अदाकारा अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को फंसाने का काम करती हैं। रिपोर्ट ने अपने दावे पर आंकड़ों की मुहर लगाई है।

उसके मुताबिक, एक अंतरराष्ट्रीय मैच को 750,000 पाउंड में फिक्स किया जा सकता है। हालांकि दिल्ली के एक सट्टेबाज की बातचीत के टेप के अलावा कोई और सुबूत नहीं थे। इसलिए इंटरनेशनल क्रिकेट कौंसिल ने इस रिपोर्ट को ‘बेबुनियाद और गलतफहमी पैदा करने वाला’ बताया है। न्यूजीलैंड क्रिकेट ने भी इस पूरी कहानी को खारिज कर दिया है। जबकि कहा यह जा रहा था कि कई ब्लैक कैप्स (न्यूजीलैंड के खिलाड़ी) मैच फिक्सिंग में शामिल थे।

वैसे, खंडनों और सफाइयों से मैच फिक्सिंग नहीं थमेगी। सट्टेबाज मैच फिक्सिंग से बाज नहीं आ रहे हैं। यह तो माना ही जा रहा है कि अगले रविवार को होनेवाले मुकाबले के लिए करोड़ों डॉलर की बाजी लगी है। यकीनन, भ्रष्टाचार रोकने के आईसीसी के तमाम बड़े नुस्खे धरे के धरे रह गए हैं। ऐसे में, इसकी भी कोई गारंटी नहीं कि यह मुकाबला भी फिक्स नहीं होगा।
द न्यूज, पाकिस्तान

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