DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

एक सराहनीय फैसला

गुजरात के उत्तरी हिस्से में एक गांव है वाडिया। यहां की युवतियों ने वेश्यावृत्ति को त्यागकर नई जिंदगी की शुरुआत का फैसला लिया है। वाकई यह स्वागत योग्य कदम है। वैसे कोई अपनी इच्छा से इस दलदल में नहीं उतरता। कुछ तो मजबूरी होती ही है। वाडिया की युवतियां भी अपना व अपने परिवार का पेट पालने के लिए इस पेशे में आई थीं। धीरे-धीरे इसने रिवाज का रूप धारण कर लिया। लेकिन अब इस तरह की कुरीतियों से यहां की युवतियों को निजात मिलेगी, क्योंकि कई स्वयंसेवी संस्थाओं ने इस प्रथा का विरोध किया है। खुद इस पेशे से जुड़ी महिलाएं भी आगे आई हैं। इलाके में सामूहिक शादी का आयोजन करवाया गया, जिसमें सात जोड़ों की हाल ही में शादी हुई। गांव में खुशी का माहौल है। आइए हम भी उन्हें बधाई दें।
तापस कुमार
tapas.dumka.co.in@gmail.com

संसद सत्र और मुद्दे
संसद के बजट सत्र की शुरुआत हो चुकी है। रेल मंत्री ने किराया क्या बढ़ाया, उनकी कुरसी ही हिलने लगी है। साफ तौर पर इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का काम विपक्ष करेगा। परंतु विपक्ष को भ्रष्टाचार और काला धन जैसे मुद्दों को भी नहीं भूलना चाहिए। वर्ष 2011 में ये दोनों मुद्दे साल भर संसद के अंदर और बाहर छाए रहे। इसमें कोई दोराय नहीं कि भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह चाट रहा है। पिछले साल अन्ना हजारे और बाबा रामदेव ने इसके खिलाफ मोर्चा खोला था, लेकिन वक्त के साथ-साथ इनके आंदोलन भी बेअसर साबित हो गए। अब तो इन मसलों पर खुद सरकार को ही सुध लेनी होगी। सरकार के सामने एक और मुद्दा महंगाई का है। पिछले चार-पांच वर्षो से महंगाई अपने चरम पर है। अगर विदेशों में जमा काला धन वापस आ जाए, तो महंगाई के साथ-साथ देश की आर्थिक स्थिति भी पटरी पर आ जाएगी।
मनीष कुमार, नेहरू प्लेस, नई दिल्ली
manishroy606@gmail.com

सवाल बेरोजगारी भत्ते का
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को जीत बेरोजगार युवाओं ने ही दिलाई। दरअसल, पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में बेरोजगारी भत्ते को शामिल किया था। इस उम्मीद में लाखों बेरोजगारों ने सपा को वोट दिया। अब 18 से 45 साल के बेरोजगार कतारों में खड़े होकर अपना पंजीकरण करा रहे हैं। देखना यह होगा कि सपा इनकी उम्मीदों को कब पूरा करती है? सरकार के सामने पूंजी की कमी एक बड़ी समस्या होगी। यह ध्यान देने वाली बात है कि जब प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को वेतन देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं, तो फिर लैपटॉप और बेरोजगारी भत्ता के लिए पैसे कहां से आएंगे।
जितेंद्र कुमार जौली, हिंदू कॉलेज, मुरादाबाद
jkjolly@yahoo.co.in

शिक्षा प्रणाली में हो सुधार
भारत में शिक्षा का लगातार प्रचार-प्रसार हो रहा है, परंतु इससे यह साफ नहीं होता कि देश के अधिकतर शिक्षण संस्थानों की स्थिति कैसी है? यदि हम भारत के शिक्षण संस्थानों पर नजर डालें, तो बहुत कम ऐसे शिक्षण संस्थान हैं, जहां शिक्षार्थियों को सही तरीके से शिक्षा प्रदान की जा रही है। अधिकतर विद्यालय ऐसे हैं, जहां छात्र-छात्राओं का ज्यादातर समय खेल-कूद में गुजरता है। ऐसे संस्थानों की भी कमी नहीं, जहां विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों के पास वक्त नहीं है, क्योंकि इनका अधिकतर समय सरकारी फाइलों को निपटाने में जाता है। नतीजतन, सरकारी विद्यालयों में छात्रों की तादाद घटती जा रही है। अत: केंद्र सरकार को चाहिए कि वह शिक्षा प्रणाली में सुधार करने की कारगर योजना बनाए।
मु. सारिम अशरफी, मंडी, संभल (भीम नगर)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:एक सराहनीय फैसला