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चारा विकास कार्यक्रम में छह योजनाएं: मंत्री

बिहार के पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री गिरीराज सिंह ने गुरुवार को कहा कि चारा विकास कार्यक्रम में तेजी लाने के लिए छह योजनाएं चलायी जा रही हैं।

बिहार विधान परिषद में राजद के नवल किशोर यादव सहित तीन अन्य सदस्यों द्वारा लाए गए एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सरकार की ओर से सिंह ने कहा कि चारा विकास कार्यक्रम को तीव्रता प्रदान करने के लिए छह योजनाएं चलायी जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रास लैंड डेवलपमेंट योजना के माध्यम से अभी तत्काल राज्य के विभागीय प्रक्षेत्रों में विकास की योजना चलाई जा रही है और इसकी सफलता के बाद राज्य के प्रत्येक पंचायत को इससे अच्छादित किया जायेगा। सिंह ने कहा कि इस योजना में यह लक्ष्य वृक्षारोपण के साथ-साथ वृक्षों के बीच खाली जगहों में स्थानीय चारा लगाने की योजना है।

उन्होंने कहा कि चारा बीज क्रय एवं वितरण योजना के माध्यम से चारा बीज का उत्पादन सभी राज्य स्तरीय प्रक्षेत्रों में करने की योजना है और कालांतर में लाभुक पशुपालकों तक बीज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित है। पशुपालकों द्वारा जो बीज उत्पादित होगा उसके क्रय करने का भी प्रस्ताव है। सिंह ने कहा कि त्वरित बीज विकास योजना के तहत राज्य में चारा विकास की योजना को तीव्रता प्रदान की जाएगी। यह योजना इस वर्ष प्रस्तावित है।

उन्होंने कहा कि चार बीज मिनी कीट वितरण योजना के तहत इस वर्ष खरीफ मौसम में 45650 एवं रब्बी मौसम में 57500 विभिन्न चारा बीजों का मिनी कीट का वितरण किया गया है। सिंह ने कहा कि फॉडर बैंक स्थापना की योजना की शुरुआत फॉडर ब्लॉक निर्माण के लिए की गयी है और यह योजना 10 केन्द्रों द्वारा संचालित होगी।

उन्होंने कहा कि इन योजनाओं से पशुपालकों की चारा की समस्याओं का पूर्णत: निदान संभव नहीं है क्योंकि राज्य में सूखा चारा, हरा चारा एवं दाना में क्रमश: 39 प्रतिशत, 48 प्रतिशत एवं 73 प्रतिशत की कमी है। सिंह ने कहा कि राज्य में 2.05 करोड़, व्यस्क पशुधन इकाई है जिसके लिए 29.93 मिलियन मीट्रिक टन सूखा चारा 48.64 मिलियन मीट्रिक टन हरा चारा एवं 7.48 मिलियन मीट्रिक टन दाना की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि पशु चारा की कमी के बावजूद राज्य सरकार पशुधन कार्यक्रम को संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ा रही है जिसका प्रतिफल है कि राज्य में दूग्ध उत्पादन, अंडा उत्पादन एवं मांस उत्पादन में उतरोत्तर वृद्धि हो रही है। दुग्ध उत्पादन 65 लाख टन हो गया है जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 11.16 प्रतिशत है। सिंह ने कहा कि राज्य में लगभग 94 लाख हेक्टेयर भूमि में से 56 लाख हेक्टेयर कषि योग्य भूमि एवं 38 लाख हेक्टेयर वैसी भूमि है जिसका उपयोग चारा उत्पादन कार्यक्रम में किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पशु चारा के संरक्षण उपलब्धता भंडारण परिवहन तथा बाजारी व्यवस्था को सुसंगठित करने के लिए चारा विकास प्राधिकरण का प्रस्ताव भी विचाराधीन है जिसमें इस विभाग के साथ साथ कृषि पर्यावरण एवं वन विभाग तथा अन्य स्वयंसेवी संस्थाओं की भी सहभागिता ली जाएगी।

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