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पैसे पर रखें अपनी नजर

जब आप दोनों पति-पत्नी साथ जीवन बिता रहे हैं, तो भला कितना पैसा कहां निवेश हुआ है इसकी जानकारी सिर्फ पति को ही क्यों रहे? पैसे के निवेश से जुड़े मामलों में अभी से दिलचस्पी लेना शुरू कर दें ताकि बाद में पछताना न पड़े। बता रही हैं सुमन बाजपेयी

मंदिरा के पति की अचानक हुई मौत ने उसकी जिंदगी को पूरी तरह से बदलकर रख दिया। भावनात्मक रूप से तो वह टूटी ही, साथ ही आर्थिक रूप से भी उसे काफी परेशानी उठानी पड़ी। उसे पति के निवेशों व बचत के बारे में कुछ भी जानकारी नहींथी। असल में वह पति पर इतनी निर्भर थी कि इससे पहले उसने पैसों से जुड़े मामलों की कोई सुध ही नहीं ली। यहां तक कि वह म्यूचुअल फंड्स, इंश्योरेंस प्लान, टैक्स सेविंग आदि जैसे शब्दों तक से परिचित नहीं थी।

मंदिरा जैसी स्थिति से बचने के लिए जरूरी है कि पत्नी, पति की सेविंग्स की तो जानकारी रखे ही, साथ ही उसके साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट, फायनेंशियल प्लानर, इंवेस्टमेंट एडवाइजर जिनके पास भी पति जाते हों, अवश्य साथ जाए, ताकि उसे पता हो कि कहां कितना पैसा निवेश किया गया है या लोन आदि लिए गए हैं। वैसे भी युगल को साथ मिलकर तय करना चाहिए कि कहां सेविंग की जानी चाहिए और अगर ऐसा न हो तो कम से कम पति के फायनेंशियल पोर्टफोलियो के बारे में पत्नी को पूरी जानकारी होनी चाहिए।

इंवेस्टमेंट स्ट्रैटजी से अवगत कराएं
वित्तीय सलाहकार कपिला मोंगा के अनुसार, आज के दौर में हर महिला को अपने वित्तीय फैसले खुद लेने चाहिए। कहां कितना पैसा लगाना है और कहां कितना बचाना है, इसका हिसाब उन्हें खुद रखना चाहिए। पर अगर वे ऐसा नहीं करती हैं, तो उन्हें पूरी फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में पति से जान लेना चाहिए। पति से यह जान लें कि उनके इंवेस्टमेंट अकाउंट्स कहां हैं। हो सकता है विभिन्न कंपनियों में उनके अनेक इंवेस्टमेंट अकाउंट्स हों। अपनी पत्नी को बताएं कि आपने अपने अकाउंट्स के बारे में महत्वपूर्ण सूचना व डाक्यूमेंट्स कहां रखे हैं। साथ ही अगर प्रॉपर्टी आदि में निवेश किया है तो उसके सारे कानूनी पक्ष के बारे में भी जानकारी दें।  पति को चाहिए कि वह अपनी पत्नी को अपनी इंवेस्टमेंट स्ट्रैटजी से जरूर अवगत कराएं तथा यह भी बताएं कि वह इस मामले में किस पर भरोसा कर सकती है या सलाह ले सकती है। साथ ही पत्नी को इंवेस्टमेंट इंस्ट्रुूमेंट जैसे किस स्कीम में किसे नामांकित किया गया है, यह विस्तार से बताएं तथा सारे कागजों के बारे में सिलसिलेवार समझाएं।

फाइल बनाएं
अगर आपके पति ने फाइल बना रखी है, जिसमें वह फाइनेंस संबंधी सारे कागजात रखते हैं तो उसके बारे में आपको पता होना चाहिए। साथ ही इसमें होने वाले अपडेट्स की भी जानकारी रखें। अगर पति ने फाइल नहीं बनाई हुई है तो आप तुरंत यह काम अपने हाथ में ले लें और उसमें तमाम पेपर्स रखें, जैसे इंश्योरेंस पॉलिसी, डीमैट अकाउंट स्टेटमेंट, हाउस प्रोपर्टी पेपर्स, प्रोविडेंट फंड, हेल्थ कवर्स, नेशनल सेविंग सर्टििफकेट्स, म्यूचुअल फंड, शेयर व इक्विटी,फिक्स्ड डिपोजिट आदि।

रिटायरमेंट प्लानिंग
रिटायर होने के बाद जीवन सुगमता से चल सके, इसके लिए सभी युगल प्लानिंग करते हैं। इसके बारे में पति का पत्नी को सभी जानकारी देना निहायत आवश्यक है। 30 से 40 वर्ष की उम्र के बीच ही इस बारे में लोग सोचना आरंभ कर देते हैं और उसी समय उन्हें अपने साथी को इसकी पूरी जानकारी दे देनी चाहिए। चूंकि यह लॉन्ग टर्म प्लानिंग होती है, इसलिए समय-समय पर इसके बारे में पत्नी को अपडेट करते रहना चाहिए।

आपके लिए विकल्प
म्यूचुअल फंड- आपके लिए म्यूचुअल फंड्स (एमएफ) में पैसा निवेश करना एक बेहतरीन विकल्प है। जब आप म्यूचुअल फंड में पैसा लगाएं तो सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) को चुनें, जिससे आपका पैसा लगातार बढ़ता रहेगा। फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की तरह आम म्यूचुअल  फंड्स में भी आपका पैसा सुरक्षित रहता है और वे टैक्स-सेविंग विकल्प की तरह भी काम आते हैं।

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट्स (एनएससी)- पोस्ट ऑफिस में उपलब्ध यह स्कीम महिलाओं के लिए बेहद लाभकारी है। 6 वर्ष की अवधि के लिए जारी किए जाने वाले ये सर्टिफिकेट 100 रुपए से लेकर 500, 1000, 5000 व 10,000 रुपए तक के होते हैं। आप जितने भी पैसे चाहें, इस स्कीम में निवेश कर सकती हैं।

पोस्ट ऑफिस रेकरिंग डिपॉजिट स्कीम- यह योजना कामकाजी महिलाओं के लिए इसलिए उपयुक्त रहती है कि इससे वे हर महीने कुछ निश्चित पैसा बचा सकती हैं, जो एकमुश्त 5 वर्षों बाद मिलता है।

पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम - यह स्कीम ऐसी महिलाओं के लिए बहुत उपयुक्त रहती है, जिनके लिए अपने दायित्वों के चलते अपनी कमाई से हर महीने अपने लिए कुछ बचा पाना कठिन होता है। इसमें आप 6 वर्ष के लिए अधिकतम साढ़े चार लाख रुपए जमा करा सकती हैं।

फिक्स्ड डिपॉजिट- एफडी एक ऐसा विकल्प है, जिसे अधिक से अधिक महिलाएं कराना पसंद करती हैं।
बहुत सारे बैंक एफडी पर अलग-अलग अवधि व ब्याज दर के हिसाब से कई योजनाएं निकालते रहते हैं।

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