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बातें बड़ी-बड़ी मगर अमल करने के लिए रकम कम

रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी ने किराये में बढ़ोतरी कर एक अच्छी शुरुआत की है। इसके लिए उनकी सराहना की जानी चाहिए। यह अलग बात है कि खुद उनकी पार्टी किराये में इजाफे का विरोध कर रही है। रेल मंत्री ने बजट में यात्रियों की सुरक्षा, संरक्षा और सुविधाओं पर ज्यादा ध्यान दिया है। हालांकि वह इन सभी योजनाओं को लागू कर पाएंगे, इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगा।

पहले भी रेल मंत्रियों ने बजट भाषणों में सुरक्षा और यात्री सुविधाओं की बात की है। पिछले बजट में यात्री सुविधाओं के लिए सात सौ करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। बावजूद इसके कितना बदलाव हुआ यह हम सबके के सामने है। हर रेल बजट में जितनी घोषणाएं की जाती हैं यदि उन सभी पर ईमानदारी से अमल हो तो तस्वीर ही बदल जाएगी। मगर ऐसा होता नहीं है। इस बार भी बड़ी-बड़ी घोषणाओं के साथ यात्राियों को बेहतर सुविधाओं का ख्वाब दिखाया गया लेकिन इन सब के लिए सिर्फ एक हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इन सभी घोषणाओं के मुकाबले यह रकम बहुत कम है।

एक अप्रैल से 12वीं पंचवर्षीय योजना शुरू हो रही है। नई पंचवर्षीय योजना का यह पहला वर्ष है। रेलमंत्री सुधार के एजेंडे पर आगे बढ़े हैं। बजट भाषण में रेलवे के आधुनिकरण को लेकर बड़ी-बड़ी बातें की हैं। हालांकि इसका जवाब नहीं मिल पा रहा है कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा। सैम पित्रोदा और अनिल काकोदकर समितियों की सिफारिशों पर अमल करते हुए उन्होंने रेलवे बोर्ड में दो बोर्ड सदस्य संरक्षा और अनुसंधान बनाने की भी घोषणा की है।

ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने की बहुत जरूरत है। बजट में उन्होंने 8 से 9 प्रतिशत विकास की बात की है। हकीकत में यह विकास सिर्फ पांच फीसदी है।

विजन-2020 में एक हजार से ढ़ाई हजार तक नई रेलवे लाइन बनाने का लक्ष्य रखा गया है। पिछले साल 725 किमी नई रेलवे लाइन बिछाई गई हैं। इस साल सिर्फ 700 किमी का लक्ष्य रखा गया है। इन लाइनों से रेलवे की क्षमता में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी, क्योंकि ज्यादातर लाइनें राजनीतिक मांग पर बन रही हैं। रेलवे बजट को संपूर्ण तौर पर देखा जाए तो इसे एक अच्छा बजट कहा जा सकता है।

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