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बिहार सीमा पर चार साल में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पूरा

बिहार की सीमा पर चार साल में ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर होगा। नेपाल सीमा पर बनने वाली 557 किमी की सड़क पर काम जल्द शुरू किया जाएगा और इसे 2016 तक हर हाल में पूरा कर लिया जाएगा। यही नहीं, 31 जिला मुख्यालयों में बाइपास रोड बन जाने के बाद जाम से मुक्ति मिलेगी। यह जानकारी विधान परिषद में बुधवार को पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने अपने विभाग के बजट पर चर्चा का उत्तर देते हुए दी। उन्होंने बताया कि नेपाल सीमा पर बनने वाली सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण और पुल-पुलियों के लिए 1472 करोड़ रुपए राज्य सरकार को खर्च करने होंगे। राज्य में सड़क के माध्यम से बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है।

श्री यादव ने बताया कि पटना के विस्तार को देखते हुए बख्तियारपुर-मसौढ़ी-बिहटा-छपरा-बिदुपुर सड़क बनाई जाएगी। यह आउटर रिंग रोड का काम करेगी। 24 जिले फोरलेन सड़कों से जुड़ेंगे। दूसरे जिलों को भी स्टेट हाइवे के माध्यम से फोर लेन से कनेक्ट किया जाएगा। मोकामा में रोड म्यूजियम बनेगा। कोइलवर पुल के समानांतर उत्तर में एक फोर लेन की सड़क का टेंडर हो चुका है।
 
उन्होंने बताया कि बख्तियारपुर-ताजपुर फोर लेन पुल और आरा-मोहनिया रोड में सरकार का मात्र 18 और 12 प्रतिशत पैसा ही खर्च होगा। शेष पैसा निजी कंपनियां लगाएंगी। राजाैली-बख्तियारपुर सड़क में तो एक पैसा सरकार का नहीं लगने वाला है। इसी के साथ 2234 करोड़ रुपये से पटना में बनने वाले गंगा पथ पर भी 500 करोड़ से अधिक सरकारी पैसा खर्च होने का अनुमान नहीं है। मंत्री ने कहा कि 15 प्रतिशत बिल पर टेंडर डालने की प्रक्रिया पर रोक लगाने के लिए पत्र लिखा गया है।

गुणवत्ता की अनदेखी के कारण 90 कंपनियां डिबार की गई हैं, जबकि 36 ब्लैकलिस्टेड हुईं। 487 अधिकारियों पर कार्रवाई हुई है। स्थिति यह है कि दूसरे राज्य के अधिकारी बिहार की सड़कें देखने आ रहे हैं। मंत्री ने कहा कि बिहार सौ साल का हो गया। इस अवधि में बड़ी नदियों पर मात्र 21 सड़क पुल थे। जबकि, केवल छह साल में वर्तमान राज्य सरकार ने 16 पुल बनवा दिए और 17 पर काम चल रहा है और 12 नए पुल प्रस्तावित हैं।

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