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हाईकोर्ट का बिजली विभाग को झटका

नदियों किनारे निश्चित दायरे में निर्माण पर लगी रोक की पहली गाज बिजली विभाग पर गिरी है। यमुना तट पर करेलीबाग में प्रस्तावित 132 केवी का नया उपकेंद्र अब नहीं बन पाएगा। इससे करेली सहित पुराने शहर की बिजली व्यवस्था सुधारने को एक झटका लगा है।


सबस्टेशन बनाने के लिए करेलाबाग में लगभग साढ़े तीन एकड़ जमीन बिजली विभाग को दी गई थी। बिजली विभाग ने जमीन हस्तांतरण की कार्यवाही भी शुरू कर दी। इसी बीच नदियों के 500 मीटर दायरे में कोई निर्माण करने का आदेश आ गया। करेलाबाग में जिस स्थान पर सबस्टेशन प्रस्तावित था वहां कुछ मीटर की दूरी पर यमुना बहती हैं। कोर्ट का आदेश आते ही बिजली विभाग ने कुछ दिन इंतजार के बाद यमुना तट पर सबस्टेशन बनाने की योजना को विराम दे दिया।

यह जमीन नगर निगम की थी। चार साल पहले नगर निगम ने जमीन के लिए 18 करोड़ रुपये मांगे थे। बिजली  इतनी बड़ी कीमत देने को तैयार नहीं था। नगर निगम के अड़ियल रुख पर बिजली विभाग ने प्रशासन की मदद मांगी थी। पॉवर कॉरपोरेशन के चेयरमैन नवनीत सहगल के हस्तक्षेप पर सबस्टेशन के लिए नगर निगम मुफ्त में जमीन देने को तैयार हुआ। करेलाबाग में योजना बंद होने के बाद अब करेली के गौसनगर में जमीन की तलाश हो रही है।


करेलाबाग के आसपास जमीन देने के लिए बिजली विभाग ने प्रशासन से पुन: गुहार लगाई थी। प्रशासन ने गौसनगर में सबस्टेशन के लिए एक जमीन देखी है। सबस्टेशन के लिए जमीन पर बुधवार को बिजली विभाग के अफसरों ने मंडलायुक्त मुकेश मेश्रम से मीटिंग की। बिजली विभाग (पारेषण) के अधिशासी अभियंता रमणजी श्रीवास्तव ने बताया कि गौसनगर की जमीन ट्रांसफर होते ही सबस्टेशन का निर्माण शुरू कर देंगे।

महत्वपूर्ण बिंदु


कुम्भ के पहले बनना था 132 केवी का सबस्टेशन
करेली, कल्याणी, कसारी-मसारी, पॉवरहाउस, खुसरोबाग को सप्लाई देने की थी योजना
पुराने शहर को दो छोर से बिजली मिलने लगती
प्रस्तावित सबस्टेशन को रीवां रोड से मिलती बिजली

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