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पूरा साल बीत जाएगा काम कराने में: जीएम

दिल्ली और मुम्बई के लिए भले ही कोई नई ट्रेन नहीं मिली लेकिन इतना कुछ मिल गया है कि पूरा साल काम कराने में ही बीत जाएगा। सर्वाधिक खुशी तो इस बात की है शांति के दूत बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु और महराजगंज को रेलसेवा से जोड़ने का सपना साकार होगा। रेल मंत्रलय के बाद अब बस योजना आयोग की वित्तीय स्वीकृति का इंतजार है। इन दोनों जगहों को रेल नक्शे पर स्थापित करने के लिए दशकों से मांग की जा रही थी।
 
यह बातें जीएम एनईआर केबीएल मित्तल ने बुधवार को रेल बजट के बाद शाम को प्रेसवार्ता के दौरान कहीं। उन्होंने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार ट्रेनें भी ज्यादा मिली हैं। 2011-12 के रेलबजट में एनईआर को छह ट्रेनें मिली थी जिसमें से दो गोरखपुर से चल रही हैं। इस बार 10 ट्रेनें मिली हैं। इनमें से एक अहमदाबाद-गोरखपुर एक्सप्रेस (साप्तहिक) वाया पालनपुर, जयपुर, मथुरा, फरुखाबाद, कानपुर और दूसरी गोरखपुर-सीवान पैसेंजर (प्रतिदिन) वाया कप्तानगंज, थावे चलेगी। शेष एनईआर के विभिन्न स्टेशनों से होते हुए गुजरेंगी।

जीएम ने बताया कि तीन जगहों पर 30 किलोमीटर नई रेलवे लाइन बिछाने, 32 किलोमीटर ट्रैक का दोहरीकरण, 68 किलोमीटर ट्रैक की पैच डबलिंग, 320 किलोमीटर का गेज परिवर्तन और चार रूटों के दोहरीकरण का सर्वे कराने की जिम्मेदारी मिलनी अपने आपमें बहुत बड़ी बात है। इसके अलावा एनईआर को इस बार पांच और नए स्टेशनों को आदर्श स्टेशन बनाने की सौगात मिली है।

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