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गया और मोतिहारी के बीच फंसा केंद्रीय विश्वविद्यालय

बिहार में केंद्रीय विश्वविद्यालय को लेकर पिछले तीन वर्षों से राजनीति हो रही है, जिस कारण अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि आखिर यह विश्वविद्यालय कहां खुलेगा। वर्तमान समय में विश्वविद्यालय को लेकर बयानबाजी और तेज हो गई है।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस विश्वविद्यालय को जहां मोतिहारी में खुलवाना चाहते हैं, वहीं केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल इसे गया में खोलना चाहते हैं, जबकि इस मुद्दे पर बिहार की कांग्रेस भी मुख्यमंत्री के साथ खड़ी नजर आ रही है।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 में बिहार में केंद्रीय विश्वविद्यालय खोलने की घोषणा की थी। इसके बाद राज्य सरकार ने पटना में बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा के परिसर में अस्थायी तौर पर जमीन उपलब्ध करा दी थी। उसके बाद से अब तक केंद्र और राज्य सरकार के विवाद के बीच इस विश्वविद्यालय को स्थायी रूप से कहां खोला जाए, यह तय नहीं हो सका है।

राज्य के मुख्यमंत्री का कहना है कि मोतिहारी महात्मा गांधी की कर्मभूमि रही है, इसलिए वहीं पर केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आखिर इस मसले को लेकर सिब्बल जिद पर क्यों अड़े हैं? मुख्यमंत्री का तर्क है कि मोतिहारी के लिए सड़क और रेलमार्ग दोनों से आवागमन की सुविधा है। केंद्र सरकार ने मोतिहारी में विश्वविद्यालय की स्थापना नहीं करने का फैसला लेकर बिहार की जनता की भावनाओं का अनादर किया है।

नीतीश ने कहा कि बिहार के लोग स्थान को लेकर आपस में नहीं लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि एक मार्च को बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों ने सर्वसम्मत से प्रस्ताव पारित कर केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी में खोलने की मांग की है। बिहार सरकार मोतिहारी में मुफ्त जमीन देने को तैयार है।

उधर, सिब्बल ने मुख्यमंत्री को एक पत्र भेजकर कहा है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय गया में ही खुलेगा। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि शिक्षा के क्षेत्र में राजनीति नहीं होनी चाहिए। पिछले दो वर्षों से केंद्र सरकार विश्वविद्यालय के लिए जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध कर रही है लेकिन राज्य सरकार मोतिहारी के अलावा कहीं भी जमीन उपलब्ध कराने को तैयार नहीं है।

सिब्बल का तर्क है कि गया की वैश्विक पहचान है, यह सांस्कृतिक और ऐतिहासिक शहर है, अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से नजदीक है तथा रेल और सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा है। इस कारण यहां शिक्षक और छात्र आसानी से आ-जा सकेंगे, शहरी आबादी भी नजदीक है।

केंद्रीय विश्वविद्यालय के मुद्दे पर कांग्रेस भी दो भागों में विभाजित नजर आने लगी है। भले ही केंद्र की कांग्रेस गया के लिए जिद पर अड़ी हो, लेकिन बिहार कांग्रेस इससे इत्तेफाक नहीं रखती।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सदानंद सिंह कहते हैं कि विश्वविद्यालय को लेकर जो भी बातें हो रही हैं, वह ठीक नहीं है। मोतिहारी गांधी की कर्मभूमि रही है। अगर सिब्बल गया के लिए अड़े रहे तो बिहार के साथ न्याय नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी में खोलने के लिए विधानसभा से पारित प्रस्ताव जब केंद्र सरकार को भेजा गया है तो फिर स्थान को लेकर कोई विवाद नहीं होना चाहिए।

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