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सरोगेसी से मां बनूं या बच्चा गोद लूं?

जब भी कोई महिला खुद को मां बनने में अक्षम पाती है तो उसके सामने दो ही रास्ते होते हैं। या तो वह सरोगेसी का सहारा ले या बच्चा गोद ले। दोनों में से एक का चयन करना भी मुश्किल होता है। आइए जानें कि इस बाबत क्या है मनोवैज्ञानिक की सलाह:

मैं 35 वर्ष की हूं और पति 39 वर्ष के। विवाह को 12 साल हो गए हैं, लेकिन कोई संतान नहीं है। सरोगेसी या एडॉप्शन ही केवल संभव है। पति तथा उनका परिवार सरोगेसी चाहते हैं, ताकि वंश का ही नाम रहे। मैं एडॉप्शन के पक्ष में हूं। इस बहस को लेकर बहुत तनाव है।
अन्नु, दिल्ली

आपके पास दो विकल्प हैं और दोनों सूरत में आप उस बच्चे की बायोलॉजिकल मां नहीं होंगी, लेकिन मां होंगी। वह मां जो अपने पूरे प्यार और निष्ठा से उस बच्चे को चाहती है और पालेगी। सरोगेसी से अगर पति और परिवार खुश है तो आपको मान लेना चाहिए। मन में यह विचार न लाएं कि इसमें आपका कुछ नहीं है। जन्म देने वाले से पालने वाले का प्यार और अधिकार ज्यादा होता है। एडॉप्शन में एक फायदा यह है कि एक बच्चे को घर मिल जाएगा। सोच-समझकर फैसला लें, क्योंकि जरा-सी भी कुंठा आने वाले बच्चे से आपके रिश्ते को प्रभावित करेगी।

मेरी बेटी 16 साल की है और 11वीं कक्षा की छात्र है। उसे खाने-पीने का बहुत शौक है, इसलिए उसका वजन सामान्य से ज्यादा है। एक्टिव तो है, पर एक्सरसाइज नहीं करती। लंबाई भी कम है, जिससे वह ज्यादा मोटी लगती है। उसके इस आकार को देख लोग कमेंट करते हैं। बहुत कहने पर भी वह नहीं समझती।
अलका, दिल्ली

आपकी चिंता ठीक है, पर यही खाने-पीने और बेफिक्र रहने के दिन हैं। हर जगह वजन और खूबसूरती को लेकर इतनी चर्चा है कि महिलाएं इससे बुरी तरह से प्रभावित हो रही हैं। संतुलित खानपान और व्यायाम शरीर के लिए आवश्यक हैं। आपको हर समय उसे टोकने की आवश्यकता नहीं। उसे प्यार से समझाएं, हो सके तो फिटनेस एक्सपर्ट के पास ले जाएं जो उसे सही जानकारी दे। आपको लगता है कि उसे कोई फर्क नहीं पड़ता, पर ऐसा नहीं है। जरूर उसे स्कूल में, दोस्तों में सभी से अपने मोटे होने का एहसास होता होगा। आपकी और परिवार की यह जिम्मेदारी बनती है कि उसे सपोर्ट करें और धीरे-धीरे उसका वजन कम करने में मदद करें।

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  • Web Title:सरोगेसी से मां बनूं या बच्चा गोद लूं?