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अगेती गेहूं की खेती अब पिछड़ने लगी

मथुरा। हिन्दुस्तान संवाद। होली के समय तक गेहूं की बालियां खेतों में दानों के बोझ से झुकने लग जाती थीं। एक सप्ताह के अन्दर फसल पर किसानों की दरांती चलने लग जाती थी। लेकिन इस साल किसान फसल के पकने के इंतजार में चिन्तित बैठे हैं। गेहूं की बाली अभी हरी बनी हुई है। सरसों की कम पैदावार के मारे किसान अब गेहूं की फसल को लेकर भी चिन्तित दिखाई देने लगे हैं।

फाल्गुन निकलने को है। गेहूं के खेत किसान की धड़कन बढ़ा रहे हैं। फसल में बालियां हरी बनी हुई हैं। किसान निवौरी लाल ने बताया कि अभी फसल को पकने में एक माह का समय लग सकता है। गेहूं की बालियां बिल्कुल नम हैं। सामान्य रूप से गेहूं की फसल में चार सिंचाई की जाती हैं। इस समय तक फसल पककर तैयार हो जाती है।

इस बार गेहूं को पकने में समय लगेगा। किसान मनिया ने बताया कि गेहूं की फसल में अभीतक छह बार सिंचाई की गई है। ऐसा ही रहा तो एक बार और सिंचाई करनी पड़ सकती है। बीसा बीघा खेत में गेहूं बोए सनौरा के किसान भगवान सिंह का कहना है कि कुछ समय पहले बारिश के कारण यह स्थिति आ गई है।

किसानों का कहना है कि समय से फसल पक नहीं रही है। निश्चितरूप से खेतों में उत्पादन भी कम निकलेगा। चौमुहां के गोकुल ने बताया कि गेहूं की बाली को पकने में अभी देर है। अन्यथा तो किसान खेत से सरसों की पैदावार उठा भी नहीं पाता था कि गेंहू की बालियां काटनी पड़ती थीं।

इधर कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम की बेरूखी के कारण फसल के पकने में देरी हो रही है। फसल के पकने के समय 24-25 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है, लेकिन ग्लोबल वार्मिग के कारण यह सब परिवर्तन देखने को मिल रहा है।

यह होता है एक बीघा में उत्पादनएक बीघा खेत में हाइब्रिड बीज की पैदावार अब कई सालों में बढ़ी है। एक बीघा में गेंहु का उत्पादन 30 से 35 मन तक हुआ है, लेकिन इस बार किसानों को इतना होने की उम्मीद नहीं है। सरसों की भी रही कम पैदावारइस बार सरसों का भी प्रति एकड़ उत्पादन कम रहा है। एक बीघा में दस मन से बारह मन तक पैदावार हुई है। जबकि बीते साल पन्द्रह मन से बीस मन तक सरसों उत्पादित हुई।

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