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अब भोजपुरी भाषा में भी मिलेगी योजनाओं की जानकारी

आरा। प्रशांत कुमार। तनी सुन लीं, तनी सुन लीं, अब समझे खातिर नइखे लगावे के दिमाग। रखब ध्यान त खुल जाई किस्मत के ताला। कुछ ऐसे ही अंदाज में गंवई लोगों को दी जायेगी योजनाओं की जानकारी। जी हां! केन्द्र सरकार की योजनाओं के बारे में अब लोगों को भोजपुरी भाषा में भी जानकारी दी जायेगी।

केरल के बाद बिहार पहला राज्य होगा जहां किसी लोक भाषा में योजनाओं की जानकारी दी जायेगी। संयुक्त देयता समूह के प्रति आकर्षित करने के लिए नाबार्ड और अग्रणी बैंक के संयुक्त प्रयास (एलडीएम) से इस अनोखी पहल की शुरुआत 1 अप्रैल से होने वाली है। इस योजना के तहत प्रत्येक गांव का किसी एक काम के लिए चयन होगा।

जो लोग जिस क्षेत्र में लगे होंगे उन्हें उस काम में दक्ष बनाने के लिए भोजपुरी में ट्रेनिंग दी जायेगी। ट्रेनिंग के बाद मार्केटिंग की भी सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। संयुक्त देयता समूह के पहले फेज में जिले के महादलित समुदाय के लोगों को लाभ दिलाने का टारगेट बनाया गया है। गांव में राज मिस्त्री, बढ़ई, मुर्गी पालन सहित अन्य कामों के लिए पहले ट्रेनिंग दी जाएगी। गांव में ही ट्रेनिंग की व्यवस्था होगी।

अग्रणी बैंक प्रबंधक बी.पी सिंह गुप्ता का कहना है कि जिले में 197 गांव हैं। वित्तीय वर्ष 2012-2013 में इस योजना के लिए सौ गांवों का चयन किया जाएगा। चयन वहां की एक्टिविटी के हिसाब से किया जाएगा। अगर किसी गांव में बकरी पालन हो रहा हो तो वहां उसी को प्रोत्साहित किया जाएगा।

बैंक की नजरों में बकरी पालन से पैसे की लिक्वडिटी आसानी से होती है। बकरी पालन की मार्केटिंग भी आसानी से होती है। वित्तीय वर्ष 12-13 की प्रथम तिमाही में जहां गांवों को चिह्न्ति किया जाएगा वहीं दूसरी और तीसरी तिमाही में काम की शुरुआत कर दी जाएगी।

योजना के दूसरे फेज में महादलिज टोले को सामाजिक जिम्मेदारी के तहत बैंक की शाखाओं से जोड़ा जाएगा। महादलित टोलों में बैंक की शाखाओं द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य, सफाई और पीने के पानी के बारे में जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा। शुरुआत में जागरूकता कार्यक्रम कुछ चिह्न्ति गांवों में ही चलाया जाएगा।

संयुक्त देयता समूह में चार लोगों का ग्रुप बनाया जाएगा। सभी एक दूसरे के ग्रांटर तब तक बने रहेंगे जब तक कि लोन अदा नहीं किया जाता । ग्रुप के काम के अनुसार ही लोन का प्रावाधान किया जाएगा। क्या है संयुक्त देयता समूहसंयुक्त देयता समूह चार लोगों का एक समूह होगा।

इस समूह में एक ही परिवार के लोग शामिल हो सकते हैं। लोन के लिए चारों लोग एक दूसरे के ग्रांटर बनते हैं। इससे लोन में स्थिरिता बरकरार रहती है। चारों लोग तब तक ग्रांटर बने रहेंगे, जब तक लोन अदा नहीं हो जाए। यह योजना केसीसी के एक विकल्प के तौर पर भी है।

नया नजरिया: कृषि क्षेत्र में भी बढ़े दायरासंयुक्त देयता समूह के माध्यम से मिलने वाला लोन नन एग्रीकल्चर सेक्टर में ही देने का प्रावधान है। भोजपुर एक कृषि बाहुल्य उत्पादन क्षेत्र है। अगर संयुक्त देयता समूह के माध्यम से एग्रीकल्चर सेक्टर में लोन देने का प्रावधान किया जाए तो यहां विकास की काफी संभावनाएं हो सकती हैं।

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