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सपनों को दें रफ्तार

जानलेवा सड़क हादसे चिंता बढ़ाते हैं। चिंता इसलिये भी बढ़ जाती है कि असमय मौत का शिकार युवा हो रहे हैं। सिर्फ माता-पिता के सपने ही नहीं बिखरते। तरक्की का वो ताना-बाना भी बिखर जाता है जो देश इन युवाओं में बुनता है।

रफ्तार के रथ पर सवार नौजवान पीढ़ी क्यों भूल जाती है कि यह उम्र सफलता की उड़ान भरने की है। मौत का ब्रेक लगाने की नहीं। लापरवाही बड़ों की भी। रफ्तार के साधन खिलौनों की तरह बच्चों के हाथ में दे दिये जाते है। बच्चे तो सीखें ही, लेकिन आप भी तो उन्हें सिखाने का बीड़ा उठाइये।

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