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चोरी में पुलिस अफसर शामिल

नोवामुंडी स्थित बोकारो साइडिंग से 50.750 मीट्रिक टन जब्त लौह अयस्क की चोरी के मामले में तीन पुलिस अफसरों को दोषी पाया गया है। डीआइजी की जांच रिपोर्ट के अनुसार जब्त लौह अयस्क पुलिस वालों की मिलीभगत से बाहर भेज दिया गया। मामला उजागर होने पर कुछ अफसरों पर कार्रवाई हुई, लेकिन फिर क्लिन चिट दे दिया गया। डीआइजी ने जांच रिपोर्ट डीजीपी को सुपुर्द किया है।

क्या है पूरा मामला
चाईबासा उपायुक्त के निर्देश पर नोवामुंडी के तत्कालीन बीडीओ अरविंद कुमार, प्रभारी खान निरीक्षक सुरेंद्र कुमार, दारोगाबीडी मिश्र द्वारा लौह अयस्क के भंडारण की जांच की गई थी। वैध कागजात के अभाव में टीम ने बोकारो साइडिंग और पांच नंबर साइडिंग से 50 मीट्रिक टन अयस्क जब्त किए थे।

ऐसे खुला था मामला
जिस कंपनी का लौह अयस्क जब्त किया गया था, उसे बाद में खनन विभाग ने रिलीज कर दिया था। जब कंपनी के संचालक लौह अयस्क लेने पहुंचे तो कुछ नहीं था।

मामले की उच्चस्तरीय जांच
जब्त लौह अयस्क की चोरी के मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई गई। इसमें प्रशिक्षु डीएसपी मुकेश कुमार, सीओ, खनन अधिकारी, जगन्नाथपुर के एसडीओ सहित कई अफसरों से पूछताछ हुई। जांच में उजागर हुआ कि पूरे प्रकरण में एसडीओ और अन्य पुलिस अफसरों ने लापरवाही बरती।

तत्कालीन थाना प्रभारी बीडी मिश्र और दारोगा सी डिक्रूज सबसे ज्यादा दोषी हैं। अफसरों ने जब्त लौह अयस्क का वजन नहीं कराया और न ही उचित निगरानी की। एसडीओ ने भी इस माले में जांच की थी। उनकी रिपोर्ट पर डीआइजी ने सवाल खड़ा किया है।

कार्रवाई में भी लीपापोती
इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण है कि थाना प्रभारी दाउद किड़ो निलंबित किए गए थे।  लेकिन बाद में निलंबन मुक्त कर दिया गया। वहीं दारोगा बीडी मिश्र और सी डिक्रूज के विरुद्ध मामूली कार्रवाई की गई।

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