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400 करोड़ का गबन तथ्य से परे : मंत्री

झारखंड पर्यटन विकास निगम में गबन के मामले पर मंगलवार को विधानसभा में खूब नोंकझोंक हुई। झाविमो विधायक प्रदीप यादव ने ध्यानाकर्षण में मामला उठाते हुए 400 करोड़ रुपए के गबन की बात कही और सरकार से सीबीआइ जांच कराने की मांग की।

विभागीय मंत्री विमला प्रधान ने गबन से इनकार करते हुए कहा कि इसकी निगरानी जांच चल रही है। मंत्री के जवाब से नाखुश प्रदीप यादव वेल में आ गए। अध्यक्ष सीपी सिंह ने स्थिति को देखते हुए सभा की कार्यवाही समय से पांच मिनट पहले ही स्थगित कर दी।

बिना काम के भुगतान : प्रदीप
प्रदीप यादव ने कहा कि पर्यटन स्थलों के विकास के नाम पर आइटीडीसी, नई दिल्ली को बिना काम के 38.71 करोड़ का भुगतान किया गया है। सचिव राजबाला वर्मा ने 2009 में 40 करोड़ के गबन की पुष्टि करते हुए निगरानी जांच की अनुशंसा की थी। निगरानी आयुक्त के तकनीकी कोषांग ने 2008 में पर्यटन विभाग द्वारा लघु फिल्मों के निर्माण के लिए मेसर्स जेनेसिस मुम्बई को किए गए भुगतान को गलत बताया है। यादव ने दोषी पदाधिकारियों पर एफआइआर करने की मांग की।

बजट से ज्यादा गबन संभव नहीं : मंत्री
मंत्री विमला प्रधान ने कहा कि पिछले दस वर्षो में पर्यटन विभाग का योजना उद्व्यय मात्र 305.76 करोड़ रुपये रहा है, जिनमें 201.91 करोड़ रुपए व्यय हुए हैं। 2004-05 से 2008-09 तक योजना उद्व्यय 218.50 करोड़ था, जिसमें 143.90 करोड़ व्यय हुए। उन्होंने ऐसे में 400 करोड़ का गबन तथ्य से परे है। आइटीडीसी को 38.71 करोड़ के भुगतान के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वित्त विभाग के अंकेक्षण दल ने एक ही राशि कई बार जोड़ दी है। वास्तविक भुगतान 29.76 करोड़ ही किया गया है।

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