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बच्ची का शव कुएं में मिला, जमकर हंगामा

4 मार्च से भिड़वारा गांव से लापता बच्ची का शव सोमवार दोपहर गांव के पास ही कुएं में बोरी में बंद मिला। मौके पर पहुंची पुलिस को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों ने पुलिस पर हीलाहवाली का आरोप लगाते हुए हंगामा किया।

कुछ ग्रामीणों ने थानाप्रभारी की गाड़ी पर पथराव कर दिया और घंटों शव नहीं उठने दिया। बवाल पर मौके पर आए डीआईजी ने ग्रामीणों की मांग पर थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज को निलंबित करने का आदेश दिया। डीआईजी के आश्वासन और कार्रवाई से संतुष्ट ग्रामीण शांत हो गए।

भिड़वारा गांव निवासी सुंदर प्रजापति की नौ वर्षीय बेटी प्रीति 4 मार्च को गांव से अचानक गायब हो गई थी। परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कुछ पता नहीं लगा। उन्होंने उसी दिन थाने में तहरीर दी।

परिजनों ने गांव के ही एक युवक पर शक जताते हुए उसका नाम भी पुलिस को बताया लेकिन, पुलिस ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की और रविवार रात बच्ची के ही चचरे भाई ब्रह्मपाल को हिरासत में ले लिया। आरोप है कि पुलिस ने हिरासत में उसकी जमकर पिटाई भी की।

जब सोमवार सुबह तक युवक ने कुछ नहीं उगला तो गायब बच्चाी के परिजन परिवार के ही युवक को उठाने के विरोध में थाने आए और रोष जताया। पुलिस ने मामले में कोई कार्रवाई तो दूर गुमशुदगी तक दर्ज नहीं की और पीड़ितों को टरकाती रही। सोमवार की दोपहर तीन बजे गांव के पास ही कुएं में बच्ची का शव एक प्लस्टिक के बोरे में बंद मिला।

कुएं से भयंकर बदबू आने के कारण लोग उस तरफ गए थे, ग्रामीणों ने बोरा बाहर निकाला तो शव अर्धनग्न अवस्था में था और सड़ा गला हुआ था। आशंका जताई जा रही है कि प्रीति के साथ दुष्कर्म किया और फिर गला दबाकर हत्या कर दी।

ग्रामीणों में पुलिस के प्रति गुस्सा फूट गया। जैसे ही थाना प्रभारी के साथ पुलिस पहुंची तो ग्रामीणों ने विरोध किया और पुलिस पर मामले को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया। कुछ आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस की गाड़ी पर पथराव कर दिया।

पुलिस ने किसी तरह खुद को बचाया और आला अधिकारियों को सूचना दी। सीओ विकास त्रिपाठी भारी पीएसी के साथ गांव पहुंचे तथा ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया। ग्रामीणों ने सीओ की एक नहीं सुनीं और डीआईजी को मौके पर बुलाने की मांग की।

डीआईजी हरीराम शर्मा मौके पर पहुंचे तो ग्रामीणों ने थानाध्यक्ष पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए उसे हटाने की मांग की। डीआईजी ने लापरवाही बरतने पर एसओ धर्मेन्द्र और हल्का इंचार्ज जयपाल सिंह को निलंबित कर दिया।

उन्होंने ग्रामीणों को विश्वास दिलाया कि इस पूरे मामले का जल्द खुलासा होगा। डीआईजी के आश्वासन और कार्रवाई से संतुष्ट ग्रामीणों ने शव पुलिस को सौंप दिया।

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