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मंत्रियों के पीएस, एपीएस बनने के लिए मारामारी

नई सरकार में मारामारी केवल मंत्री पद पाने के लिए नहीं है, मंत्रियों के निजी सचिव (पीएस), अपर निजी सचिव (एपीएस) और समीक्षा अधिकारी बनने के लिए भी जबर्दस्त मारमारी है। पर्दे के पीछे निजी सचिव और अपर निजी सचिव बनने के लिए सचिवालय कर्मचारियों में होड़ मची है।

मंत्रियों के यहां तैनाती पाने के लिए यह होड़ यूं ही नहीं मची है बल्कि मंत्रियों के यहां तैनाती मलाईदार पद माना जाता है। इस होड़ के पीछे खास बात यह भी है कि लंबे समय तक कई ताकतवर मंत्रियों के पीएस रहे लोग लंबी गाड़ियां और बंगले तक रखते हैं। उनका रसूख किसी मंत्री से कम नहीं होता है।

ताकतवर मंत्री वे माने जाते हैं जो मुख्यमंत्री के खास होते हैं और उनके पास कमाऊ विभाग होते है। ताकतवर मंत्रियों के यहां तैनाती से पीएस का सचिवालय में रुतबा बढ़ता है। ये पीएस इतने शातिर होते हैं कि इस बात का पहले से ही अंदाजा लगा लेते हैं कि इस सरकार में कौन-कौन ताकतवर मंत्री होगा और उसे कौन-कौन सा विभाग मिल सकता है।

इस हिसाब से ये अपनी गोटियां फिट करना शुरू कर देते हैं। संभावित मंत्रियों के यहां इनकी शपथ लेने से पहले ही आवाजाही शुरू हो गई है। कई पुराने पीएस, एपीएस ने तो संभावित मंत्रियों के घरों पर कामकाज भी संभाल लिया है। जो पीएस, एपीएस क्यू में हैं, वे मंत्रियों के यहां तैनाती पाने के लिए तरह-तरह के जुगाड़ लगा रहे हैं।

कोई बिरादरी के नाते तो कोई क्षेत्र के नाते। कई पीएस भी बड़े ताकतवर हैं, ऐसे पीएस को हर कोई मंत्री चाहता है। क्योंकि इस तरह के पीएस रखने से वे समझते हैं कि उनका विभागीय कामकाज आसानी से चलता रहेगा। कई बार पीएस मंत्री की ओर से प्रमुख सचिवों तक को निर्देश देते हैं।

या जो बात मंत्री नहीं कह पाते, ऐसी बातें विभागीय अधिकारियों को निजी सचिव समझा देते हैं। ऐसे में बड़े काम की चीज साबित होते हैं ये पीएस। बसपा सरकार में मंत्रियों के पीएस रहे सचिवालय कर्मचारी इस सरकार में भी मंत्रियों के पीएस बनने के लिए लालायित हैं।

वे अपना बायोडाटा यह कहकर प्रभावी बना रहे हैं कि वे फलां मंत्री के पीएस थे। यह बात दीगर है कि सपा सरकार में मंत्रियों के पीएस रहे सचिवालय कर्मचारी तेजी से सक्रिय हो गए हैं। कई पीएस ने अपने पुराने मंत्रियों को पकड़ लिया है। हालांकि वे मंत्री बने नही हैं, लेकिन उनको विश्वास है कि उनके नेता जरूर मंत्री बनेंगे।

कुछ पीएस केवल मेल-मुलाकात कर रहे हैं, वे विभाग देखकर मंत्री के यहां जुगाड़ लगाएंगे। क्योंकि ऐसे कई पीएस हैं जो केवल मलाईदार विभागों में ही खपते हैं, छोटे-मोटे मंत्रियों के यहां पीएस बनना पसंद नहीं करते। कई पीएस इस बात का हवाला दे रहे हैं कि वे बसपा सरकार में रिजर्व रहे या खराब पोस्टिंग पर तैनात रहे। अब अपनी सरकार में तो कम से कम उनके दिन बहुर जाएं।

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  • Web Title:मंत्रियों के पीएस, एपीएस बनने के लिए मारामारी