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आईआईटी छात्र प्रकरण, पुलिस की मुश्किलें बढ़ी

आईआईटी दिल्ली के छात्र सुरेंद्र भोखिया की गिरफ्तारी के प्रकरण में पुलिस को राहत नहीं मिल रही है। डीआईजी के स्पष्टीकरण पर आपत्ति दर्ज कर छात्र के वकील ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उसके वकील ने सच्चई पता लगाने के लिए संबंधित रिमाण्ड मजिस्ट्रेट का बयान, थाने से छात्र की रवानगी, उर्सला में मेडिकल परीक्षण और जेल दाखिल के समय की आख्या तलब किए जाने की अपील की है। इस पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित कर लिया है।

आईआईटी छात्र भोखिया को कल्याणपुर पुलिस ने आईआईटी कानपुर की छात्र को अश्लील एसएमएस और शादी के लिए अपहरण का प्रयास के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस उसको दिल्ली आईआईटी कैम्पस से गिरफ्तार कर कानपुर लाई थी। इसका पता चलते ही छात्र के वकील ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी के विरुद्ध स्टे ले लिया था। जिसे फैक्स के जरिए डीआईजी कार्यालय में रिसीव कराया गया था।

एडवोकेट शिवाकान्त दीक्षित का कहना है कि हाईकोर्ट का आदेश रिसीव करने के बाद भी छात्र छोड़ा नहीं गया, बल्कि उसको जेल भेज दिया था। उन्होंने पुलिस पर हाईकोर्ट की अवमानना करने का आरोप लगाया है। जिस पर डीआईजी से स्पष्टीकरण तलब किया गया था। डीआईजी ने जवाब में कहा है कि कार्यालय में फैक्स के जरिए सुबह 11:15 बजे हाईकोर्ट के आदेश की कापी रिसीव हुई थी, लेकिन इसके पहले ही विवेचक छात्र को कोर्ट में पेश कर चुके थे। जिस पर एडवोकेट दीक्षित ने आपत्ति दर्ज की है।

उनका आरोप है कि डीआईजी ने बचने के लिए गोलमोल जवाब कोर्ट में दाखिल किया है। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित करते हुए गुरुवार की तारीख लगाई है।

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