DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

जीतने की जिद के साथ तैयारी में जुटी प्रियंका

कुशीनगर के रधिया देवरिया गांव की प्रियंका यादव। बचपन से गांव के तलाब में बच्चों को तैराक बनते देखा। बाल मन ने सपने गढ़े और मां गीता देवी ने उन सपनों को अपनी सहमति का आधार दिया। प्रियंका ने भी तैराक बनने की ठान ली।

वर्षो की मेहनत के बाद गुजरात के साईं स्पोर्ट्स कॉलेज में दाखिला मिला तो प्रियंका गांव से बाहर की दुनिया में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने लगी। दो साल से दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के लिए पदक जीत रही प्रियंका कंधे के भयानक दर्द के बावजूद जीतने की जिद के साथ दिल्ली में टिक कर तैयारी में जुटी है। प्रैक्टिस के साथ एम्स में उसका इलाज भी चल रहा है।

20 दिन पहले परीक्षा देने घर लौटी प्रियंका को मंगलवार को विश्वविद्यालय के संवाद भवन में सम्मानित किया गया। ‘हिन्दुस्तान’ से बातचीत में उसने कहा, ‘यहां बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने मुङो दिल्ली जाने पर मजबूर किया। गांव में तालाब तो है लेकिन सिर्फ उससे तो बात नहीं बनती। तैराकी के पुल में स्टार्टिग प्वाइण्ट, टर्निग प्वाइण्ट, स्ट्रेट ब्लैक लाइन जैसी कई चीजें होती हैं। तालाब में यह नहीं हो सकता।’

हाटा के किसान महाविद्यालय में बीए द्वितीय वर्ष की छात्र प्रियंका ने साल 2010 में अंतर्विश्वविद्यालयी प्रतियोगिताओं में एक रजत और दो कांस्य पदक जीते थे। साल 2011 में 17 से 20 अगस्त के बीच कोलकाता विश्वविद्यालय में आयोजित अंतर्विश्वविद्यालयी प्रतियोगिता में (50 मीटर बैक स्ट्रोक तैराकी में) कांस्य पदक जीता। मंगलवार को कुलपति प्रो.पीसी त्रिवेदी ने प्रियंका को 10 हजार रुपए नकद, विश्वविद्यालय कलर और शील्ड से सम्मानित किया।

प्रियंका को कुशीनगर और गोरखपुर में तैराकी की सुविधाओं की कमी खलती है। कहती हैं, ‘मेरे गांव में पांच साल की उम्र से बच्चाे तैराकी शुरू कर देते हैं। हर साल आठ-दस बच्चाे स्पोर्ट्स कॉलेजों में सेलेक्ट होते हैं। पूना, फतेहगढ़, लखनऊ, गुजरात हर जगह गांव के बच्चाे हैं। लेकिन उनके लिए वहां रहना बेहद मुश्किल होता है।’

दिल्ली में प्रियंका लक्ष्मीनगर में किराए पर रहती है। तालकटोरा और आर के पुरम स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में प्रैक्टिस करती है। प्रियंका के मुताबिक दिल्ली का खर्च बर्दाश्त करना कई बार मुश्किल हो जाता है। ऐसे में जब कहीं से कोई मदद नहीं मिलती तो बहुत बुरा लगता है। उसने कहा, ‘क्रिकेट को जितना बढ़ावा दिया जाता है उसका चौथाई ध्यान भी अन्य खेलों की ओर दे दिया जाता तो स्वर्ण पदकों की बारिश होने लगती।’ प्रियंका के कोच अनिल यादव ने भी समारोह में प्रियंका जैसी खिलाड़ियों को विश्वविद्यालय की ओर से आर्थिक सहायता मुहैया कराने की मांग की। 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:जीतने की जिद के साथ तैयारी में जुटी प्रियंका