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रेलवे ग्रुप डी भर्ती परीक्षा पर उठे सवाल

रेलवे ग्रुप डी परीक्षा परिणाम में नाम गायब होने से परीक्षार्थी परेशान हैं। 204 अभ्यर्थियों की सूची एक महीने बाद जारी करने की बात पर परीक्षार्थियों ने चयन प्रक्रिया पर ही सवाल उठाए हैं। परीक्षार्थियों का कहना है कि रेलवे को अगर प्रमाणपत्रों की जांच करनी है तो सब्जेक्ट टू वैरिफिकेशन के नोटिस के साथ मेरिट घोषित करे। बिना नोटिस परिणाम रोकने का कोई औचित्य नहीं बनता।

रेलवे ग्रुप डी भर्ती परीक्षा शुरू से ही विवादों में है। 16 अक्तूबर को हुई परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने का आरोप लगा था। बाद में आरआरसी के एक अधिकारी के गांव से ही कई सेलेक्शन होने के आरोप लगे। 2968 पदों के लिए हुई परीक्षा में अब नया विवाद खड़ा हो गया है।

आरआरसी ने जो परिणाम जारी किए हैं वो 2764 पदों के ही हैं। 204 आवेदकों की सूची एक महीने बाद जारी करने की बात कही जा रही है। फाइनल रिजल्ट से नाम गायब होने से परीक्षार्थियों को दाल में काला नजर आने लगा है। रेलवे अफसरों का कहना है कि वैरिफिकेशन के लिए परिणाम रोके गए हैं, जबकि परीक्षार्थियों का कहना है कि परिणाम अगर रोकना था तो मेरिट जारी करनी चहिए थी। यह नोटिस दिया जा सकता था कि सब्जेक्ट टू वैरिफिकेशन।

अगर रेलवे ऐसा करता तो कम से कम आवेदकों को यह राहत रहती कि वह मेरिट में हैं। प्रमाणपत्र जाली होने पर उन्हें निकाला गया। लेकिन सूची से नाम ही गायब होने पर अब फाइनल रिजल्ट बनाने में उनसे रुपये की मांग की जाएगी। इस महत्वपूर्ण परीक्षा में विवाद होने के बाद अब तक रेलवे की विजलेंस टीम ने मामले को संज्ञान में नहीं लिया है।

इसके पूर्व रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से हुई परीक्षाओं में इस प्रकार के आरोप लग चुके हैं, जो कि सीबीआई जांच में सही पाए गए थे। ऐसे में इस गंभीर मामले पर अब तक रेलवे सक्रिय क्यों नहीं हुआ। अभ्यर्थी मनीष ने परिणाम घोषित करने की मांग की है।

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