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‘जब तक जिंदा हूं अच्छा लिखने की चुनौती है’

सम्मान पाकर खुशी मिलती है, लेकिन सम्मान लेखकों के सामने और अच्छा लिखने की चुनौती खड़ी करता है। जब तक जिंदा हूं तब तक अच्छा लिखने की चुनौती रहेगी। यह बात मशहूर साहित्यकार अमरकांत ने ज्ञानपीठ सम्मान समारोह में जाने से पहले मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कही।

उन्होंने कहा कि लेखक को सम्मान मिलते रहते हैं, लेकिन सम्मान पाना कोई मंजिल नहीं है। यह प्रोत्साहन का जरिया जरूर हो सकता है। कई बार ऐसा भी होता है कि बहुत अच्छे लेखक पुरस्कार से वंचित रह जाते हैं। इससे उनका महत्व कम नहीं हो जाता। जब भी कोई पुरस्कार मिलता है तो लेखक के सामने उससे भी अच्छा लिखने की चुनौतियां बढ़ जाती हैं। अमरकांत ने कहा कि लेखक को पुरस्कारों के चक्कर में न पड़कर हमेशा अच्छा लिखने का प्रयास करना चाहिए, मेहनत करनी चाहिए।

पुरस्कारों से रोक हटाएं मुलायम
अमरकांत से जब यह पूछा गया कि पिछली सरकार ने साहित्यकारों को दिए जाने वाले पुरस्कारों पर रोक लगा दी। अब नई सरकार आ गई है इस पर वह क्या कहना चाहेंगे तो अमरकांत ने कहा कि मुलायम जनता के आदमी हैं।

वह हिन्दी के बारे में भी सोचते हैं। अब प्रदेश में उनकी सरकार है तो उन्हें इन पुरस्कारों को दोबारा शुरू करना चाहिए ताकि साहित्यकार प्रोत्साहित हों। जातियों के आधार पर साहित्यकार बिरादरी कई हिस्सों में बंटने पर अमरकांत ने कहा कि साहित्य में जाति का कोई महत्व नहीं होता। पुरस्कार चाहे दलित लेखकों को मिले या किसी और को, लेकिन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारों को साहित्य व साहित्यकारों के बारे में सोचना चाहिए और उन्हें ऐसा माहौल देना चाहिए, जिससे वह समाज को साहित्य से समृद्ध कर जाएं।

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