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सोडा दे सकता है धोखा

गरमी में पसीना अधिक निकलता है और खाने का मन कम करता है। इसके कारण सामान्य दिनचर्या में भी कमजोरी महसूस होने लगती है। मन करता रहता है कुछ ऐसा पीने का, जो तुरंत एनर्जी दे। सोडे से बेहतर क्या हो सकता है! पर, सोडे पर बढ़ती निर्भरता सेहत पर क्या असर डाल सकती है, बता रही हैं न्यूट्रिशन एक्सपर्ट विशाखा शिवदासानी

आपको कमजोरी महसूस होती है। आप कुछ ऐसा पीना चाहते हैं, जो तुरंत एनर्जी दे। आप सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल खोलते हैं (सोडा या काबरेनेटेड बेवरेज) और गटागट पी जाते हैं। आपको सॉफ्ट ड्रिंक पीने से राहत मिलती है, लगता है कि ऊर्जा वापस आ रही है। यह ऊर्जा कुछ घंटों तक बनी रहती है। आप पूरी तरह सक्रिय होकर काम करते रहते हैं, जब तक आपको दोबारा कमजोरी का अनुभव न हो। यदि आपको वास्तव में बार-बार इस तरह ऊर्जा हासिल करने की जरूरत होती है तो इसका मतलब है कि आप सोडा एडिक्ट हो गए हैं।

सॉफ्ट ड्रिंक को हेल्थ ड्रिंक नहीं माना जाता। सच तो यह है कि यह सेहत को नुकसान ही पहुंचाता है, बावजूद इसके हम इसे पीने से खुद को रोक नहीं पाते। प्रश्न यह है कि ऐसा क्या होता है इसमें कि लोग खुद को इसे पीने से रोक नहीं पाते?

सॉफ्ट ड्रिंक्स में पोषक तत्व नहीं होते। सोडा एक तरह से काबरेनेटेड पानी है, जिसमें फ्लेवर और मिठास के लिए चीनी या कृत्रिम मिठास वाले तत्वों को मिलाया जाता है। इसके अलावा वैकल्पिक रूप से फल व फलों का जूस, सब्जियों का रस, जड़ी बूटियां, मसाले, आर्टिफिशियल फ्लेवर, कैफीन, प्रिजर्वेटिव  और रंग भी मिलाए जाते हैं। 86 प्रतिशत काबरेनेटेड ड्रिंक्स में पानी मिला होता है।

सॉफ्ट ड्रिंक्स में बुलबुलों की मौजूदगी काबरेनेशन के कारण होती है, एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें उच्च दबाव में घोल के अंदर कार्बन डाइऑक्साइड मिलाई जाती है।  जब इस प्रेशर को कम किया जाता है तो कार्बन डाइऑक्साइड बुलबुले के रूप में बाहर आने लगती है। इससे ड्रिंक को ताजगी मिलती है। सोडा में कैलोरी काफी अधिक होती है, औसतन 330 मिली. में 150 कैलोरी होती है। पर पोषक तत्व नहीं होने के कारण इस कैलोरी का पोषण मूल्य जीरो होता है।

सॉफ्ट ड्रिंक्स के सेहत पर पड़ने वाले असर
अधिकतर कोला पेय पदार्थों में प्रिजर्वेटिव्स के तौर पर सिट्रिक एसिड और फॉस्फोरिक एसिड मिलाए जाते हैं। रक्त में इन एसिड की अधिकता पीएच अंसुलन पैदा कर देती है, जिसे संतुलित करने के लिए शरीर कैल्शियम का इस्तेमाल करता है। यह कैल्शियम हड्डियों से हासिल किया जाता है, जो कि आगे चलकर ओस्टियोपोरोसिस का कारण बन जाता है। यही वजह है कि अधिक सोडा सेवन करने वाले किशोरों और युवाओं में हड्डियां कमजोर होने संबंधी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। इसके अलावा कैफीन की अधिक मौजूदगी डिहाइड्रेशन की समस्या उत्पन्न कर देती है। साथ ही शरीर में कई मिनरल तत्वों की बड़े स्तर पर कमी होने लगती है।

सोडा मूत्रवर्धक है यानी इसे अधिक पीने से पेशाब ज्यादा आता है। इसमें सोडियम भी होता है, जिससे आपको प्यास अधिक लगती है और कई बार इस प्यास को कम करने के लिए सॉफ्ट ड्रिंक अधिक पीने लगते हैं। सोडे में मौजूद शर्करा दांतों को नुकसान पहुंचाती है। हममें से बहुत कम ही लोग ऐसे हैं, जो सोडा व अन्य सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने के बाद दांतों पर ब्रुश करते हैं। डेंटल इनेमल यानी दांतों की बाहरी परत का काम दांतों को सुरक्षा प्रदान करना होता है। सॉफ्ट ड्रिंक्स में सिट्रिक और फॉस्फोरिक एसिड की मौजूदगी दांतों की बाहरी परत को नुकसान पहुंचा कर उनके क्षय होने की आशंका को काफी बढ़ा देती है।

वॉशिंगटन डीसी स्थित जॉजर्टाउन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में कैंसर कंट्रोल प्रोग्राम से जुड़े एक रिसर्च एसोसिएट निऑन टी. म्युलर, एमपीएच के एक अध्ययन के अनुसार, हर सप्ताह दो काबरेनेटेड ड्रिंक्स (प्रत्येक केन में 330 मिली) पीने से पेनक्रिएटिक यानी अग्न्याशय कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। यह अध्ययन वर्ष 2009 में जरनल ऑफ अमेरिकन एसोसिएशन फॉर कैंसर रिसर्च में प्रकाशित हुआ था।

इसी तरह अमेरिका में बालटिमोर स्थित हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन में कैफीन की लत डालने की प्रकृति पर हुए परीक्षणों के अनुसार, ऐसी महिलाएं जो हर रोज एक कप से ज्यादा किसी भी तरह के कैफीनयुक्त बेवरेज का सेवन करती हैं, उनमें प्रीमेंस्ट्रल सिंड्रोम यानी माहवारी संबंधी समस्या होने की आशंका अधिक होती है। लंबे समय तक इसका अधिक सेवन इसके लक्षणों को और गंभीर समस्या का रूप दे देता है।

अब यदि आप सामान्य शर्करायुक्त सोडे की जगह डाइट सोडा को सेहत के लिए अच्छा मान रहे हैं तो इस संबंध में भी सतर्क रहने की आवश्यकता है। इसी वर्ष जनरल इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित हुए एक नए अध्ययन के अनुसार ऐसे लोग जो हर रोज डाइट सोडा पीते हैं, उनमें नाड़ी संबंधी रोगों यानी वस्कुलर डिजीज (इसमें हृदयाघात भी शामिल है) होने की आशंका 44 प्रतिशत बढ़ जाती है। यह अध्ययन न्यूयॉर्क के करीब ढाई हजार लोगों पर लॉस एंजिल्स में अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन की इंटरनेशनल स्ट्रोक कॉन्फ्रेंस 2011 में पेश किया गया।

सोडा पीने की लत ऐसे करें दूर
किसी भी तरह की लत से दूर होने की बात करना आसान है, पर उससे छुटकारा पाना उतना ही मुश्किल है। कैफीन का सेवन बंद करना सिर दर्द की समस्या उत्पन्न कर देता है। इसके अलावा चूंकि इसमें शर्करा अधिक होती है तो इससे आपको ऊर्जा मिलती रहती है। ऐसे में जब आप एकदम से इसका सेवन बंद करते हैं तो आपको कुछ न कुछ मीठा खाने का मन करता रहता है।

यदि आपको एक दिन में ही इसे छोड़ने में दिक्कत महसूस हो रही है तो आप प्रारंभ में सामान्य सोडा ड्रिंक्स की जगह डाइट सोडा या टॉनिक वॉटर या क्लब सोडा लें, इसमें कैलोरी कम होती है, कैफीन नहीं होता और कृत्रिम रंगों का इस्तेमाल कम किया जाता है। पर यह समाधान लंबे समय तक नहीं है। ध्यान रखें कि डाइट सोडा भी सेहत के लिए नुकसानदायक है। बतौर डॉक्टर मैंने अपने कई मरीजों के साथ इसे सफलतापूर्वक अपनाया है और उन्हें इस आदत से छुटकारा पाने में 12 हफ्ते का समय लगा।

इसके अलावा मैं मरीजों को ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करने की सलाह देती हूं, जिनमें एल-ग्लटेमाइन अधिक होता है। यह एक तरह का एमिनोएसिड है, जो अंडा, मछली, चिकन, गेहूं, बींस, गोभी, चुकंदर, पालक में अधिक मात्र में होता है। इससे मीठा खाने की ललक कम होती है।

प्राकृतिक और पोषक पेय पदार्थों मसलन नींबू पानी या नारियल पानी, इनमें शर्करा की मात्र कम होती है और पोटैशियम अधिक होता है। सॉफ्ट ड्रिंक्स की तुलना में नारियल पानी या नींबू पानी लेना शरीर में पीएच के संतुलन को बनाए रखता है। साथ ही इससे ब्लड प्रेशर भी नियमित होता है।

ध्यान रखें
330 मिली. सोडा की एक केन पीना 150 कैलोरी देता है। अब यदि आप हर रोज एक केन पीते हैं तो 365 दिन के हिसाब से हर वर्ष 54,750 कैलोरी मिलेगी यानी साल में आपका वजन 7.08 किलोग्राम तक बढ़ जाएगा। यदि आप मोटे नहीं हैं तो यह आप में मोटापा बढ़ाने का आसान तरीका होगा।

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