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बुखार की पहचान करें ध्यान से

मौसम बदलने के साथ आक्रमण करने वाला बुखार वायरल भी हो सकता है और मच्छर जनित भी। प्लेटलेट्स कम होने व कंपकंपाहट का मतलब हमेशा डेंगू बुखार नहीं होता। इसी श्रेणी के बुखार चिकुनगुनिया (येलो फीवर) और मेनिनजाइटिस (दिमागी बुखार) के लक्षणों में हालांकि अधिक फर्क नहीं होता। बुखार की सही पहचान बिना कराए इलाज कराने का सीधा मतलब है अपनी बीमारी को बढ़ाना।

क्या हैं बुखार के लक्षण
किसी भी साधारण या वायरल बुखार का असर दो से चार दिन तक रहता है। इसकी शुरुआत बदन टूटने व थकान से होती है। कंपकंपी व चक्कर आना भी सामान्य बुखार के लक्षण हो सकते हैं। इस स्थिति में पैरासिटामोल से आराम आ जाता है, पर यदि गले व जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, थकान, उल्टी व त्वचा पर रेशे जैसे दिखें तो सचेत हो जाना चाहिए। यह मच्छर जनित बुखार हो सकता है।

एलाइजा जांच जरूरी
बुखार किस तरह के मच्छर काटने से हुआ है या फिर रक्त में कौन सा संक्रमण बढ़ रहा है, इसकी पहचान के लिए एलाइजा जांच होनी चाहिए। बुखार हुए सप्ताह से अधिक हो गया है तो खून की जांच जरूर कराएं। पहले रक्त में एचआई (हीमोग्लुटिन इन्हिबिशन) एंटीबॉडी की उपस्थिति सिरम सैंपल के साथ देखी जाती है, जिसके पॉजिटिव होने पर आईजीजी (इम्यूनोग्लोबिन जी)व आईजीएम (इम्यूनोग्लोबिन एम) जांच की जाती है। जांच क्रॉस चेक के लिए रक्त के सिरम की आरटी पीसीआर जांच की जाती है।

ये सावधानी है जरूरी
घर में पानी को एकत्र न होने दें, मच्छर रोधी दवाओं का छिड़काव करते रहें।
आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखें। पोखर व नालियां ढंकी होनी चाहिए।
लार्वा न पनपने दें, मच्छर रोधी उपायों का प्रयोग करें।

क्या है वेक्टर बोर्न डिजीज
किसी भी संक्रमित मच्छर द्वारा एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को काटने पर वायरस के रक्त में पहुंचने को वेक्टर बोर्न डिजीज कहते हैं। इसमें मच्छर के संक्रमित होने का मतलब है कि वह बीमारी के वाहक किसी मरीज को काट चुका है। मच्छर जनित रोगों का चक्र हर साल ज्यामितीय क्रम में बढ़ता है, जबकि संक्रमित बुखार से पीड़ित मरीज को काटने के बाद यह अन्य घरों में भी फैल जाता है। इसमें मक्खियां और जोंक भी शामिल हैं।

क्या है चिकुनगुनिया
संक्रमित एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से चिकुनगुनिया बुखार होता है। इसमें चिक-वी नाम का वायरस मरीज के रक्त में तीन दिन बाद तेजी से संक्रमण बढ़ाता है। संक्रमण का असर मच्छर काटने के 7 से 10 दिन के भीतर नजर आता है। इसीलिए इसे साइलेंट चिक वी संक्रमण कहा जाता है। रक्त में पहुंचा वायरस प्रतिरोधक क्षमता को कम करता रहता है, जिससे 10 से 15 दिनों तक थकान बनी रहती है। आंखों में लालिमा, रात में  कम दिखाई देना व सिरदर्द भी होता है।
निशि भाट

क्या कहते हैं विशेषज्ञ
बुखार के प्रति लोगों में अब भी जागरूकता नहीं है। बुखार होने पर कोई भी दवा न लें, दो दिन से अधिक बुखार होने पर रक्त की जांच कराएं, यह संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए। चिकुनगुनिया भी मच्छरजनित बीमारी है। लोगों को लक्षणों की पहचान होनी चाहिए।
डॉ. चंद्रकांत एस पांडव, कम्युनिटी मेडिसन विभाग, एम्स व अध्यक्ष, इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन

वेक्टर बोर्न डिजीज में हालांकि अब भी लोग डेंगू के बारे में अधिक जानते हैं, जबकि चिकुनगुनिया का असर कहीं अधिक गंभीर हो सकता है। मच्छरों के किसी भी संक्रमण से बचने के लिए बुखार की सही समय पर जांच जरूरी है।
डॉ. एनके यादव, स्वास्थ्य अधिकारी, दिल्ली नगर निगम

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