DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सेवानिवृत्त कर्मियों को 10 लाख रुपए ग्रेच्युटी की मांग

बिहार विधानसभा में सत्ता और विपक्ष के विधायकों ने एक अप्रैल 2007 से 22 सितंबर 2009 की अवधि में अवकाश ग्रहण करने वाले सरकारी कर्मचारियों को 10 लाख रुपए ग्रेच्युटी भुगतान करने की मांग की।

विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से प्रतिपक्ष के नेता अब्दुल बारी सिद्दिकी ने कहा कि एक अप्रैल 2007 से 22 सितंबर 2009 की अवधि के दौरान सरकारी नौकरी से अवकाश ग्रहण करने वाले कर्मियों को सेवानिवृत्ति के बाद 10 लाख रुपए के ग्रेच्युटी लाभ से वंचित किया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने छठे वेतन पुनरीक्षण आयोग की अनुशंसा पर अप्रैल 2007 के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पुनरीक्षित पेंशन का लाभ दिया है, जबकि ग्रेच्युटी की 10 लाख रुपए की रकम एक अप्रैल 2007 से 22 सितंबर 2009 की अवधि में सेवानिवृत्त कर्मियों को नहीं दिया गया है।

जदयू विधायक मंजीत कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि एक अप्रैल 2007 से 22 सितंबर 2009 के बीच अवकाश प्राप्त कर्मियों को पुनरीक्षित पेंशन लाभ दिया गया है, जबकि पुनरीक्षित ग्रेच्युटी के लाभ से वंचित कर दिया गया है। क्या यह प्राकतिक कानून का उल्लंघन नहीं है। सिंह ने कहा कि कानून के अनुसार पुनरीक्षित पेंशन के साथ ही पुनरीक्षित ग्रेच्युटी का भुगतान होना चाहिए था। भाजपा विधायक अमरेंद्र प्रताप सिंह ने भी कर्मियों के समर्थन में बात कही।

सदस्यों के प्रश्न के जवाब में उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि छठे वेतन पुनरीक्षण आयोग की पेंशन और ग्रेच्युटी के संबंध में अनुशंसाओं को अलग अलग लागू किया गया है। इस कारण यह अंतर है।

मोदी ने कहा कि पेंशन पुनरीक्षण की अधिसूचना एक अप्रैल 2007 से लागू हुई, जबकि ग्रेच्युटी पुनरीक्षण 23 सितंबर 2009 से लागू की गयी है। यही कारण है कि एक अप्रैल 2007 से 22 सितंबर 2009 की अवधि के दौरान अवकाश ग्रहण करने वाले कर्मियों को ग्रेच्युटी के रूप में 10 लाख रुपए नहीं मिल पाये हैं।

भाजपा विधायक सिंह ने सरकार से मांग की कि सरकार को संबंधित अवधि में सेवानिवृत्त कर्मियों को ग्रेच्युटी भुगतान कर देना चाहिए। यह राशि कितनी है, जिसे सरकार को बताना चाहिए। मोदी ने कहा कि एक अप्रैल 2007 से 22 सितंबर 2009 की अवधि की ग्रेच्युटी की राशि बहुत बडी़ है। अभी इसका मेरे पास आंकड़ा नहीं है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के तर्ज पर वेतन आयोग की सिफारिशों को राज्य सरकारें अपनी-अपनी वित्तीय स्थिति को देखते हुए लागू करती हैं। बिहार ने भी केंद्रीय आयोग की कुछ सिफारिशों को माना है, लेकिन हूबहू केंद्र का तरीका अपनाना राज्य के वित्तीय हित को देखते हुए सही नहीं होगा। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा में प्रमुख विपक्षी दल राजद के अख्तएल इमान, ललित कुमार यादव ने भी अन्य सदस्यों की तरह संबद्ध अवधि के कर्मियों को ग्रेच्युटी भुगतान की मांग की।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सेवानिवृत्त कर्मियों को 10 लाख रुपए ग्रेच्युटी की मांग