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कंपनी कानूनों का विशेषज्ञ कंपनी सेक्रेटरी

कंपनी कानूनों का विशेषज्ञ कंपनी सेक्रेटरी

एक कंपनी सेक्रेटरी कंपनी की कानूनी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालने का काम करता है। यदि इस क्षेत्र में रुचि है तो आप भी बन सकते हैं सीएस। कैसे, बता रही हैं प्रियंका कुमारी

उदारीकरण के दौर में देश में निजी कंपनियों का जाल-सा बिछ गया है। इन कंपनियों को सफलता के मुकाम पर पहुंचाने में कंपनी सेक्रेटरी की भूमिका अहम है। आज जो भी कंपनी 5 करोड़ या इससे अधिक का बिजनेस कर रही है, उसके लिए एक पूर्णकालिक सचिव रखना अनिवार्य कर दिया गया है। स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने की कतार में खड़ी कंपनियां भी बिना इसके आगे नहीं बढ़ सकतीं। इन्हें एक पूर्णकालिक कंपनी सचिव रखना अनिवार्य हो गया है। देश में ऐसी सभी संस्थाओं को, जिनका संचालन बोर्ड, काउंसिल या एसोसिएशन, फेडरेशन, अथॉरिटी या आयोग के जरिए हो  रहा है, ऐसे सक्षम व्यक्ति की तलाश रहती है, जो कंपनी सचिव की योग्यता से लैस हो। एक कंपनी सचिव कॉरपोरेट गवर्नेस और सेक्रेटेरियल सर्विसेज को देखने से लेकर कॉरपोरेट कानून, फाइनेंशियल मार्केट सर्विस और मैनेजमेंट सर्विस जैसे कई तरह के काम संभालता है।

कंपनी की प्रशासनिक जिम्मेदारियों को संभालने का काम आमतौर पर सीएस यानी कंपनी सेक्रेटरी ही करता है। कंपनी में कानून का पालन हो रहा है या नहीं, उसका विकास किस दिशा में हो रहा है, इसे सेक्रेटरी ही देखता है। उसे लॉ, मैनेजमेंट, फाइनेंस और कॉरपोरेट गवर्नेस जैसे अनेक विषयों की जानकारी रखनी होती है। वह किसी कंपनी के बोर्ड ऑफ गवर्नेस, शेयरधारकों, सरकार और अन्य एजेंसियों को जोड़ने वाली कड़ी है। कॉरपोरेट लॉ, सुरक्षा कानून, कैपिटल मार्केट और कॉरपोरेट गवर्नेस का जानकार होने की वजह से सीएस कंपनी का आंतरिक कानूनी विशेषज्ञ होता है। वह कॉरपोरेट प्लानर और रणनीतिक मैनेजर का काम भी करता है।

वित्तीय बाजार में वह कई काम में मददगार होता है, जैसे पब्लिक इश्यू, लिस्टिंग और सिक्योरिटीज मैनेजमेंट, टैक्सेशन सर्विसेज और अंतरराष्ट्रीय व्यापार। मैनेजमेंट सर्विस में स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और पब्लिक रिलेशन, मानव संसाधन प्रबंधन और सूचना तकनीक में कंपनी सचिव की भूमिका अहम है।

ऐसे अहम पद पर काम करने वाले व्यक्ति को कंपनी सचिव बनने के लिए एक कड़ी परीक्षा और अभ्यास से गुजरना जरूरी है। इस क्षेत्र में आने से पहले उसे कंपनी सचिव का कोर्स करना होता है। यह कोर्स पूरे देश में जो संस्था कराती है, उसका नाम है दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया।

दाखिले की प्रक्रिया
इंस्टीटय़ूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया देश में विभिन्न जगहों पर स्थित सेंटरों के जरिए तीन स्तरीय कोर्स कराता है। कंपनी सेक्रेटरी बनने के दो रास्ते हैं, पहला 12वीं के बाद और दूसरा स्नातक के बाद। 12वीं पास छात्र को तीन स्तरीय कोर्स करना होता है। पहले स्तर पर फाउंडेशन, दूसरे स्तर पर एग्जिक्यूटिव प्रोग्राम और तीसरे स्तर पर प्रोफेशनल प्रोग्राम होता है। फाउंडेशन कोर्स की अवधि 8 माह की है। स्नातक पास छात्र को दो स्तरीय कोर्स करना होता है। उसे फाउंडेशन की जरूरत नहीं पड़ती।
 
सीएस कोर्स में दाखिला पूरे साल खुला रहता है। इसके लिए प्रवेश परीक्षा या साक्षात्कार नहीं होता, सिर्फ रजिस्ट्रेशन कराना ही काफी है। साइंस, आर्ट्स या कॉमर्स, सभी विषय के छात्र इसमें आ सकते हैं। फाइन आर्ट्स के छात्र को दाखिला नहीं दिया जाता। इससे जुड़ी संस्था पत्रचार माध्यम से छात्रों को प्रशिक्षित करती है।

अध्ययन के लिए 24 घंटे और सातों दिन ऑनलाइन पोर्टल भी खुला रहता है। संस्थान के पास ओरल कोचिंग क्लास कराने का भी विकल्प खुला है। यहां हिन्दी और अंग्रेजी, दोनों माध्यमों में पढ़ाई होती है। परीक्षा भी दोनों माध्यमों में दी जा सकती है।
 
दाखिले का कार्यक्रम
कोर्स में दाखिला लेने वालों के लिए परीक्षा साल में दो बार जून और दिसम्बर में होती है। उदाहरण के तौर पर अगर आपको फाउंडेशन प्रोग्राम के तहत दिसम्बर में आयोजित होने वाली परीक्षा में शामिल होना है तो इसके लिए 31 मार्च तक रजिस्ट्रेशन कराना होगा। जून की परीक्षा में शामिल होने के लिए 30 सितम्बर तक रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। इसी तरह एग्जिक्यूटिव प्रोग्राम के लिए दिसम्बर में होने वाली परीक्षा के लिए 28 फरवरी तक और अगले साल जून की परीक्षा के लिए एक वर्ष पहले 31 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है। रजिस्ट्रेशन से परीक्षा की तिथि के बीच कम से कम 9 माह का गैप होना जरूरी है।

फीस कितनी
फाउंडेशन कोर्स की फीस 3600 रुपये, एग्जिक्यूटिव प्रोग्राम में कॉमर्स छात्रों के लिए 7000 और गैर कॉमर्स छात्रों के लिए 7750 और प्रोफेशनल कोर्स की फीस 7500 रुपये है।

फैक्ट फाइल

मुख्य संस्थान
आईसीएसआई हाउस, 22, इंस्टीटय़ूशनल एरिया, लोदी रोड, नई दिल्ली वेबसाइट:  www.icsi.edu

संस्थान
दि इंस्टीटय़ूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया, सी 37, सेक्टर 62, नोएडा

अवसर कहां
कंपनी सेक्रेटरी की डिग्री हासिल करने वाला छात्र रोजगार के रूप में निजी प्रैक्टिस शुरू कर सकता है। पांच करोड़ से ऊपर के शेयर वाली कंपनी को एक ऐसा पूर्णकालिक कंपनी सेक्रेटरी रखना जरूरी होता है, जो आईसीएसआई का सदस्य भी हो। बैंक और वित्तीय संस्थाओं में ऐसे छात्रों के लिए काम करने के ढेरों अवसर हैं। कंपनी के काम में सीएस आज ज्यादातर संस्थानों की जरूरत बन गया है।
 
भारत में ही नहीं, विदेशों में भी जैसे अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड, सिंगापुर, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया और मध्य-पूर्व अफ्रीका के देशों में कंपनी सेक्रेटरी के लिए काम के अवसर हैं। ग्लोबलाइजेशन के दौर में कंपनियों को ऐसे दक्ष लोगों की खासी जरूरत है, जो कंपनी से जुड़े कानून और उसे इस्तेमाल की तरकीब जानते हैं। सीएस कोर्स विभिन्न विश्वविद्यालयों में पीएचडी कोर्स में दाखिले के लिए स्वीकृत है। आईसीएसआई कॉरपोरेट गवर्नेस में पोस्ट मेम्बरशिप क्वालिफिकेशन कोर्स भी कराती है।
 
लोन
इंस्टीटय़ूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया अपने छात्रों को पुरस्कार और मेरिट स्कॉलरशिप देता है। यहां आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों को सहायता भी दी जाती है। विभिन्न बैंक शिक्षा ऋण के तहत भी कुछ शर्तो पर लोन प्रदान करते हैं। हालांकि फीस की रकम इतनी बड़ी नहीं है कि छात्रों को लोन की जरूरत पड़े।

वेतनमान
कोर्स पूरा करने वाले छात्रों के लिए संस्थान हर साल प्लेसमेंट का कार्यक्रम आयोजित करता है। इसमें जरूरत के हिसाब से छात्रों के चयन के लिए बैंक, सरकारी और निजी सेक्टर की कंपनियां आमतौर पर साक्षात्कार लेने आती हैं। हाल के दिनों में कंपनी सेक्रेटरी का पैकेज सालाना 3 से 5 लाख तक का रहा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पैकेज इससे अधिक होता है।

कंपनी सेक्रेटरी कोर्स में क्या है?
कंपनी सेक्रेटरी कोर्स के तहत फाउंडेशन में चार पेपरों की तैयारी करनी होती है। इसमें अंग्रेजी और बिजनेस कम्युनिकेशन, अर्थशास्त्र व सांख्यिकी, फाइनेंशियल अकाउंटिंग तथा बिजनेस लॉ व मैनेजमेंट एलिमेंट जैसी चीजों के बारे में बताया जाता है।

एग्जिक्यूटिव कोर्स में छह पेपर पढ़ाए जाते हैं। इनमें जनरल और कमर्शियल लॉ, कंपनी अकाउंट्स, कॉस्ट एंड मैनेजमेंट अकाउंटिंग, टैक्स लॉ आदि के बारे में बताया जाता है।  कंपनी लॉ, आर्थिक और श्रम कानून, सुरक्षा से जुड़े कानून आदि के बारे में बताया जाता है।
 
एग्जिक्यूटिव कोर्स को पूरा करने के बाद प्रोफेशनल प्रोग्राम में अलग-अलग मॉडयूल्स में 8 पेपरों की तैयारी करवाई जाती है। इसमें कंपनी सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस, ड्राफ्टिंग, फॉरेक्स मैनेजमेंट, स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट, एडवांस्ड टैक्स लॉ एंड प्रैक्टिस, गवर्नेस, बिजनेस एथिक्स आदि के बारे में बताया जाता है।
 
एग्जिक्यूटिव और प्रोफेशनल परीक्षा पास करने के बाद छात्र को प्रैक्टिकल और मैनेजमेंट ट्रेनिंग के लिए जाना पड़ता है। इसके बाद ही उसे कंपनी सेक्रेटरी की योग्यता प्रदान की जाती है।
 
एग्जिक्यूटिव प्रोग्राम या प्रोफेशनल प्रोग्राम पूरा करने के बाद छात्र को 15 माह किसी कंपनी के तहत ट्रेनिंग प्रोग्राम करना होता है। इस दौरान उसे कंपनी द्वारा स्टाइपेंड भी दिया जाता है। इसके अलावा 15 दिन की किसी स्पेशलाइज्ड एजेंसी में ट्रेनिंग भी होती है।
 
सीएस प्रोफेशनल प्रोग्राम पूरा करने के बाद छात्र अपने नाम के आगे एसोसिएट मेम्बर के रूप में संस्थान में अपना रजिस्ट्रेशन करा सकता है।

सक्सेस स्टोरी
सीएस बनने की ठान ली थी
गिरीश नारंग, सीएस
उपाध्यक्ष, रूइया

मैं 12वीं के बाद ही करियर की तलाश में जुट गया था। इसी के चलते मैंने कंपनी सेक्रेटरी कोर्स में रजिस्ट्रेशन करवाया था। 1998 में कोर्स पूरा करने के बाद ट्रेनिंग हुई। 2000 में कंपनी सेक्रेटरी का प्रमाणपत्र मिल गया। डिग्री मिलने के बाद कुछ समय तक एक कंपनी में काम किया।

इसके बाद खुद की प्रैक्टिस शुरू कर दी। आज की तारीख में कोलकाता की एक कंपनी रूइया का उपाध्यक्ष हूं। इसके अलावा कई अन्य जगहों पर सलाहकार की भूमिका निभाता रहा हूं।
 
जितने भी मर्जर होते हैं, उनका कानूनी दस्तावेज एक सीएस ही तैयार करता है। आज के दौर में एमबीए और सीए की तरह कंपनी सेक्रेटरी का भी महत्वपूर्ण रोल है। एमबीए डिग्री धारक जहां कंपनी के वित्तीय और कमर्शियल मामले को देखता है, वहीं सीएस कंपनी का कानूनी पहलू देखता है। दोनों कंपनी में एक-दूसरे के पूरक हैं। एक के बिना दूसरे का काम नहीं चल सकता। न ही विकास कर सकते हैं। जहां तक वेतन का मामला है, इसमें काफी अलग-अलग स्तर हैं। अनुभव और प्रोफाइल के हिसाब से चीजें तय होती हैं।
 
इस पेशे में काम से संतुष्टि भी मिलती है। कानून समय-समय पर बदलते हैं। उनके साथ खुद को अपडेट रखने में नयेपन का बोध होता है। जीवन में कुछ नया सीखने को भी मिलता है।

एक्सपर्ट व्यू
सीएस है कॉरपोरेट गवर्नेस का मुख्य स्तंभ
नेसार अहमद
अध्यक्ष, द इंस्टीटय़ूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया

सीएस का कोर्स करने के बाद करियर की संभावनाएं किस तरह की हैं?
कंपनी अधिकारी के रूप में कॉरपोरेट लॉ में इस कोर्स के छात्रों के लिए जगह-जगह अवसर हैं। वे कंपनी के प्रिंसिपल अधिकारी हैं। नया कंपनी बिल, जो संसद में लंबित है, के अंतर्गत सीएस को महत्वपूर्ण प्रबंधकीय पद पर रखा गया है। सिक्योरिटी लॉ के तहत भी बाजार से पूंजी उगाहने पर सीएस की जरूरत है। वह कम्पाइल अधिकारी होगा।
 
फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट में भी सीएस प्रिंसिपल अधिकारी है। एफडीआई और विदेशों से लेन-देन जैसे काम के लिए सीएस ही सर्टिफिकेशन देगा। उद्योग जगत में सीएस को गवर्नेस प्रोफेशनल का दर्जा दिया गया है। कॉरपोरेट गवर्नेस में वह मुख्य गेटकीपर के रूप में काम करता है।
 
सीएस बनने के लिए किस तरह के हुनर या गुण की जरूरत है?
यहां पांच बातों को ध्यान में रखना होगा। इसे आचरण में उतारना होगा। पहला इंटिग्रिटी, इसमें सत्यनिष्ठा और ईमानदारी को हर हाल में बरकरार रखना होगा। दूसरा एथिक्स, यानी नीति पर चलना होगा। तीसरा विश्वसनीयता, संस्थान के प्रति इसे बनाए रखना होगा। चौथा ऑनरशिप, यानी जो काम कर रहे हैं, उसकी जिम्मेदारी लेनी होगी और पांचवां है स्टेक होल्डर के प्रति सोचना। रात-दिन आपको अपने स्टेक होल्डर की चिंता करनी होगी। उसके हितों का ख्याल रखना होगा।

कंपनी सेक्रेटरी के काम में किस तरह की चुनौतियां हैं?
जो कानून बदल रहे हैं, उनके प्रति खुद को अपडेट रखना होगा। टेक्नोलॉजी के साथ भी अपडेट रहना होगा। एक और बात यह कि प्रोफेशनल्स के बीच स्वस्थ प्रतियोगिता निभानी होगी। इसको स्वीकार करके ही आगे सर्विस दे सकते हैं। यह कोर कंपीटेंस 15 से 20 फीसदी के बीच होती है। कम लागत में बेहतर सेवा भी एक बड़ी चुनौती रहती है।

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