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एक वकील की तरह सोचने लगी हूं

अनुभूति गोयल तब सिर्फ छठी कक्षा में थीं, जब अच्छी पढ़ाई के चलते उनके पापा ने उन्हें दिल्ली भेज दिया। अंग्रेजी में हाथ तंग होने की वजह से स्कूल में दूसरे छात्रों से हिचकती और बचती अनुभूति ने जल्द ही अपने रास्ते खुद बना लिए। फिर क्या था, पहले हंसराज कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री और फिर चार्टर्ड अकाउंटेंसी (सीए) की पढ़ाई के बाद अनुभूति ने कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) के प्रोफेशनल कोर्स में दूसरा स्थान हासिल किया। चलिए एक नजर डालते हैं अनुभूति गोयल की सफलता के ग्राफ पर रुचि गुप्ता के साथ

उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर में पैदा हुई अनुभूति गोयल के पिता ने अपने बच्चों के लिए बेहतर शिक्षा का सपना देखा। इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने अनुभूति को छोटी उम्र में ही दिल्ली भेज दिया। अनुभूति के पिता एक पैकेजिंग कंपनी में अकाउंट्स मैनेजर हैं और यह उनकी इच्छा ही थी, जिसे पूरा करने के लिए अनुभूति ने बेहद मेहनत की। दिल्ली में अनुभूति की अभिभावक की भूमिका निभाई उनकी मौसी ने।

मेरठ की एक औसत छात्र दिल्ली के पब्लिक स्कूल में प्रवेश तो पा गई, लेकिन अंग्रेजी पढ़ने में दिक्कत के चलते वह खुद को असहज महसूस करती। ऐसे में उनकी अंग्रेजी की अध्यापिका ने उनका खूब साथ दिया।
अब तक एक औसत छात्र के रूप में देखी जाने वाली अनुभूति ने दसवीं में 93 फीसदी अंक प्राप्त किए। अब अनुभूति में आत्मविश्वास पैदा हुआ और उन्होंने फिर मुड़ कर पीछे नहीं देखा। उनका कहना है, ‘दसवीं के मेरे रिजल्ट ने मेरेआत्मविश्वास को और बढ़ा दिया। मेरे अंक अब हमेशा ऊपर की ओर ही देखते थे। मुङो लगता है कि एक औसत छात्र भी नामुमकिन काम कर सकता है।’ 12वीं की बोर्ड परीक्षा में अनुभूति ने 90 प्रतिशत अंक हासिल किए और उसके बाद कॉमर्स के लिए उन्होंने हंसराज कॉलेज में एडमिशन ले लिया।

ग्रेजुएट और एक क्वालीफाइड चार्टर्ड अकाउंटेंट यानी सीए होने के बावजूद अनुभूति ने कंपनी सेकेट्ररी की पढ़ाई करने के बारे में सोचा। उन्होंने न सिर्फ सोचा, बल्कि दूसरा स्थान प्राप्त कर खुद को साबित भी किया।

उनका कहना है, ‘मैं हमेशा से यह चाहती थी कि मैं जो भी करूं, उसे एक विशेषज्ञ की तरह करूं। मुझे लगा कि सीएस की पढ़ाई कॉरपोरेट सेटअप के बारे में मेरी जानकारी को और बढ़ाएगी। दिलचस्प बात यह है कि सीए और सीएस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। साथ ही मुङो लगता है कि अब मैं एक वकील की तरह सोचती हूं। किसी भी दूसरी कानूनी पढ़ाई की ही तरह सीएस में आप सिविल और क्रिमिनल कानूनों के बारे में पढ़ते हैं।’

कोचिंग क्लासेज जरूरी नहीं
माता-पिता की गैर-मौजूदगी में अनुभूति के लिए अगर कोई सहारा था तो वो थीं उनकी मौसी, जो उनकी सबसे बड़ी ताकत भी साबित हुईं। वह अपनी इसी ताकत को अपनी जीत का श्रेय भी देती हैं। उनका कहना है, ‘मम्मी-पापा के बाद अगर कोई मेरी ताकत है तो वो हैं मेरी मौसी। उन्होंने मुझे कभी मम्मी-पापा का यहां न होना महसूस नहीं होने दिया।’ यहां तक कि मौसी की प्रेरणा और उनके विश्वास का ही परिणाम था कि कोचिंग क्लासेज से दूर रही अनुभूति ने खुद से पढ़ाई कर सीएस परीक्षाओं में सफलता हासिल की। उनका कहना है, ‘मैं उन छात्रों की सोच से इत्तेफाक नहीं रखती, जो मानते हैं कि कोचिंग क्लासेज सफलता का इकलौता साधन हैं। वहां ऐसा कुछ खास नहीं है, जो आप नहीं कर सकते। अगर एक छात्र पेपर्स से चार महीने पहले से ही दिन में 6 घंटे लगातार पढ़ाई करता है तो सभी विषयों में पास होना कोई बड़ी बात नहीं है।’

सीएस के रूप में अपना भविष्य देख रहे छात्रों को अनुभूति यही सलाह देना चाहती हैं, ‘कंपनी सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस, ड्राफ्टिंग, प्लीडिंग्स एंड अपीयरेंसेज, स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट, अलाएंसेज एंड इंटरनेशनल ट्रेड, एडवांस टैक्स लॉ एंड प्रैक्टिस जैसे विषयों पर अधिक समय देना चाहिए। मैं खुद रोज इन विषयों को दो से तीन घंटे का वक्त देती रही हूं। परीक्षाओं से कुछ पहले की तैयारियों में जरूरी है कि आप हर विषय को कम से कम दो दिन रिवाइज करें।’

युवाओं के लिए अनुभूति का संदेश यह है कि सफलता का मतलब पूरी लड़ाई जीतना है, न कि हर मोर्चे पर जीतना। जरूरी नहीं है कि आप हर जगह कामयाब हों, लेकिन आप अंत में कामयाब हैं या नहीं, यह जरूरी है। साथ ही आपका खुद पर विश्वास होना बेहद जरूरी है।

फैक्ट फाइल
नाम: अनुभूति गोयल
जन्म स्थान: मेरठ, उत्तर प्रदेश
स्कूली शिक्षा: डीएवी पब्लिक स्कूल,  दिल्ली
ग्रेजुएशन: हंसराज कॉलेज, दिल्ली
सफलता: क्वालीफाइड सीए
 सीएस प्रोफेशनल कोर्स में दूसरा स्थान

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