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सम्मिलित चिकित्सा सेवा परीक्षा (सीएमएस)- 2012: बचें नेगेटिव मार्किंग से

आवेदन की अं.ति.- 02 अप्रैल 2012
परीक्षा की तिथि- 17 जून 2012

देश में चिकित्सा सेवाओं का भविष्य हमेशा से बेहतर रहा है, इसीलिए साइंस साइड के काफी छात्रों का सपना चिकित्सा क्षेत्र में अपना करियर संवारने का होता है। इस सपने को साकार करने के लिए समय-समय पर कई मौके आते रहते हैं। इन्हीं में से एक है सम्मिलित चिकित्सा सेवा परीक्षा (सीएमएस)। इस परीक्षा का आयोजन यूपीएससी द्वारा किया जाता है। इसमें सफलता के बाद केंद्र सरकार की प्रमुख सेवाओं जैसे रेलवे, ऑर्डिनेंस फैक्ट्री, हेल्थ सर्विस, सेंट्रल हेल्थ सर्विस और एमसीडी आदि में डॉक्टरों अथवा चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति की जाती है। सीएमएस 2012 के लिए फॉर्म मिलने शुरू हो गए हैं तथा इसकी परीक्षा 17 जून को निर्धारित की गई है।

एमबीबीएस के बाद अवसर
इसमें वही उम्मीदवार आवेदन कर सकते हैं, जिन्होंने किसी मान्यताप्राप्त संस्थान से एमबीबीएस की परीक्षा पास की हो अथवा अंतिम वर्ष की परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हों। इसके लिए अधिकतम आयु 32 वर्ष होनी चाहिए। आरक्षित श्रेणी में आने वाले उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के तहत ही छूट मिलती है।

परीक्षा दो चरणों में
सीएमएस परीक्षा का आयोजन लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर होता है। लिखित परीक्षा भी दो पेपरों में बंटी होती है। प्रत्येक पेपर दो घंटे का होता है। पेपर एक जनरल एबिलिटी, जनरल मेडिसिन व पेडिएट्रिक पर होता है, वहीं पेपर दो सजर्री, गायनोकोलॉजी एवं सोशल मेडिसिन पर आधारित होता है। इसमें सफल होने के बाद पर्सनेलिटी टेस्ट और साक्षात्कार का नंबर आता है। परीक्षा एक ही दिन आयोजित की जाती है।

ऑब्जेक्टिव/मल्टीपल चॉइस प्रश्न
दोनों ही पेपर क्रमश: 250-250 अंकों के होते हैं। प्रत्येक पेपर में कुल 120-120 प्रश्न होते हैं तथा इनका माध्यम सिर्फ अंग्रेजी होता है। प्रश्न ऑब्जेक्टिव और मल्टीपल चॉइस के होते हैं। जब तक छात्रों के बेसिक क्लियर नहीं होंगे, तब तक वे इन प्रश्नों का उत्तर नहीं दे सकेंगे, इसलिए रटने की बजाए वे किसी भी विषय की आधारभूत जानकारी को समझने पर जोर दें।

सिलेबस का दायरा विस्तृत
दोनों ही पेपरों का सेलेबस काफी विस्तृत होता है तथा उनका स्तर भी काफी हाई होता है, इसलिए छात्रों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपनी तैयारी भी उसी के अनुरूप करें। प्रत्येक पेपर के जो भी सेक्शन हैं, उनके अंतर्गत व्यापक रूप से विषय दिए गए हैं। ऐसे में संभावना है कि प्रश्न कहीं से भी पूछे जा सकते हैं। सबसे पहले उम्मीदवार अपना सिलेबस स्कैन करें कि उन्हें क्या-क्या पढ़ना है, फिर उसी हिसाब से आगे पढ़ना शुरू करें।

टाइम मैनेजमेंट जरूरी
इस परीक्षा के लिए टाइम मैनेजमेंट और प्लानिंग बहुत जरूरी है। छात्र शुरू से ही अपनी तैयारी को एक प्लानिंग के तहत आगे ले जाएं तो अच्छा रहेगा। तैयारी पेपर विशेष के आधार पर हो तथा जहां पर खुद को कमजोर महसूस कर रहे हों, उसे अंडरलाइन कर लें अथवा एक जगह नोट करते जाएं। बाद में समय मिलने पर किसी एक्सपर्ट से इस पर मदद लें।

टाइम मैनेजमेंट करते समय यह ध्यान दें कि प्रत्येक पेपर को बराबर का प्रतिनिधित्व मिल रहा है कि नहीं। जहां खुद को कमजोर महसूस कर रहे हैं, उस पर अपना समय कुछ बढ़ा सकते हैं।

सैंपल पेपर हल करें
परीक्षा के जब दो महीने रह जाएं तो उम्मीदवार सैंपल पेपर अथवा पुराने प्रश्न-पत्रों को हल करें। वे यह काम तभी कर पाएंगे, जब सिलेबस पर उनकी मजबूत पकड़ होगी। सिलेबस क्लियर हो जाने के बाद सैंपल पेपर अथवा पुराने प्रश्न पत्र हल करने का फायदा यह होगा कि वे एक निश्चित समय के अंतराल में प्रश्नों का उत्तर दे सकेंगे। अंतिम दिनों में छात्र यह कोशिश करें कि उन्हें प्रतिदिन एक सैंपल अथवा ओल्ड पेपर जरूर हल करना है।

नेगेटिव मार्किंग से सावधान
इस परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का प्रावधान है। गलत उत्तर दिए जाने पर एक तिहाई अंक (0.33) काट लिया जाएगा। छात्र उन्हीं प्रश्नों का उत्तर दें, जिनका जवाब उन्हें सही से मालूम हो। जिनका उत्तर नहीं मालूम, उन्हें छोड़ कर आगे बढ़ जाएं। बाद में समय मिलने पर उन्हें दोबारा देख लें।

पर्सनेलिटी टेस्ट व साक्षात्कार
लिखित परीक्षा पास करने के बाद ही उम्मीदवार को पर्सनेलिटी टेस्ट के लिए बुलाया जाता है। इस सेक्शन के लिए कुल 200 अंक (पर्सनेलिटी टेस्ट के लिए 100 व साक्षात्कार के लिए 100 अंक) निर्धारित किए गए हैं। इसमें समसामयिक विषयों, एकेडमिक करियर, देश-विदेश की हलचलों और विभिन्न विषयों पर उनका आकलन पूछा जाता है।

तैयारी के आवश्यक टिप्स

तैयारी एक निश्चित प्लानिंग के तहत ही करें 
भ्रामक स्टडी मेटीरियल से बचें 
दिक्कत हो तो एक्सपर्ट की मदद लें
महत्वपूर्ण भागों को अंडरलाइन करें
रटने की बजाए समझने की कोशिश करें 
सैंपल/ओल्ड पेपर अवश्य हल करें
अपना मनोबल बनाए रखें

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