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‘आशियाना’ नहीं उतरा जमीन पर

शहर में अपना भी एक ‘आशियाना’ हो। बहुत सारे लोगों का यह सपना हकीकत की जमीन पर नहीं उतर रहा। राज्य में केंद्र सरकार द्वारा की गई कोशिश कागजों तक सिमट कर रह गई। एफोरडेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप (एएचपी) योजना राज्य में लागू नहीं हो पाई। इसकी मुख्य वजह योजना का प्रचार-प्रसार नहीं होना माना जा रहा है।

नगर विकास विभाग से मिली जानकारी के अनुसार एएचपी योजना केंद्र प्रायोजित है। जेएनएनयूआरएम के तहत शहरी क्षेत्र के स्लम में रहने वाले लोग, गरीब और मध्यमवर्गीय लोगों के लिए कई तरह की आवास योजनाएं हैं।

इनमें से एक योजना मध्यमवर्गीय लोगों के लिए एएचपी है। इसके तहत केंद्र सरकार किसी भी व्यक्ति को छोटा मकान बनाने के लिए 50 हजार रुपये तक सब्सिडी व न्यूनतम ब्याज पर बैंक से ऋण उपलब्ध कराती है। हाउसिंग ग्रुप बना कर या फिर व्यक्तिगत तौर पर भी इस योजना का लाभ उठाया जा सकता है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार ने एएचपी के लिए दिशा-निर्देश जारी किया है। इसके तहत तीन तरह के भवन निर्माण ईडब्ल्यूएस, एलआईजी और एमआईजी भवन के निर्माण के लिए सब्सिडी व कम दर पर ब्याज मुहैया कराया जाता है।

आवेदक को सरकार द्वारा दिशा-निर्देश और मापदंड को पूरा करते हुए योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन देना पड़ता है। को सरकार द्वारा तय मानक को पूरा करना पड़ता है। नगर विकास विभाग के सचिव नितिन मदन कुलकर्णी ने कहा कि इस योजना के तहत नेशनल हाउसिंग बैंक के जरिए लोगों को राशि मुहैया कराई जाती है।

योजना के तहत आवेदन के लिए फार्म सभी नगर निकाय को भेज दिया गया था। उन्हें कहा गया था कि वह लोगों के बीच इस योजना को लेकर जाएं और प्रत्साहित करें। कुलकर्णी ने कहा कि प्रचार-प्रसार की कमी के कारण योजना जमीन पर नहीं उतर सकी है। अभी तक इसके तहत एक भी आवेदन विभाग के पास नहीं आया है।

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