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बेमतलब का बोझ

हम जो जीवन जी रहे हैं, क्या वह सर्वश्रेष्ठ है? इस पर विचार करते ही आप अधूरे सपनों, अधूरी कामनाओं और अब तक क्या खोया-पाया का आकलन करने में जुट जाएंगे। लेकिन बात उसकी नहीं हो रही। आप जो जीवन जी रहे हैं, उसमें आप कितने उन्मुक्त और कितने भारहीन हैं, सवाल इसका है। दरअसल ज्यादातर लोगों के कंधों पर तनाव का भारी गट्ठर मौजूद रहता है, जो उन्हें स्वाभाविक तरीके से जीने नहीं देता। मनोवैज्ञानिक फ्रेड बुशमैन कहते हैं, यह बोझ स्वाभाविक नहीं। यह केवल इसलिए कंधे पर सवार है कि हममें प्रकृति, तंत्र और आस-पास के परिवेश की कार्यप्रणाली की समझ की कमी और अयोग्यता है। यह अयोग्यता कैसे आई, इस पर वह कहते हैं, यह तनाव के प्रति हमारे अतिथिगत व्यवहार से आई है। हम छोटी-छोटी चीजों से संतुष्ट नहीं होते और इस तरह तनाव के बोझ को खुद ही आमंत्रण देते हैं। सुजैन जेफर्स ने एक शानदार किताब लिखी है ‘फील द फीयर ऐंड डू एट एनी वे।’ इस किताब में वह कहती हैं, तनाव का गट्ठर जिन वजहों से लोगों ने अपने कंधों पर लादा है, वे वजहें उतनी महत्वपूर्ण नहीं होतीं, लेकिन प्रभावशाली इतनी होती हैं कि हमारे दिमाग पर उनका जबर्दस्त असर होता है।

सही मायनों में हमने भारहीन रहने की कीमत नहीं समझी है, इसलिए अपने जीवन की कद्र नहीं की, जो हमें मिला सबसे शानदार उपहार है। ओपरा विनफ्रे ने इसे समझा और लोगों को समझाने के लिए ‘लिव योर बेस्ट लाइफ’ कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने लोगों से सर्वश्रेष्ठ जीवन जीने का संकल्प ही नहीं लिया, बल्कि अपने कार्यक्रम के जरिये उन्हें दिशा भी दी। उन्होंने बताया, सर्वश्रेष्ठ जीवन का मतलब है एक उद्देश्य खोज लेना, अच्छा महसूस करना और अपने भीतर शांत होना। याद रखें, यह खोज बिल गेट्स के लिए भी उतनी ही मायने रखती है, जितनी एक गेटकीपर के लिए।

 

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  • Web Title:बेमतलब का बोझ