DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दूल्हे के घर बारात लेकर पहुंची दुल्हन

यह नजारा हर देखने वाले के लिए नया था सो जिसने देखा, आंखें टिकी की टिकी रह गईं। दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर पर खड़ी थी। लड़की को ऐसा इसलिए करना पड़ा क्योंकि बाइक के लिए लड़के के परिवारीजनों ने शादी से इनकार कर दिया था। दुल्हन की हिम्मत देखी तो ग्रामीण भी उसके पक्ष में हो गए।

नतीजतन गांव के मंदिर में उसकी लड़के से शादी कराई गई। देसही निवासी सुभाष जायसवाल की चार बेटियां और दो बेटे हैं। जड़ी बूटी बेचकर परिवार चलाने वाले सुभाष ने अपनी तीसरी बेटी इण्टर पास अंगिरा की शादी रामपुर कारखाना थाना क्षेत्र के ही रुस्तमपुर निवासी उमाशंकर के पांच बेटों में सबसे छोटे शैलेष जायसवाल से चार माह पहले तय की।

शादी की बात बड़े भाई राजू जायसवाल से हुई। खर्च के  लिए पांच हजार नकद और अंगूठी देने की बात पर जनवरी में शादी करने की बात तय हुई। समय नजदीक आया तो अंगूठी के अलावा सोने की चेन की डिमाण्ड भी होने लगी। बेटी के हाथ पीले करने के लिए सुभाष ने चेन भी खरीद दी।

शादी की तिथि 12 मार्च निश्चित होने और रिश्तेदारों, मित्रों में निमंत्रण कार्ड वितरित होने के बाद वर पक्ष से बाइक की मांग सुन सुभाष के होश उड़ गए। सुभाष उधेड़बुन में थे इसी बीच अंगिरा ने साफ कहा कि बाइक नहीं दी जाएगी।

इस पर नौ मार्च को लड़के पक्ष ने शादी करने से इनकार कर दिया। सुभाष कुछ लोगों के साथ रुस्तमपुर गांव पहुंचे और पूरी बात संभ्रान्त लोगों को बताई। ग्रामीणों ने लड़के को बुलवाया तो उसने कहा कि वह शादी करने को तैयार है लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं है कि वह बारात और डाल लेकर जा सके।

यह बात लड़की को पता चली तो वह लड़के के दरवाजे पर बारात लेकर आने को तैयार हो गई। सोमवार को वह परिवारीजनों और रिश्तेदारों के साथ शैलेष के गांव पहुंची। इसकी खबर शैलेष के घर पहुंची तो खुशी से झूमती उसकी भाभी सरोज देवी सज धजकर देवर के परिछावन के लिए निकल पड़ी।

गांव के बाहर रामजानकी मंदिर में जयमाला के बाद वैदिक मंत्रोच्चरण के साथ दोनों वैवाहिक बंधन में बंध गए। इस अनोखी शादी में गांव की सैक ड़ों महिलाएं भी गवाह बनीं। 

इन लोगों ने निभाई अहम भूमिका
दहेज को लेकर जब लगा कि शैलेष और अंगिरा की शादी नहीं हो पाएगी तो गांव के लोग आगे आए। अंगिरा के पिता सुभाष की आर्थिक दशा जानने के बाद गांव के मिथिलेश मिश्र, रामश्रृंगार मिश्र, विनोदशंकर मिश्र, अभयशंकर मिश्र, राममनोहर, राजेश मिश्र, राजेन्द्र पाण्डेय, ऋषिकेश मिश्र, रमेश सिंह, लक्ष्मण कुमार वर्मा आदि ने इस शादी को हर हाल में कराने का निर्णय लिया।

लड़के और लड़की वालों पर अधिक भार न पड़े इसका भी ख्याल रखा। लड़की के बारात लाने पर उसके साथ आए लोगों के नाश्ते और आवभगत से लेकर लगभग 400 लोगों के भोजन का इंतजाम इन्हीं लोगों की अगुवाई में किया गया था। लड़की के बारात लाने की हिम्मत और ग्रामीणों के इस शादी में निभाई गई भूमिका की चर्चा पूरे इलाके में है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दूल्हे के घर बारात लेकर पहुंची दुल्हन