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माया के फैसले से बसपाइयों में मायूसी

बसपा हाईकमान के निकाय चुनाव न लड़ने के फैसले पर उन बसपाइयों में मायूसी है जो विधानसभा चुनाव परिणाम से निराश होने के बाद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे है। वे हाईकमान के फैसले को सर्वोपरि मानते हुए चुप्पी नहीं तोड़ पा रहे हैं।

बसपा हाईकमान ने रविवार को लखनऊ में हुई बैठक में निकाय चुनाव न लड़ने का फैसला लिया है। पार्टी हाईकमान का कहना है कि वे इस बीच 2014 के लोकसभा चुनाव की तैयारी करेंगे। हाईकमान के इस फैसले से शहरी क्षेत्र में राजनीति चमकाने वाले बसपाई खुश नहीं है।

ये वे बसपाई हैं जिन्हें विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिली या फिर वे मेयर, पार्षद और चेयरमैन बनने का ख्वाब देख रहे थे। यह बात अलग है कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव के आकड़ों पर नजर डालें तो बसपा को सत्ता में रहते हुए भी अपेक्षिक वोट नहीं मिल पाए हैं।

इन वोटों में पार्टी का बेस वोट भी शामिल रहा। बसपा हाईकमान का फैसला है इस कारण वे खुलकर कुछ नहीं कह सकते। अब लोकसभा चुनाव के लिए दो साल का समय है। विधानसभा चुनाव में जनपद में खाता न खोल पाने वाली पार्टी के लिए एकमात्र लोकसभा सीट को हासिल करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ेगी।

बसपा के बेस वोट पर रहेगी नजर
अब सवाल इस बात का है कि शहरी क्षेत्र के बसपा के बेस वोट का क्या होगा? यह वोट किसी भी पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। इसलिए इस वोट को अपने पक्ष में करने के लिए गैर बसपा दल लक्ष्य बनाकर चलेंगे।

राजनीति के जानकार मानते है कि बसपा अभी शहरी क्षेत्र में पकड़ नहीं बना पाई है। उसका वोट बैंक गांवों में अधिक है। पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग फामरूला के बाद भी शहरी क्षेत्र में बसपा को उम्मीद के अनुसार वोट नहीं मिले।

एक नगर निगम, दो नगर पालिका और नौ नगर पंचायत
जनपद में अलीगढ़ नगर निगम के अलावा अतरौली और खैर नगरपालिका हैं। इसके अलावा छर्रा, कौड़ियागंज, पिलखना, जलाली, हरदुआगंज, इगलास, जट्टारी, बेसवां, विजयगढ़ नौ नगर पंचायत हैं। ये सभी क्षेत्र शहरी मतदाताओं से प्रभावित हैं।

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  • Web Title:माया के फैसले से बसपाइयों में मायूसी