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कारखानों में काम लगा तो खनक उठीं चूड़ियां

सुहागनगरी में पांच दिन बाद काम लगा तो कारखानों का सन्नाटा टूट गया। उत्पादन शुरू होते ही फैक्ट्रियों में चूड़ियों की खनक गूंज उठी। होली के त्यौहार बीतने पर पहले दिन कारखानों में काम जरूर लग गया, लेकिन सभी श्रमिक काम पर नहीं लौट सके। इस वजह से उद्यमियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
 
होली के बाद सोमवार को तड़के कारीगर कारखानों में पहुंच गये। उन्होंने अपने औजार सम्हाल कर उत्पादन शुरू कर दिया। मशीनों की गड़गड़ाहट के साथ जब श्रमिकों की चहलपहल गूंजी तो कारखानों में कई दिन से पसरा सन्नाटा टूट गया।

इसी के साथ धीरे-धीरे कारखानों में उत्पादन का पहिया घूमने लगा। उद्यमियों की मानें तो होली के बाद पहले दिन करीब 80 फीसदी चूड़ी कारखानों में काम जरूर लग गया। लेकिन कारीगरों की कमी रही। क्योंकि सभी श्रमिक अभी काम पर वापस नहीं लौटे। इस वजह से उद्यमियों को मण्डी से अतिरिक्त पारिश्रमिक देकर श्रमिकों का इंतजाम करना पड़ा।
 
चूड़ी उद्यमी हरीश अग्रवाल कहते हैं कि उद्योग की गाड़ी पटरी पर आने में अभी एक सप्ताह का समय और लग जायेगा। बताते चलें कि होली के त्यौहार पर पांच दिन श्रमिकों की छुटिटयों को चलते कारखानों में सन्नाटा पसरा रहा।

इस दौरान भटि्ठयों का टैम्परेचर मैंटेन रखने में हर रोज लाखों रुपये की गैस बेकार फुंकती रही। उत्पादन ठप रहने पर चूड़ी व कांच उद्योग को कई करोड़ रुपये की चपत लग गयी। नगर के प्रमुख उद्यमी ललतेश जैन कहते हैं कि यह घाटा तो हम लोगों को हर हाल में ङोलना होता है। क्योंकि होली का त्यौहार हर किसी के लिये महत्वपूर्ण होता है।

हालांकि इतना जरूर है कि छुटटी मिलने पर कारीगर कुछ दिन के लिये काम के प्रति लापरवाह हो जाते हैं। उनकी जेब में जब तक पैसा रहता है तब तक वे काम पर वापस लौटने की नहीं सोचते। त्यौहार के बाद कई दिन वे आराम करते हैं या फिर बेवजह रिश्तेदारियों में घूमते हैं। जब उनकी जेब खाली हो जाती है तब वे कारखाने का रुख करते हैं।

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