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दिल्ली में नो एंट्री तो लखनऊ ही सही

जनता की सेवा का मौका मिलना चाहिए। फिर चाहे माध्यम संसद हो या विधानसभा। जी हां, पिछले लोकसभा चुनाव में जनता द्वारा ठुकराए गए कई नेताओं ने हिम्मत नहीं हारी। नई दिल्ली में उनकी नो एंट्री हुई तो उन्होंने विधायक का चुनाव लड़ा।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसे राजनीतिकों की संख्या काफी रही जो कि सांसद नहीं बन सके लेकिन सोलहवीं विधान सभा में जरूर नजर आएंगे। आगरा जिले की फतेहपुरसीकरी लोकसभा सीट का उदाहरण काफी दिलचस्प है।

वर्ष 2009 के चुनाव में यहां मुख्य मुकाबले में रहे सभी प्रत्याशी अब जनप्रतिनिधि हो गए हैं। यहां से बसपा की सीमा उपाध्याय सांसद चुनी गईं। दूसरे स्थान पर रहे कांग्रेस के राज बब्बर फिरोजाबाद सीट का उप चुनाव जीत गए। शेष रहे महेंद्र अरिदमन सिंह अब सपा की टिकट पर बाह से और रघुराज शाक्य इटावा सदर सीट से विधायक निर्वाचित हो गए हैं।

आगरा के पड़ोसी जिले फिरोजाबाद में निवर्तमान नगर पालिकाध्यक्ष मनीष असीजा ने भी लोकसभा चुनाव लड़ा। उन्हें तैंतीस हजार से अधिक वोट मिले। अव वह सोलहवीं विधान सभा में भाजपा की टिकट पर निर्वाचित हुए हैं।

बीते लोकसभा चुनाव में अलीगढ़ में सपा प्रत्याशी जफर आलम की जीत के लिए कल्याण सिंह ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। तब जफर आलम सांसद नहीं बने सके। उन्होंने अलीगढ़ शहर सीट से विधान सभा का चुनाव लड़ा और जीते।

भाजपा के महेश शर्मा गौतमबुद्ध नगर लोकसभा सीट पर बसपा के सुरेंद्र नागर से पराजित हो गए थे। अब उन्हें नोएडा सीट से विधान सभा में पहुंचने का मौका मिल गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश से इतर लोकसभा चुनाव हारने वाले कुछ बड़े नाम भी विधायक बनने में सफल हो गए हैं।

कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी वर्ष 2009 में लखनऊ से चौथे स्थान पर रहीं थीं। अब उन्हें लखनऊ कैंट से विधान सभा में जाने का मौका मिला है। बाहुबली मुख्तार अंसारी वाराणसी में भाजपा के दिग्गज नेता मुरली मनोहर जोशी से परास्त हो गए थे लेकिन इस विधान सभा में वह मऊ से विधायक हैं।

इसके अलावा कैराना से भाजपा के हुकुम सिंह, मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा से भाजपा के कुंवर सर्वेश कुमार, कुंदरकी से सपा के मोहम्मद रिजवान, संभल से सपा के इकबाल मसूद, अमरोहा से सपा के महबूब अली, मेरठ के सरधना से भाजपा के संगीत सोम, किठोर से शाहिद मंजूर, गाजियाबाद की साहिबाबाद विधान सभा सीट से बसपा के अमरपाल, बरेली के नवाबगंज से सपा के भगवत शरण गंगवार, पीलीभीत से सपा के रियाज अहमद और खीरी के निधासन से भाजपा के अजय भी विधायक चुने गए हैं। बीते लोकसभा चुनाव में इन सभी नेताओं को शिकस्त मिली थी। 

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