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राज्यसभा चुनाव की अधिसूचना जारी, चुनाव प्रक्रिया शुरू

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की दस सीटों पर आगामी तीस मार्च को होने वाले द्विवार्षिक चुनावों की अधिसूचना सोमवार को जारी हो गई और इसके साथ ही नामांकन की भी प्रक्रिया शुरू हो गई।

इस चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) सर्वाधिक फायदे में रहेगी क्योंकि उसके कम से कम छह सदस्य चुने जाने तय है। पार्टी की ओर से पहले भी राज्यसभा सदस्य रहीं जया बच्चन, पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री
किरणमय नंदा, ब्रज भूषण तिवारी और नरेश अग्रवाल का नाम संभावित प्रत्याशियों में लिया जा रहा है। श्रीमती बच्चन को सपा ने पहले भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाया था लेकिन उनके मना करने के बाद मोहन सिंह को राज्यसभा भेजा गया।

उत्तर प्रदेश की कार्यवाहक मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती भी राज्यसभा जाएंगी और अब केन्द्र की राजनीति में अपनी भूमिका अदा करेंगी। बसपा अपने 80 विधायकों के कारण दो सीट ही जीतने की स्थिति में है।

राज्यसभा चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी और विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने कहा कि नामांकन पत्र 19 मार्च तक दाखिल होंगे। नामांकन पत्रों की जांच अगले दिन होगी और 22 मार्च को नाम वापस लिए जाएंगे। यदि आवश्यक हुआ तो तीस मार्च को सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक मतदान होगा और उसी दिन परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। उत्तर प्रदेश से दस सदस्यों का कार्यकाल आगामी दो अप्रैल को खत्म हो रहा है।

विधानसभा सचिवालय सूत्रों के अनुसार सपा नेताओं ने नामांकन पत्र के सात सेट खरीदे हैं। सपा सूत्रों का कहना है कि अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद ही पार्टी के राज्यसभा के लिए नामांकन पत्र दाखिल होंगे।

बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सुश्री मायावती विधान परिषद की सदस्यता से त्यागपत्र देंगी और बसपा का राजनीतिक आधार दिल्ली में रह कर बढाएंगी।

सुश्री मायावती 2003 में अपनी सरकार के पतन के बाद राज्यसभा की सदस्य बनी थी। चूंकि राज्य में अब सपा की सरकार का गठन 15 मार्च को हो जाएगा लिहाजा राजनीतिक गतिविधियां भी कुछ कम हो जाएंगी। संभवत: राज्य में राजनीतिक गतिविधि 2014 के लोकसभा चुनाव के आसपास ही शुरू होगी।

सुश्री मायावती अपने करीबी अधिकारी रहे शशांक शेखर सिंह को भी राज्यसभा भेज सकती हैं। सिंह राज्य के मंत्रिमंडलीय सचिव थे और बसपा की हार के साथ ही उन्होंने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था। भाजपा अपने 47 विधायकों के साथ एक सीट जीत सकती है।

कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) मिलकर दसवीं सीट जीत सकते हैं। जीत के लिए प्रथम वरीयता के 37 मतों की आवश्यकता होगी। राज्यसभा में कांग्रेस और भाजपा के बाद बसपा सबसे बडी पार्टी है। राज्यसभा में बसपा के 18 सदस्य है लेकिन इनमें पांच सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। पार्टी मात्र दो सीट जीतने की स्थिति में है।

सपा के राज्यसभा सदस्यों की संख्या अभी पांच है जो बढ़कर दस हो जाएगी। बसपा आगामी अप्रैल में विधान परिषद के होने वाले चुनावों में भी अपने सदस्य खोएगी। विधान परिषद की एक सौ सीटों की कुल संख्या में बसपा के 65 सदस्य हैं। विधान परिषद की सदस्य संख्या में यह किसी भी दल का रिकार्ड है।

राज्यसभा से आगामी दो अप्रैल को बसपा के पांच, सपा और भाजपा के दो-दो तथा रालोद के एक सदस्य का कार्यकाल खत्म हो रहा है। बसपा के प्रमोद कुरील, एम.अली, जयप्रकाश, गंगाचरण राजपूत तथा नरेश अग्रवाल, भाजपा के विनय कटियार और कलराज मिश्र, सपा के महेन्द्र मोहन गुप्ता तथा वीरपाल सिंह यादव और रालोद के महमूद असद मदनी का कार्यकाल खत्म होगा। इनमें जयप्रकाश और नरेश अग्रवाल हाल ही में सपा में शामिल हुए हैं। भाजपा के कलराज मिश्र विधानसभा चुनाव में लखनऊ पूर्वी सीट से जीत चुके हैं।

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