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लगातार बढ़ रहा है महिलाओं से जुड़े अपराधों का आंकड़ा

देश की आधी आबादी के सशक्तीकरण की बात करने वाली बिहार की नीतीश सरकार के कार्यकाल में महिलाओं से जुडे़ अपराधों में वृद्धि का क्रम लगातार जारी है और गत वर्ष यह आंकड़ा बढ़कर 7498 पर पहुंच गया।

बिहार राज्य पुलिस मुख्यालय से प्राप्त आंकडों के मुताबिक प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों की संख्या वर्ष 2011 के नवंबर महीने तक बढ़कर 7498 हो गयी और इस दौरान बलात्कार की 868, अपहरण की 2697, छेड़खानी की 35, दहेज हत्या की 1286 और दहेज प्रताड़ना की 2612 घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।

नीतीश कुमार ने नवंबर 2005 में बिहार में सत्ता की बागडोर संभाली और उस वर्ष प्रदेश में महिलाओं से जुडे़ अपराधों की कुल संख्या 4442 थी और यह वर्ष 2006, 2007, 2008, 2009 और 2010 में बढ़कर क्रमश: 4974, 4969, 6186, 6393, 6790 हो गयीं।

पिछले नौ सालों के दौरान बिहार में महिलाओं से जुड़े अपराध के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो वर्ष 2003 में दर्ज किए गए कुल 98296 संज्ञेय अपराधों में महिला से जुड़े अपराधों की संख्या 3899 थी जो कुल संज्ञेय अपराध का 3.96 प्रतिशत थी, जबकि वर्ष 2010 में दर्ज किए गए कुल 137572 संज्ञेय अपराधों में महिलाओं से जुडे़ मामले 6790 रहे जो कुल संज्ञेय अपराधों का 4.93 प्रतिशत है।

देश में वर्ष 2011 में हुई जनगणना के प्रारंभिक आंकड़ों के मुताबिक बिहार की वर्तमान आबादी 10 करोड़ 38 लाख 4 हजार 837 है, जिनमें चार करोड़ 96 लाख 19 हजार 290 महिलाएं हैं।

महिला सशक्तीकरण के राष्ट्रीय मिशन द्वारा एचीविंग कनवर्जेस फार इम्पावरमेंट आफ वुमेन विषय पर गत 21 फरवरी को पटना में आयोजित एक सम्मेलन में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा था कि देश में महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक प्रयास हो रहे हैं पर इसके लिए जितनी शक्ति और साधन का उपयोग किया जा रहा, उसके अनुरूप उपलब्धि नहीं मिल रही है।

उन्होंने कहा कि देश में आधी आबादी महिलाओं की है और उनके हक और अधिकार की रक्षा के लिए उनकी आवश्यकताओं को समझना बहुत जरुरी है।

मुख्यमंत्री ने लिंग अनुपात को दुरूस्त किए जाने के साथ महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता जताते हुए कहा कि समता के आधार पर जो समाज बनेगा वह सुंदर और स्वस्थ होगा।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार महिलाओं के समावेशी विकास के लिए पांच सूत्री रणनीति के तहत योजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है, जिसके अंतर्गत नीतिगत एवं कानूनी ढांचे का विकास एवं सुदृढी़करण, समुदाय एवं समाज का शिक्षण तथा लड़कियों के लिए औपचारिक स्कूली शिक्षा और महिलाओं को आर्थिक प्रोत्साहन और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि बिहार राज्य मंत्रिमंडल द्वारा तीन नवंबर 2011 को पूरे प्रदेश में कुल 40 महिला थाना खोले जाने को मंजूरी प्रदान किए जाने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गत 23 जनवरी को अपनी सेवा यात्रा के क्रम में नालंदा जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में महिलाओं की समस्याओं, आपराधिक मामलों को देखने के लिए स्त्री शक्ति द्वारा संचालित प्रदेश के प्रथम महिला थाने का उद्घाटन किया।

बिहार में खोले जाने वाले इन 40 महिला थानों के लिए कुल 647 पदों के सृजन किया गया है, जिनमें पुलिस निरीक्षक के 21, सहायक निरीक्षक के 121, सहायक अवर निरीक्षक के 101, हवलदार के 80 और सिपाही के 324 पद शामिल हैं। इन सभी महिला थानों की स्थापना पर कुल 25 करोड़ 44 लाख रूपये का खर्च आएगा।

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