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दादू की सीख

दादा जी बगीचे की सफाई शुरू करने ही वाले थे कि बगल वाले रामू काका उन्हें किसी काम से अपने साथ ले गए। दादा जी के जाने के बाद सुमित ने सोचा कि क्यों न मैं ही यह कूड़ा-करकट साफ दूं। बगीचे की सफाई करने के बाद वह थोड़ी देर के लिए बैठ गया, तभी उसके कुछ दोस्त वहां आ गए। फलों से लदे पेड़ और रंग-बिरंगे फूलों को देख कर उसके दोस्तों ने कहा, ‘खेलने और खाने के लिए इससे बढ़िया जगह और क्या होगी?’

सुमित के दादा जी को पेड़-पौधों से बहुत प्यार था। गांव में उनका बड़ा सा घर और घर के पीछे एक सुंदर बगीचा भी था। बगीचे में रंग-बिरंगे खुशबूदार फूलों, साग-सब्जियों के अलावा केले, अमरूद और आम के पेड़ भी थे। अपने हरे-भरे बगीचे को देख कर दादा जी बहुत खुश होते थे। लेकिन इस बार उनकी खुशी दोगुनी हो गई, जब उन्हें यह पता चला कि उनका पोता सुमित गर्मियों की छुट्टियों में यहां रहने के लिए आ रहा है।

जैसे-जैसे दिन बीत रहे थे, पोते के मिलने की खुशी में दादा-दादी की बैचेनी भी बढ़ रही थी। आखिर वह दिन भी आ गया। एक दिन सुबह जब दादाजी को बगीचे में अखबार पढ़ते हुए कार के हॉर्न की आवाज सुनाई दी, तो उन्होंने देखा कि दरवाजे पर अपनी मम्मी-पापा के साथ सुमित खड़ा है। दादाजी ने उसे प्यार से अपनी गोद में उठाया और सबके साथ घर के अंदर चले गए।

बहू-बेटे और पोते को एक साथ देख कर दादी जी भी बहुत खुश हुईं। उन्होंने अपने बेटे से पूछा, ‘बेटा, इस बार तो तुम कुछ दिनों के लिए रुकोगे न?’ मां की बात सुन कर सुमित के पिता ने कहा, ‘नहीं मां, हम कल ही यहां से चले जाएंगे। हां, इस बार सुमित छुट्टियों में यहां रहेगा।’ अपने पापा से यह बात सुन कर सुमित बहुत खुश हुआ। अगले दिन अपने बेटे-बहू को विदा कर दादाजी घर वापस आए तो सुमित उनका इंतजार कर रहा था। सुमित ने उनसे कहा, ‘दादाजी, मैं गांव देखना चाहता हूं।’ उसकी बात सुन कर दादीजी ने कहा, ‘आज इसे गांव की सैर करवा लाओ और कुछ बच्चों से इसकी दोस्ती भी करवा देना, ताकि यह उनके साथ खेल सके।’ बड़े-बड़े खेत, नदी में नहाते बच्चों और कुएं से पानी भरती औरतों को देख कर सुमित बहुत खुश हुआ। एक दिन उन्होंने सुमित से कहा, ‘देखो बेटा, कुछ दिन मैं अपने बगीचे की देखभाल करना चाहता हूं, इसलिए मैं तुम्हारे साथ घूमने नहीं जा सकता। तुम चाहो तो अपने दोस्तों के साथ जा सकते हो।’ दादा जी की बात सुन कर सुमित ने कहा कि मैं भी आपके साथ बगीचे में चलूंगा।

दादा जी बगीचे की सफाई शुरू करने ही वाले थे कि बगल वाले रामू काका उन्हें किसी काम से अपने साथ ले गए। दादा जी के जाने के बाद सुमित ने सोचा कि क्यों न मैं ही यह कूड़ा-करकट साफ दूं। बगीचे की सफाई करने के बाद वह थोड़ी देर के लिए बैठ गया, तभी उसके कुछ दोस्त वहां आ गए। फलों से लदे पेड़ और रंग-बिरंगे फूलों को देख कर उसके दोस्तों ने कहा, ‘खेलने और खाने के लिए इससे बढ़िया जगह और क्या होगी?’ उनकी बात सुन कर सुमित ने कहा, ‘चलो आज हम यहीं खेलते हैं।’ सब ने मिल कर खूब धमा-चौकड़ी मचाई। किसी ने पेड़ पर चढ़ कर फल तोड़े, तो किसी ने पौधों से फूल। किसी को इस बात का ध्यान नहीं रहा कि उनकी भागम-भाग से नन्हे-नन्हे पौधे कुचले जा रहे हैं। अचानक उन्हें दादाजी की गरजदार आवाज सुनाई दी। उन्हें देख कर सब बच्चे भाग खड़े हुए। सुमित ने दादाजी को इतने गुस्से में पहले कभी नहीं देखा था। आवाज सुन कर दादी जी भी बाहर आ गईं। दादाजी ने सुमित से गुस्से में कहा, ‘मेरे पीछे से तुमने और तुम्हारे दोस्तों ने मिल कर सारे बगीचे का सत्यानाश कर दिया। अरे, तुमने किताबों में गांव के बारे में पढ़ तो लिया, लेकिन इतना भी नहीं जानते कि पेड़-पौधों में भी जान होती है। वे भी हमारी तरह हंसते और रोते हैं।’ दादा जी की डांट खा कर सुमित दादीजी से लिपट कर रोने लगा। दादी उसे घर के अंदर ले गईं। उन्होंने उसे प्यार से अपनी गोद में बिठाया और समझाते हुए कहा, ‘देखो तुम्हारे दादा जी ने तम्हें केवल डांटा ही था और तुम उनकी बातों से दुखी होकर रोने लगे। ठीक इसी तरह फूलों, पेड़-पौधों को भी दर्द होता है, जब कोई उन्हें बेदर्दी से तोड़ता है। अनजाने में ही सही, तुम सब ने मिल कर फूलों के साथ-साथ उन पौधों को भी नष्ट कर दिया, जो अभी बहुत छोटे थे।’ दादीजी की बात सुन कर सुमित को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने दादी से कहा, ‘क्या दादा जी मुङो इस गलती के लिए माफ कर देंगे? क्या हमारा बगीचा पहले की तरह सुंदर हो जाएगा?’ ‘हां, जरूर बन जाएगा,’ अंदर आते हुए दादा जी ने कहा। दादी ने सुमित को दादा जी के पास जाने के लिए कहा। वह डरता हुआ उनके पास गया और कहा, ‘दादाजी, मुङो माफ कर दीजिए। मैं आगे से हमेशा पेड़-पौधों और फूलों का ध्यान रखूंगा।’ उसकी बात सुन कर दादा जी खुश हुए और कहा, ‘हम कल दोबारा अपने बगीचे को साफ करके नए पौधे लगाएंगे ताकि कुछ समय बाद हमारा बगीचा पहले की तरह हरा-भरा हो जाए।’ यह कह कर दादा जी ने सुमित को अपने गले लगा लिया।                                 

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