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नहीं गा पाती मादा बुलबुल

बुलबुल खुले स्थानों में रहना पसंद करती है। यूरोप में बुलबुल की एकमात्र प्रजाति पाई जाती है। इसके ऊपर नीले रंग का धब्बा होता है, जबकि अन्य प्रजातियों में यह हल्के भूरे रंग की होती है

बुलबुल को तो तुमने देखा ही होगा और कितनी बार उसे गाते भी सुना होगा। लेकिन क्या तुम जानते हो कि मादा बुलबुल नहीं गा सकती। वो तो सिर्फ क्री-क्री की आवाज निकालती है। बुलबुल एक छोटी सी काली चिड़िया होती है। यह अपनी मीठी आवाज के लिए नहीं, बल्कि लड़ने की आदत के कारण जानी जाती है। लोग इसे पालते भी हैं। इनमें केवल नर बुलबुल ही गा पाते हैं।
 
हम हमेशा बुलबुल की आवाज सुनकर ये अंदाजा लगाने लगते हैं कि मादा बुलबुल कितना सुंदर गाती होगी। लेकिन वो तो गा ही नहीं सकती। पर ऐसा भी नहीं है कि मादा बुलबुल की आवाज सुरीली नहीं होती। बस ये गा नहीं पाती। देखने में ये प्यारी चिड़िया बुलबुल हरे-भूरे मटमैले रंग की होती है। ये हल्का सा पीला और हरा रंग लिए हुए भी होती है। इसका शरीर पतला-दुबला होता है। लंबी दुम और ऊपर की तरफ उठी चोटी के कारण इसे बड़ी आसानी से पहचाना जा सकता है।
 
खाने में इसे कीड़े-मकोड़े, फल-फूल ज्यादा पसंद हैं। विश्व भर में इनकी कुल 2600 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनकी कई प्रजातियां भारत में भी पाई जाती हैं, जिनमें से एक गुलदुम बुलबुल है। कई वन्य प्रजातियों को ग्रीन बुलबुल भी कहा जाता है। लगभग सभी अफ्रीकी प्रजातियां वर्षा वनों में पाई जाती हैं।
 
बुलबुल खुले स्थानों में रहना पसंद करती है। यूरोप में बुलबुल की एकमात्र प्रजाति पाई जाती है। इसके ऊपर नीले रंग का धब्बा होता है, जबकि अन्य प्रजातियों में ये हल्के भूरे रंग की होती है। भारत में पाई जाने वाली बुलबुल की कुछ प्रजातियां ये हैं- गुलदुम बुलबुल, सिपाही बुलबुल, मछरिया बुलबुल, पीली बुलबुल आदि। इसी तरह की एक और खूबसूरत बुलबुल है, जिसका नाम है शाह बुलबुल। इसे अंग्रेजी में पैराडाइज फ्लाइकेचर कहा जाता है। यह बुलबुल सफेद रंग की होती है। इसके सिर पर काले रंग की कलंगी होती है। साथ ही दो लंबे रिबन जैसी पूंछ भी होती है, जबकि मादा बुलबुल हल्के लाल-भूरे रंग की होती है और इसकी पूंछ नही होती।

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