DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

अदृश्य गुलाबी रंग

अगर आपको गुलाबी रंग पसंद है या आप सोचते हैं कि गुलाबी रंग प्यार और रोमांस का प्रतीक है, तो एक विशेषज्ञ की बात आपको गुस्से से लाल- पीला कर सकती है। इंग्लैंड में रेडियो पर एक लोकप्रिय विज्ञान कार्यक्रम चलाने वाले रॉबर्ट क्रलविच का कहना है कि गुलाबी दरअसल कोई रंग नहीं है, यह हमारी कल्पना का रंग है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आपकी गुलाबी रंग की कमीज या लिपस्टिक का कोई रंग ही नहीं है, लेकिन क्रलविच की बात के पीछे एक वैज्ञानिक तर्क है।

उनका कहना है कि इंद्रधनुष के रंगों में गुलाबी कोई रंग नहीं है। गुलाबी रंग दो रंगों को मिलाकर बनता है लाल और बैंगनी, और ये दोनों रंग इंद्रधनुष के दो छोरों पर होते हैं। इसका अर्थ यह है कि गुलाबी रंग की तरंगें नहीं होतीं। अन्य रंगों की प्रकाश तरंगों में से कुछ हमारी आंखें ग्रहण करती हैं, कुछ को नहीं करतीं और इस तरह हमें गुलाबी रंग का होना मालूम देता है। इस मायने में गुलाबी रंग हमारी आंख तक नहीं पहुंचता, वह एक परावर्तित रंग है। इस मामले की तह तक जाने के लिए हमें थोड़ा दिमाग और आंख की रंग पहचानने की तकनीक को समझना होगा।

दरअसल, जिन्हें हम रंग कहते हैं, वे निश्चित तरंग लंबाई की प्रकाश किरणें हैं या हम कहें कि लगभग 390 एनएम से लेकर 750 एनएम तरंग लंबाई की विद्युत चुंबकीय तरंगों को हम आंखों से देख सकते हैं। अब इसमें अलग-अलग रंग अलग-अलग तरंग लंबाइयों की वजह से दिखते हैं, मसलन 700 से 635 एनएम तक लाल रंग होता है, 635 से 590 एनएम तक नारंगी रंग होता है वगैरा। 750 के ऊपर और 390 के नीचे तरंग लंबाई की तरंगें आंख से नहीं दिखाई देतीं, इसलिए इन्हें इन्फ्रा रेड और अल्ट्रा वॉयलेट किरणें कहते हैं। हमारी आंखों के रेटिना में एक खास किस्म की कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें कोन कहते हैं और ये कोशिकाएं रंग पहचानने में मददगार होती हैं।

मानवीय आंखों में कोन तीन प्रकार के होते हैं, जो अलग-अलग रंगों को पहचानते हैं यानी बुनियादी तौर पर हम तीन वर्णों के जोड़-घटाने के जरिये सारे रंग पहचानते हैं। लेकिन हमारी आंखें कितनी संवेदनशील हैं, यह इस बात से पता चलता है कि हम लगभग एक करोड़ रंगों को अलग-अलग पहचान सकते हैं। आंखों से यह सूचना तीन अलग-अलग किस्म की राहों या चैनल्स से दिमाग तक पहुंचती है। कई जीवों की आंखों में चार किस्म के कोन होते हैं, कुछ में कम होते हैं, और इस तरह उनकी रंगों की पहचान बदलती है।

तो बात गुलाबी रंग की हो रही थी। जाहिर है वर्णक्रम में गुलाबी रंग कहीं हो ही नहीं सकता, क्योंकि ऐसी कोई तरंग लंबाई नहीं होती, जो गुलाबी रंग का प्रतिनिधित्व करे। बहरहाल यह तार्किक और तकनीकी बात है, कई वैज्ञानिक भी इससे सहमत नहीं हैं। इसका सबसे महत्वपूर्ण सबूत यह है कि आप गुलाबी रंग बना सकते हैं और देख भी सकते हैं। वैसे भी रंग वह है, जिसे अपनी आंखें और अपना दिमाग ग्रहण कर सके। अलग-अलग जीवों की रंग देखने या ग्रहण करने की क्षमता अलग-अलग होती है, कई जीव ऐसे हैं, जिन्हें कोई रंग नहीं दिखता, उनके लिए सारी दुनिया ब्लैक ऐंड ह्वाइट फिल्म की तरह है।

कई लोग ऐसे भी होते हैं, जिन्हें रंगों में शब्द या संगीत की ध्वनियां सुनाई देती हैं यानी उनके दिमाग में अलग-अलग तरंग लंबाइयों को ग्रहण करने के क्षेत्रों में कुछ ज्यादा तालमेल हो जाता है। इस स्थिति को ‘साइनेस्थेशिया’ कहते हैं, बहरहाल, ‘गुलाबी ठंड’ तो हम सभी कहते हैं। हम कह सकते हैं कि गुलाबी रंग हमारे दिलो दिमाग में है, तो उसका अस्तित्व है, वैज्ञानिक कुछ भी कहें।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:अदृश्य गुलाबी रंग