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अंतरिक्ष अन्वेषण में महिलाएं शुरू से आज तक

विज्ञान की अनेक शाखाओं की तरह अंतरिक्ष अनुसंधान में भी महिलाओं ने बहुत तेजी से अपनी पहचान बनाई है। वर्ष 1963 में अंतरिक्ष में जाने वाली पहली महिला वेलेंटीना तेरेस्कोवा से लेकर आज तक कई देशों की दजर्नों महिलाएं अंतरिक्ष मिशन का हिस्सा बन चुकी हैं और यह संख्या बढ़ती जा रही है। आज तक कितनी महिलाएं अंतरिक्ष में गईं और पुरुषों की अपेक्षा इस क्षेत्र में वे कहां ठहरती हैं, हालिया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के अवसर पर कालीशंकर की रिपोर्ट

महिलाओं ने जीवन के हर क्षेत्र को बहुत संजीदगी से निभाया है और जीवंत किया है। अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भी महिलाओं के महान योगदान रहे हैं। सितंबर 2011 तक विश्व के सात देशों (अमेरिका, रूस/सोवियत संघ, कनाडा, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन) की 56 महिलाएं अंतरिक्ष में जा चुकी थीं। इन महिलाओं में 46 अमेरिका की, 3 रूस/सोवियत संघ, 2 कनाडा, 1 फ्रांस, 2 जापान, 1 दक्षिण कोरिया तथा 1 महिला ब्रिटेन की थी। 46 अमेरिकी महिला अंतरिक्ष यात्रियों में दो भारतीय मूल की महिलाएं - कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स भी शामिल हैं। अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भी महिलाओं ने वे सारे कार्य किये, जो जटिल रहते हैं।

महिलाओं के अंतरिक्ष में जाने का सिलसिला वेलेंटीना तेरेस्कोवा से शुरू होता है, जो 16 जून 1963 को अंतरिक्ष में गईं। वह एक साधारण टेक्सटाइल मिल वर्कर थीं। तेरेस्कोवा के अंतरिक्ष में जाने के बाद 19 वर्ष तक कोई महिला अंतरिक्ष में नहीं गई। 19 अगस्त 1982 को एक बार फिर सोवियत संघ से एक और महिला स्वेतलाना सैवित्स्क्या अंतरिक्ष में गई। इस सूची में तीसरी महिला अमेरिका की सैली राइड थीं, जो 1983 को स्पेस शटल चैलेंजर से गई थीं। 

स्पेस शटल की प्रथम महिला कमांडर एवं प्रथम पायलट अमेरिकी महिला अंतरिक्ष यात्री एलीन कॉलिंस थीं। उनके पिता के पास उनकी शिक्षा के लिए पैसे नहीं थे। एलीन ने पित्जा की दुकान में तथा चर्च में सिक्के गिनने की नौकरी करके अपनी शिक्षा पूरी की। वर्तमान में 400 कि.मी. की ऊंचाई पर बन रहा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन एल्फा की प्रथम कमांडर पैगी व्ह्टिसन हैं तथा वे इस स्टेशन की प्रथम विज्ञान ऑफिसर भी हैं।

अंतरिक्ष में दो बार जाने वाली पहली महिला स्वेतलाना सैवित्स्क्या तथा प्रथम अमेरिकी महिला डॉ. सैली राइड थी। दूसरा नाम जूडिथ रेसनिक का है। अंतरिक्ष में एक साथ जाने वाली दो महिलाएं डॉ. सैली राइड और कैथरीन सुलिवन रही हैं। अंतरिक्ष में जाने वाली पहली मां अन्ना फिशर थीं, जो नवंबर 1984 में गई। अमेरिकी सेना की प्रथम महिलाएं थीं नैन्सी शेरलॉक एवं सूसन हेल्म्स। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में जाने वाली प्रथम महिला भी सूसन हेल्म्स थीं।

अन्य देशों की महिलाओं में रूस/सोवियत संघ की एलीन कोन्डाकोवा थीं। कोन्डाकोवा पूर्व सोवियत कास्मोनॉट वेलेरी रयूमिन की पत्नी हैं। कनाडा की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री राबर्टा बान्डर थीं तथा दूसरी महिला पेयटे जूली। राबर्टा पॉलीटैक्निक विश्वविद्यालय टोरंटो की प्रतिष्ठित प्रोफेसर भी रह चुकी हैं। फ्रांस की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री क्लाउडी हेग्नेयर थीं। अब तक जापान से दो महिलाएं अंतरिक्ष में गईं, वे हैं चियाकी मुकाई एवं नाओको यामाजाकी। अंतरिक्ष में जाने वाली दक्षिण कोरिया की एकमात्र महिला रही हैं सोयीन ई तथा ब्रिटेन की हेलेन शर्मन। 

लंबे प्रवास
महिलाओं ने अंतरिक्ष में पुरुषों की तुलना में लंबे अंतरिक्ष प्रवास किये हैं। एक समय में सबसे लंबा प्रवास करने वाली महिला अंतरिक्ष यात्री हैं भारतीय मूल की सुनीता विलियम्स, जिन्होंने 194 दिन 18 घंटे गुजारे। सभी अंतरिक्ष उड़ानों द्वारा वहां सबसे अधिक समय गुजारने वाली प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री हैं पेगी व्ह्टिसन। उनका प्रवास था 376 दिन 17 घंटे का। दरअसल, अब तक कुल सात देशों की महिलाएं अंतरिक्ष में जा चुकी हैं तथा उन्होंने अब तक कुल (सितंबर 2011 तक) 3098 दिन 22 घंटे का समय गुजारा है। अमेरिकी महिलाओं का अंतरिक्ष में गुजारा गया कुल समय 2781 दिन 3 घंटे तथा सोवियत संघ/रूस की महिलाओं का कुल समय 201 दिन 2 घंटे का है।

स्पेस वॉक और अन्वेषण
अंतरिक्ष यान से बाहर निकल कर अन्वेषण संबंधित कार्य (जैसे अंतरिक्ष यानों के बाह्य भाग का रिपेयर, डिप्लॉयमेंट, परीक्षण इत्यादि) करने को स्पेस वॉक कहते हैं, मुक्त अंतरिक्ष में किया जाने वाला यह कार्य बहुत जोखिमपूर्ण भी होता है। महिलाओं में सबसे अधिक स्पेस वॉक पेगी व्ह्टिसन ने की है, जिनकी संख्या 6 है तथा इसकी कुल अवधि रही है 39 घंटा 44 मिनट। दूसरे नम्बर पर सुनीता विलियम्स (चार स्पेस वॉक, 29 घंटा 17 मिनट) है। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से प्रथम स्पेस वॉक करने वाली महिला भी पेगी व्ह्टिसन रही हैं। किसी महिला द्वारा सबसे लम्बी स्पेस वॉक करने का रिकॉर्ड सूसन हेल्म्स के नाम है और स्पेस वॉक की अवधि थी 8 घंटा 56 मिनट। अब तक अंतरिक्ष में महिलाओं ने कुल 29 स्पेस वॉक्स की हैं, जिनकी कुल अवधि 188 घंटा 10 मिनट रही है। स्पेस वॉक करने वाली पहली महिला थी सोवियत संघ की स्वेतलाना सैवित्स्क्या तथा प्रथम अमेरिकी महिला थी कैथरीन सुलीवन।

अंतरिक्ष में पांच बार जाने वाली छह महिलाएं रही हैं, जिनके नाम है डॉ. शैनन ल्युसिड, सूसन हेल्म्स, तमारा जर्नीगन, मार्शा इविन्स, बोनी डनबर, जेनिस वॉस। चार बार जाने वाली 6 महिलाएं, 3 बार जाने वाली 9, 2 बार जाने वाली 15 महिलाएं तथा शेष एक एक बार अंतरिक्ष में गई हैं। अंतरिक्ष पर्यटक एकमात्र महिला रही हैं ईरान की अनोसेह अंसारी। अप्रैल 2011 तक के आंकड़ों के आधार पर छह महिला अंतरिक्ष यात्री सोवियत/रूसी अंतरिक्ष कार्यक्रमों के अंतर्गत तथा 48 महिलाएं नासा अंतरिक्ष कार्यक्रमों के अंतर्गत जा चुकी हैं।

अंतरिक्ष में अन्वेषण के कार्यों में महिलाएं कुछ मामलों में पुरुषों से बेहतर दिखी हैं। महिलाएं अंतरिक्ष में ठंड, गर्मी और यान के कम्पनों को पुरुषों की तुलना में बेहतर तरीके से ङोल पाने का भी सामर्थ्य रखती हैं। महिलाएं अंतरिक्ष विकिरण से पुरुषों की तुलना में कम प्रभावित होती हैं। इसके अलावा, उनका औसत वजन पुरुषों से कम होता है। लिहाजा, 120 पौंड वजनी महिला को 160 पौंड  वजन वाले पुरुष की तुलना में कम आक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। कम भार अंतरिक्ष यात्रा का एक उपयोगी गणक होता है।

कुछ दुर्घटनाएं
‘टीचर इन स्पेस’ कार्यक्रम के अंतर्गत अमेरिकी अध्यापक महिला क्रिस्टा मैकाफी प्रथम महिला होने वाली थीं, लेकिन स्पेस शटल चैलेंजर की दुर्घटना (28 जनवरी 1986) के कारण उनकी तथा उनके साथ के सभी अंतरिक्ष यात्रियों (जिसमें जूडिथ रेसनिक भी थीं) की मृत्यु हो गई थी। इन दो के अलावा अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में दो अन्य महिलाओं की भी मृत्यु हो चुकी है। 1 फरवरी 2003 को पृथ्वी पर वापस लौट रहा स्पेस शटल कोलम्बिया टैक्सस राज्य के ऊपर नष्ट हो गया था। इसमें भारतीय मूल की कल्पना चावला व अन्य महिला डॉ. लॉरेल क्लार्क के साथ सबकी मृत्यु हो गई थी।

मैत्री के पल
अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम अश्वेत महिला डॉ. माय जेमिसन थीं। सोवियत और अमेरिकी अंतरिक्ष यानों द्वारा यात्रा कर चुकी क्रमश: प्रथम अमेरिकी एवं सोवियत महिलाएं थीं - अमेरिका की ट्रेसी कॉडवेल एवं सोवियत संघ की एलेना कोंडाकोवा। एक यादगार क्षण तब आया था, जब एक महिला कमांडर ने दूसरी कमांडर का स्वागत अंतरिक्ष में किया था, जब पेगी व्ह्टिसन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की प्रथम कमांडर थीं, उन्होंने कमांडर पामेला मेलर्वॉय (स्पेस शटल की दूसरी कमांडर) का स्वागत किया था 25 अक्टूबर 2007 को।

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