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पॉवरफुल हो गए ट्रिपलआईटी के निदेशक

सूबे के एक मात्र भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (ट्रिपलआईटी) में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। अभी तक संस्थान के सभी महत्वपूर्ण निर्णय बोर्ड ऑफ गर्वनर्स (बीओजी) लेती थी। मानव संसाधन विकास मंत्रलय (एमएचआरडी) से नामित प्रसिद्ध व्यक्ति इसका अध्यक्ष होता था। निदेशक इसके सचिव होते थे। अब बीओजी को भंग कर इसके स्थान पर बोर्ड ऑफ मैनेजमेन्ट (बीओएम) का गठन कर दिया गया है। खास बात यह है कि इस नई निर्णायक बॉडी के अध्यक्ष संस्थान के निदेशक होंगे। यानी की सारे महत्वपूर्ण निर्णय लेने में अब निदेशक की अहम भूमिका हो जाएगी।

तकनीकी शिक्षा, शोध तथा अन्य शैक्षिक क्रियाकलापों को देखते हुए केंद्र सरकार ने दिसंबर 2011 में ट्रिपलआईटी को यूजीसी रेगुलेशन 2010 के तहत पाठ्यक्रम निर्धारण, नए कोर्स को शुरू करने तथा वित्तीय मामलों की अतिरिक्त स्वतंत्रता प्रदान की थी। इसी के तहत संस्थान में यह बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। अभी तक बीओजी के चेयरमैन वीके थडानी थे। अब इसे भंग कर इसके स्थान पर बीओएम का गठन किया गया है। वित्तीय मामलों में निर्णय लेने के लिए संस्थान में अलग से वित्त समिति भी है। इसके चेयरमैन भी वीके थडानी ही थे। अब बीओएम के साथ वित्त समिति के चेयरमैन भी निदेशक ही होंगे। खास बात यह है कि संस्थान के वित्तीय मामलों में अब सरकार का भी हस्तक्षेप नहीं होगा।
संस्थान अपनी मर्जी के मुताबिक नए कोर्स शुरू कर सकेगा। उसका पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए भी संस्थान स्वतंत्र होगा। यूं कहा जाए कि इस संस्थान में अब केंद्र सरकार की दखलंदाजी पहले की तुलना में बहुत कम हो जाएगी। संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट लखनऊ के निदेशक प्रो. आरके शर्मा, नेशनल केमिकल लेब्रोटरी पुणे के आर्गेनिक केमेस्ट्री डिवीजन के हेड प्रो. गनेश पांडेय, ट्रिपलआईटी के वरिष्ठ शिक्षक प्रो. जीसी नंदी, प्रो. आरसी त्रिपाठी, प्रो. बीआर सिंह, आईआईटी कानपुर के प्रो. मनींद्र अग्रवाल, विप्रो लिमिटेड बंगलुरू के चीफ स्टैटिजी अफसर आर प्रेमजी, ट्रिपलआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुपम अग्रवाल को बीओएम का सदस्य नियुक्त किया गया है। एमएचआरडी ने ट्रिपलआईटी के प्रो. बीबी तिवारी को बीओएम का सचिव नामित किया है। संस्थान के निदेशक डॉ. एमडी तिवारी ने बताया कि इस स्वतंत्रता से समय से निर्णय लेने में तो मदद मिलेगी। संस्थान देश की जरूरत के मुताबिक पाठ्यक्रम और अन्य शैक्षिक क्रियाकलाप को संचालित कर सकेगा। उनका दावा है कि इससे संस्थान की और अधिक तरक्की हो सकेगी।

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