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ताकत के रूप में उभरे भारतीय मूल के अमेरिकी मतदाता

ताकत के रूप में उभरे भारतीय मूल के अमेरिकी मतदाता

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा नवंबर में दोबारा इस पद पर चुने जाने के लिए जहां एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। वहीं, भारतीय मूल के अमेरिकी मतदाता तेजी से एक ताकत के रूप में उभरे हैं।

अमेरिका के ‘साउथ एशियन कम्यूनिटीज’ संगठन की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक जो यहां मतदान करने के पात्र हैं, उनकी संख्या अब 10 लाख को पार कर गई है।

भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों की कुल आबादी में 2000-2010 दशक के दौरान 68 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2000 में जो कुल आबादी 19 लाख थी वह बढ़कर अब 31.9 लाख हो गई है।

आंकड़ों के मुताबिक मिश्रित नस्ल को छोड़ एकल समुदाय के आधार पर भारतीय मूल की अमेरिकी आबादी इसी अवधि के दौरान 16.7 लाख से बढ़कर 28.4 लाख हो गई है।

वर्ष 2010 की जनगणना के आधार पर भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक जो मतदान कर सकते हैं, उस संख्या में 100 फीसदी की वृद्धि हुई है। वर्ष 2000 में मतदान के योग्य अमेरिकी मूल के भारतीय नागरिकों की संख्या 576000 थी जो बढ़कर अब 11.5 लाख पहुंच गई है।

संगठन के मुताबिक गैर-अमेरिकी नागरिकों की आबादी भी वर्ष 2000 से बढ़ी है। इस आबादी में भविष्य में अमेरिकी नागरिकता ले सकने वाले ग्रीन कार्ड होल्डर भी शामिल हैं। यह भी मतदाताओं की संख्या में इजाफा करेंगे।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक तीसरे सबसे बड़े एशियाई-अमेरिकी समूह हैं। चीनी मूल के अमेरिकी नागरिकों की संख्या 37.9 लाख और फिलीपींस मूल की 34.2 लाख है।

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