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सैटेलाईट बताएगा इको सेंसटिव जोन का हाल

देसी व विदेशी परिंदों के चैन को बनाए रखने के लिए तैयार जोनल मास्टर प्लान में सैटेलाईट से ली गई इमेजिनरी भी जुड़ेगी। हरसक (हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर) ने इसकी इमेजिनरी तैयार कर गुड़गांव फॉरेस्ट डिवीजन को सौंप दी है। इस इमेजिनरी को आधार बनाकर इको सेंसटिव जोन की इन्वेन्ट्री तैयार की जाएगी। जिससे पार्क से सटे पांच किलोमीटर के दायरे में वन क्षेत्र, ग्रीन एरिया व निर्माण का खाका तैयार हो जाएगा।

आगे सेंसटिव जोन में अगर छेड़छाड़ होती है तो इस इन्वेन्ट्री को पैमाना माना जाएगा। इमेजिनरी जोनल मास्टर प्लान में अटैच करने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय को भी सौंपी जानी है। गुड़गांव से 15 किलोमीटर दूर स्थित सुल्तानपुर नेशनल पार्क से पांच किलोमीटर के दायरे को इकोलॉजिकल सेंसटिव एरिया की फेहरिस्त में शुमार किया गया है। इसके लिए एक दस सदस्यीय कमेटी उपायुक्त की अध्यक्षता में बनाई गई है। कमेटी ने इको सेंसटिव एरिया के लिए जोनल मास्टर प्लान तैयार किया है। प्लान में अटैच करने के लिए सैटेलाईट इमेजिनरी बनाने का काम हिसार के हरसक ने पूरा कर दिया है। एडिशनल डीएफओ बी एस राणा ने बताया कि इमेजिनरी के आधार पर वन विभाग जो इन्वेन्ट्री तैयार करेगा उसमें वन क्षेत्र व वर्तमान कंस्ट्रक्शन का ब्योरा होगा। प्लान को हरी झंडी केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय से मिलनी है। इको सेंसटिव जोन होने की वजह से पार्क से सटे एरिया में लैंड यूज चेंज करवाना आसान नहीं रह जाएगा। सुल्तानपुर में बने इस नेशनल पार्क को 1971 में बर्ड सैंक्चुरी का दर्जा मिला बाद में साल 1991 में इसे नेशनल पार्क घोषित किया गया। देश में पक्षियों की कुल 1200 प्रजातियां होने का अनुमान है। अकेले सुल्तानपुर बर्ड लेक में करीब 250 प्रजातियां देसी व विदेशी मेहमानों की देखी जा सकती हैं। जिनमें 50 के करीब प्रजातियां प्रवासी भी होती हैं।

इकोलॉजिकल सेंसटिव एरिया- केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रलय ने 29 जनवरी 2009 को ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के जरिए सुल्तानपुर से सटे क्षेत्र को इकोलॉजिकल सेंसटिव एरिया घोषित किया। इन्वायर्नमेंट प्रोटेक्शन एक्ट 1986 के तहत इसे इको सेंसटिव के रूप में विकसित किया जाना है। इसमें सुल्तानपुर के अलावा चंदू, साढराणा, कालीवास गांवों की जमीने भी हैं। लगभग 300 एकड़ में फैले पार्क में 170 एकड़ के करीब लेक एरिया है।

लगेगी पाबंदी- जोनल मास्टर प्लान अप्रूव होने के बाद इको सेंसटिव जोन में इंडस्ट्रियल यूनिट लगने, कंस्ट्रक्शन होने, माइनिंग, पेड़ काटने, बोरवेल, शोर, गंदा पानी छोड़ने, कचरे के निपटारे पर कड़ी पाबंदियां होंगी।

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