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सफलता की ‘कहानी’ है विद्या बालन

इस साल के अलग-अलग फिल्म अवॉर्डस में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का खिताब अलग-अलग हीरो को मिला, लेकिन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री सबमें एक ही थी, विद्या बालन। विद्या ने हिंदी फिल्म अभिनेत्रियों के लिए तय हर पुराने मानक बखूबी तोड़े हैं। ‘डर्टी पिक्चर’ के बाद अब ‘कहानी’ में विद्या मुख्य सेलिंग प्वॉइंट के तौर पर पेश की जा रही हैं। उनके मुरीदों की सूची दिनोंदिन लंबी हो रही है। जाहिर है, कुछ तो खास बात है विद्या में।

डर्टी पिक्चर के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार की उपलब्धि ने विद्या बालन को उनकी पसंदीदा अभिनेत्रियों रेखा, शबाना और स्मिता पाटिल की श्रेणी में खड़ा कर दिया है। ‘पा’, ‘परिणीता’ और ‘इश्किया’ के बाद पिछले वर्ष ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘डर्टी पिक्चर’ और अब ‘कहानी’ तीनों ही महिला प्रधान फिल्में रही हैं। आज विद्या अर्थपूर्ण व व्यावसायिक दोनों में सफल हैं।

खुद विद्या मानती हैं, ‘कौन कहता है कि महिला प्रधान फिल्में नहीं बनतीं। मुझे तो लगता है कि भारतीय सिनेमा में यह समय महिलाओं के लिए आशाओं से भरा है। उनके लिए खास दमदार स्क्रिप्ट से लेकर सिनेमा में महिलाओं की एंटरटेनिंग वेल्यू लगातार बढ़ रही है।’
 
नेशनल अवॉर्ड मिलने की खुशी को विद्या कुछ ऐसे जाहिर करती हैं, ‘मेरा सपना पूरा हुआ.. मेरा पहला राष्ट्रीय पुरस्कार.. यह अवॉर्ड मेरे लिए खास है।’ कहानी फिल्म के डायरेक्टर सुजॉय घोष के अनुसार विद्या अपने किरदार में बहुत कुछ जोड़ देती हैं। उदाहरण के लिए फिल्म कहानी में ही लंदन से अपने पति को कोलकाता में ढूंढ़ने आई गर्भवती विद्या बागची के किरदार से जुड़े कई प्रश्न पूछे। फिल्म में डेढ़ दिन में 20 से 24 घंटे की यात्रा के बाद होने वाली असुविधाओं को पुलिस स्टेशन में लकड़ी की कुर्सी पर बैठते हुए विद्या ने इतनी बारीकी से दिखाया है कि आप उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह सकते।

विद्या को सफलता आसानी से मिल गई हो, ऐसा नहीं है। ‘परिणीता’ से पहले वे कई प्रोजेक्ट में रिजेक्शन का सामना कर चुकी थीं। परिणीता के लिए स्क्रीन टेस्ट भी देना पड़ा। स्टार फैमिली और ब्यूटी कॉन्टेस्ट विजेता सरीखा कोई तमगा उनके पास नहीं था। खुद विद्या कहती हैं, ‘यह सफलता आज अच्छी लगती है, इसके लिए मैंने लंबा संघर्ष किया है। यह संभव हो पाया तो सिर्फ इसलिए, क्योंकि मैं इसे हासिल करना चाहती थी।’

एक बात और, जो विद्या को अन्य सफल दक्षिण भारतीय अभिनेत्रियों वैजयंती माला, हेमा मालिनी, जया प्रदा, रेखा, श्रीदेवी और मीनाक्षी शेषाद्रि से अलग करती है, वह यह कि विद्या उस स्तर की डांसर नहीं हैं। लेकिन विद्या कहती हैं, आप जो भी हासिल करना चाहते हैं उसके लिए मेहनत तो करनी ही पड़ती है, आसानी से मिली सफलता में का मजा नहीं लिया जा सकता।

विद्या को कंफर्ट जोन से निकालकर मॉडर्न और ग्लैमरस कपड़ों में पेश करने वाले ‘द डर्टी पिक्चर’ के निर्देशक मिलन लूथरिया भी विद्या की प्रतिभा की तारीफ करते नहीं थकते। उनके अनुसार विद्या ने ही सही मायनों में अपनी कला का विश्लेषण नहीं किया है। वह बारीक चीजों को भी आसानी से समझ लेती हैं। ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ में विद्या को संजय दत्त के अपोजिट पेश करने वाले फिल्म निर्माता विधु विनोद चोपड़ा के अनुसार, ‘विद्या ने सबसे अच्छा काम किया कि उसने सिर्फ अपने दिल की सुनी।’ 

विद्या को एक बात और अलग करती है, वह यह कि विद्या ने किसी भी निर्देशक के साथ एक बार से अधिक काम नहीं किया। वे किसी कैंप में नहीं हैं। इस मामले में अपवाद हैं तो बस नो वन किल्ड जेसिका के डायरेक्टर राज कुमार गुप्ता, जिनके साथ वे इमरान हाशमी के साथ ‘घनचक्कर’ में काम करने जा रही हैं। अभी तक विद्या ने आमिर, शाहरुख और सलमान में से किसी के साथ काम नहीं किया। पिछली कुछ फिल्मों में उन्होंने  अरशद वारसी, नसीरुद्दीन शाह, तुषार कपूर और इमरान हाशमी के साथ स्क्रीन शेयर की। जिस तरह से विद्या ने घोर ग्लैमर और व्यावसायिकता के इस दौर में एक अलग राह पर चलते हुए अलहदा मुकाम बनाया है, वह निश्चित रूप से काबिले-तारीफ है।

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