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साइबर सुरक्षा की चुनौती

एफबीआई डायरेक्टर रॉबर्ट मूलर ने साइबर संसार व कंप्यूटर नेटवर्क को आने वाले वर्षों में अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है। उनके मुताबिक, यह आतंकवाद से भी ज्यादा खतरनाक सिद्ध हो सकता है। परंतु उनके इस बयान में सुरक्षा सचिव लियोन पनेट्टा की गूंज सुनाई देती है। पिछले साल पनेट्टा ने कहा था, ‘अगला पर्ल हार्बर सरकारी सुरक्षा तंत्र या विद्युत ग्रिड पर साइबर हमला हो सकता है।’

दरअसल, आपराधिक या राज्य प्रायोजित हैकिंग [RTF bookmark start: nextParagraph][RTF bookmark end: nextParagraph] की तादाद बढ़ती जा रही है। इनसे बचने के लिए सरकारी संस्थाएं व निजी कंपनियां अरबों-खरबों रुपये खर्च करने को मजबूर हैं। यहां तक इस तरह की हैकिंग को रोकने के लिए वे हैकरों की भर्ती कर रही हैं। मकसद साफ है, यानी एक चोर को पकड़ने के लिए दूसरे चोर को पालना ही पड़ता है।

डिजिटल क्राइम की जटिल दुनिया का यह कटु सच है। अक्सर कंपनियां, यहां तक कि सैन्य संस्थाएं भी कहती हैं कि उन्हें सबसे बेहतर ‘सॉफ्टवेयर वर्कर्स’ चाहिए, ताकि वे अपने सिस्टम की रक्षा खुद कर सकें और अंतत: हैकरों को नौकरी देकर इसका हल निकाला जाता है। ब्रिटेन के पहले साइबर सुरक्षा मंत्री लॉर्ड वेस्ट ने कहा था, ‘अगर हैकर शरारती हैं, तो वे अन्य शरारती लड़कों द्वारा उन्हें परास्त किए जाने का लुत्फ उठाएंगे।’ खैर, पिछले हफ्ते रॉबर्ट मूलर ने अपने भाषण में अमेरिकी कंपनियों को सलाह दी कि वे साइबर हमलों से बचने की तरकीबों को अपनाने पर ध्यान केंद्रित करें और जिनसे खतरे हैं, उन्हें पकड़ने में मदद करें।

सच्चाई यही है कि कई शातिर हैकर अब कंपनियों के सुरक्षा तंत्र से जुड़ गए हैं। जाहिर है, वे साइबर जासूसी और चोरी के मकसद को समझते हैं। अधिकतर हैकर्स स्मार्ट तथा युवा होते हैं। इनमें से ज्यादातर महज पंद्रह साल के हैं। वे तो बस मजे के लिए हैकिंग करते हैं। उन्हें कोई धन नहीं चाहिए। कुछ हैकर खुद को गोपनीयता विरोधी कहते हैं। वे कॉपीराइटेड मूवीज और म्यूजिक को मुफ्त में डाउनलोड कर दूसरों की मदद में भरोसा रखते हैं। वाकई, नई पीढ़ी डिजिटल डिवाइस से चिपके रहना पसंद करती है। उन्हें हैकर बनने से हमें रोकना ही होगा।
द क्रिश्चियन साइंस मॉनिटर, अमेरिका

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