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पूर्वाचल में हार के कारणों पर मंथन शुरू

सूबे में सियासी जमीन खिसकने के बाद अब कांग्रेस व भाजपा में हार के कारणों पर मंथन शुरू हो गया है। वैसे भी दोनों दलों के हाईकमान की ओर से बड़े पदाधिकारियों को हटाने के संकेत पहले ही दिए जा चुके हैं। पार्टी इस बात को लेकर मंथन कर रही है कि आखिर चूक कहां से हुई? पूर्वाचल में पार्टी के दिग्गज नेता राजनाथ सिंह एवं ओमप्रकाश सिंह के गढ़ चंदौली और मिर्जापुर में अधिकांश प्रत्याशी अपनी जमानत तक गवां बैठे। 

पार्टी सूत्रों की मानें तो इस बारे में भाजपा जल्द ही विधानसभा क्षेत्रवार समीक्षा करने जा रही है। अगले सप्ताह से पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी मंथन करेंगे। दोनों राष्ट्रीय पार्टियों को इस बात की सबसे अधिक चिंता है कि वर्ष 2014 में लोकसभा का चुनाव होना है। ऐसे में बढ़े हुए 20 फीसदी वोटरों ने जिस तरह से दोनों दलों को ‘जोर का झटका’ दिया है उससे पार्टी अब नए सिरे से रणनीति बनाने पर विवश है।


भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की मानें तो बड़े नेताओं ने चुनाव को काफी हल्के में लिया। इसके पीछे दो कारण थे। पार्टी को लग रहा था कि भ्रष्टाचार व महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस के साथ वोटर नहीं है। अन्ना हजारे एवं रामदेव प्रकरण में भाजपा के खुलकर साथ देने के बाद पार्टी इस भ्रम का शिकार हो गई कि भ्रष्टाचार मामले में युवाओं का एक बड़ा वर्ग भाजपा के साथ खड़ा रहेगा। लेकिन, भ्रम टूटा तो पार्टी सतह पर नजर आयी। युवाओं का एक बड़े वर्ग के सपा में जाने के पीछे अब दोनों दलों के वरिष्ठ नेता यहीं तर्क दे रहे हैं कि समाजवादी पार्टी ने युवाओं को लैपटाप व बेरोजगारी भत्ता का सपना दिखा दिया और एक मुश्त वोट उसके खाते में चला गया।

पार्टी सूत्रों की मानें तो पूर्वाचल के जिलों में दोनों दलों के संगठन का कार्य देखने वाले पदाधिकारियों के इस तर्क से हाईकमान संतुष्ट नहीं है। कारण भी साफ है। पूरे पूर्वाचल में दोनों दलों को महज आठ सीटें मिलीं। तीन जिलों को छोड़ दिया जाए तो बाकी जिलों में दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के बड़े-बड़े दावों की हवा निकल गई। खासकर, पार्टी के दिग्गज नेता राजनाथ सिंह व ओमप्रकाश सिंह के घर चंदौली व मिर्जापुर में अधिकांश प्रत्याशियों की जमानत जब्त होने को लेकर अब दोनों नेताओं पर पार्टी में अंदर ही अंदर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। चुनावी रिपोर्ट पर गौर किया जाए तो मुगलसराय में छब्बू पटेल व चुनार में खुद ओमप्रकाश सिंह किसी तरह अपनी जमानत बचा पाए लेकिन सैयदराजा में हरेन्द्र राय, सकलडीहा से शशिकांत राजभर, चकिया से शिवतपस्या पासवान, मिर्जापुर सदर, मड़िहान, सोनभद्र के घोरावल में तमाम भाजपा प्रत्याशियों के क्षेत्र में बड़े नेताओं ने जमकर प्रचार-प्रसार किया था लेकिन पार्टी पांचवें स्थान पर चली गई। वाराणसी में सेवापुरी, शिवपुर, रोहनियां व अजगरा का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। हालांकि इस मुद्दे पर जिलाध्यक्ष रामप्रकाश दुबे कुछ कहने से इंकार करते हैं। लेकिन उन्होंने इतना कहा कि जल्द ही विधानसभा स्तर पर पार्टी समीक्षा करने जा रही है।

एक वरिष्ठ पदाधिकारी के मुताबिक काशी प्रांत के संगठन मंत्री ओमप्रकाश श्रीवास्तव, काशी प्रांत के अध्यक्ष देवेन्द्र सिंह, काशी व गोरखपुर के चुनाव प्रभारी ह्न्दयनाथ सिंह की कार्यशैली को लेकर भी पार्टी में घमासान मचा हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर देवेन्द्र प्रताप सिंह व ओमप्रकाश श्रीवास्तव लखनऊ बुलाए गए हैं। हालांकि कोई भी पदाधिकारी खुलकर नहीं बोल रहा लेकिन पूर्वी उत्तर प्रदेश से जुड़े एक बड़े नेता ने दो दिन पूर्व लखनऊ में पूरी चुनावी प्रक्रिया एवं संगठन प्रभारियों पर सवाल खड़े करते हुए यहां तक कह दिया कि पूरे चुनाव तक ‘एयरकंडीशन आफिस’ में बैठकर केवल कागजी खानापूरी की गई। आग में घी डालने का कार्य किया है स्थानीय एक पदाधिकारी ने। इस पदाधिकारी ने संगठन की कार्यशैली पर बिंदूवार पूरी रिपोर्ट तैयार कर हाईकमान को भेजी है।
 
पार्टी सूत्रों की मानें तो जिलेवार विरोध करने वाले एवं प्रचार प्रसार से दूर रहने वाले की पदाधिकारियों की सूची तैयार की जा रही है। उधर, कांग्रेस ने भी पूर्वाचल में हुई हार को गंभीरता से लेते हुए पुरनियों के बदले नए चेहरों को लाने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी के अंदरखाने में इस बात की चर्चा जोरो पर है कि वाराणसी सहित आसपास के जिले में तमाम पदाधिकारियों पर गाज गिर सकती है। अबकी पार्टी लोकसभा चुनाव को देखते हुए ऐसे तमाम पुरनिए पदाधिकारियों व पूर्व जनप्रतिनिधियों से किनारा करने पर विचार कर रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि जल्द ही संगठन में चौंकाने वाले बदलाव हो सकते हैं।

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