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फलक की सेहत सुधरी

वह मौत से जिंदगी की जंग जीत चुकी है। 60 दिन बाद वह बाहर की आबोहवा में सांस ले पाएगी, वेंटिलेटर से आईसीयू, आईसीयू से वार्ड और अब वार्ड के बाद अस्पताल से छुट्टी मिलने का रास्ता उसके लिए लगभग खुल गया है। एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती मासूम को अगले हफ्ते अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। इलाज कर रहे डॉक्टर उसकी सेहत ही नहीं संरक्षण को लेकर भी चिंतित है। इसलिए कहा जा रहा है कि सीडब्लूसी द्वारा बच्ची के संरक्षण लेने की जिम्मेदारी पर उसे छुट्टी मिलेगी।

बच्ची की मां और बहन पर विश्वास डॉक्टर विश्वास नहीं कर रहे, क्योंकि कहीं न कहीं उनकी वजह से बच्ची की यह हालत हुई है। बच्ची का इलाज कर रहे एम्स ट्रामा सेंटर के न्यूरोसजर्न डॉ. दीपक अग्रवाल ने बताया कि उसके शरीर के घाव व संक्रमण ठीक हो गए हैं, लेकिन मानसिक रूप से वह पूरी तरह ठीक नहीं हो पायी है। इसलिए ट्रामा सेंटर से जाने के बाद भी उसे देखभाल की जरुरत होगी, इस सूरत में सीडब्लूसी को बच्चाी का कुछ समय के लिए कानूनी अभिभावक माना जाएगा। क्योंकि बच्ची की मां और बहन पहले से ही सीडब्लूसी के संरक्षण में इसलिए वह उसकी देखभाल नहीं कर पाएगी। यदि इस संदर्भ में कमेटी ने पहल नहीं कि तो दोबारा ट्रामा सेंटर में ही बच्ची को कुछ दिन और रखा जा सकता है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि बच्ची की सेहत में बीते पन्द्रह दिन में तेजी से सुधार हुआ है, वार्ड में शिफ्ट होने के बाद उसकी सेहत बेहतर हुई है, उसके यदि बेहतर चिकित्सीय सहायता और देखभाल मिलेगी तो उसकी मानसिक निष्क्रिता भी खत्म हो जाएगी। मालूम हो कि दो वर्षीय मायूम फलक को 18 जनवरी को एम्स ट्रामा सेंटर में बुरी हालत में ट्रामा सेंटर में भर्ती किया गया था, उसके चेहरे पर मानव दांत के निशान और शरीर पर गहरे जख्म थे। बच्ची के इलाज के दौरान अब तक छोटी बड़ी पांच सजर्री की जा चुकी हैं।

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